अपना शहर चुनें

States

COVID-19 in India: दिल्ली में कोरोना वायरस की दूसरी लहर हुई तेज, अभी और बिगड़ेंगे हालात- डॉ. रणदीप गुलेरिया

दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्र​मित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्र​मित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

एम्स (AIIMS) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria) ने इस बात पर भी जोर दिया कि ठंड बढ़ने के साथ ही कोरोना वायरस (Coronavirus) और खतरनाक होगा. ठंड में वायरस हवा में ज्यादा देर तक रह सकेगा जिसके कारण स्थिति बिगड़ेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 2, 2020, 10:35 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. भारत (India) में पिछले कई दिनों से कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के मामलों में कमी देखने को मिली है, लेकिन दिल्ली (Delhi) में हालात तेजी से बदल रहे हैं. दिल्ली में पिछले एक हफ्ते से हर​ दिन 5 हजार से अधिक केस ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में इस बात को लेकर भी चर्चा जोरों पर हैं कि क्या देश में कोरोना वायरस के संक्रमण की तीसरी लहर आ चुकी है. इस बारे में एम्स (AIIMS) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria) ने साफ इनकार कर दिया है. डॉ. गुलेरिया का कहना है कि आप अभी के आंकड़ों को देखकर कोरोना की तीसरी लहर की बात नहीं कर सकते. हम ये कह सकते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर जो कमजोर हुई थी वो अब एक बार फिर तेज हो गई है.

गुलेरिया ने कहा कि अब लोग कोरोना को लेकर बेपरवाह होते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी और कार्यक्रमों में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा जा रहा है और बाजारों में भी लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं. त्योहार का सीजन आने के बाद से बाजार में भीड़ बढ़ चुकी है और लोगों को लगने लगा है कि कोरोना अब खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है.

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि हमें ये समझने की जरूरत है कि कोरोना अभी अपने आधे रास्ते में पहुंचा है. दिल्ली में जिस तरह से लोगों ने लापरवाही बरती है उसका नतीजा है कि कोरोना का पीक दिल्ली में एक बार फिर दिखाई देने लगा है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें.

डॉ. गुलेरिया ने इस बात पर भी जोर दिया कि ठंड बढ़ने के साथ ही कोरोना वायरस और खतरनाक होगा. उन्होंने बताया कि ठंड में वायरस हवा में ज्यादा देर तक रह सकेगा जिसके कारण संक्रमण की संभावना और भी ज्यादा बढ़ सकती है. एम्स डायरेक्टर ने माना कि प्रदूषण बढ़ने के साथ वायरस और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगा. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण और प्रदूषण दोनों से ही फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है. उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में हमें और ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है नहीं तो संक्रमण के मामले बहुत ज्यादा बढ़ सकते हैं.



इसे भी पढ़ें : सबकुछ ठीक रहा तो फरवरी 2021 तक आ सकता है कोविड-19 रोधी टीका: डॉक्टर राय

कोरोना और प्रदूषण से बढ़ सकते हैं संक्रमण के मामले
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ठंड के मौसम में ज्यादातर लोग घरों में रहते हैं और एक साथ बैठना पसंद करते हैं, ऐसे में कोरोना का खतरा बढ़ सकता है. वहीं प्रदूषण के कारण कोरोना का वायरस उसके साथ मिलकर ज्यादा समय तक हवा में रह सकता है जो एक खतरे की घंटी है. डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ठंड में कोरोना के संक्रमण से बचना है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मास्क लगाने की आदत और समय समय पर हाथ धुलने की आदत को अपनी जिंदगी में शामिल करना होगा. गुलेरिया ने कहा कि बुजुर्ग या पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग बाहर जाने से बचें. उन्होंने कहा कि एयर क्वॉलिटी खराब होने से सेहत को नुकसान पहुंचेगा. बाहर तब जाएं जब धूप हो और जब भी बाहर जाएं तो मास्क जरूर लगाएं.

इसे भी पढ़ें :- COVID-19 in India: मृत्‍यु दर घटना अच्‍छा संकेत, पर भारत देख सकता है कोरोना की कई पीक: विशेषज्ञ

युवाओं की लापरवाही बुजुर्गों पर भारी
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि युवा ये मानकर बैठे हैं कि कोरोना उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता है. उन्हें अगर कोरोना होगा भी तो हल्का जुखाम या बुखार आएगा और वो ठीक हो जाएंगे. लेकिन वो इस बात को भूल रहे हैं कि वो ही घर के अंदर कोरोना ला रहे हैं जहां पर उनके बुजुर्ग माता-पिता रहते हैं. ऐसा नहीं है कि युवाओं में कोरोना के हल्के लक्षण ही रहते हैं. कोरोना अस्पतालों में कई युवाओं की हालत बेहद खराब है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज