AIIMS के डायरेक्टर बोले- दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में घट रहे हैं कोरोना के केस, लेकिन रहना होगा सावधान

AIIMS के डायरेक्टर बोले- दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में घट रहे हैं कोरोना के केस, लेकिन रहना होगा सावधान
एम्स निदेशक गुलेरिया

AIIMS के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा, 'ये हमारे लिए चिंता की बात है. आमतौर पर देखा जाता है कि हमारे देश में सर्दी, जुकाम और बुखार के केस मानसून और ठंड के दिनों में बढ़ जाते हैं. हालांकि कोरोना एक नया वायरस है इसके बारे में फिलहाल कुछ साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 24, 2020, 11:58 AM IST
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(स्नेहा मोरदानी)

नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि अलग-अलग शहरों में अलग-अलग वक्त पर कोरोना का पीक आएगा. उन्होंने ये भी कहा है कि दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में कोरोना का पीक आ चुका है और अब यहां नए केस का ग्राफ नीचे आ रहा है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि इसके बावजूद हमें अभी सावधान रहने की जरूरत है. बता दें कि डॉक्टर गुलेरिया देश में कोविड-19 टास्क फोर्स के सदस्य भी हैं. डॉक्टर गुलेरिया ने कोरोना से जुड़े कई सवालों पर न्यूज़ 18 से खास बातचीत की. पढ़ें इस बातचीत के मुख्य अंश

कब आएगा कोरोना का पीक?
डॉक्टर गुलेरिया के मुताबिक कोरोना का पीक देश भर में एक साथ नहीं आएगा. बल्कि उन्होंने कहा कि ये अलग-अलग शहरों में अलग-अलग वक्त पर आएगा. उन्होंने कहा, 'दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में पीक आ चुका है. लेकिन कई दूसरे राज्यों जैसे कि बिहार और असम में अब केस तेज़ी से बढ़ रहे हैं. यहां हमें आक्रमक रणनीति अपनानी पड़ेगी. जहां कोरोना का ग्राफ नीचे आ रहा है वहां भी आक्रामक रणनीति अपनाने की जरूरत है. आपने देखा कि कुछ राज्यों में केस कम हुए तो सोशल डिस्टेंसिंग का लोगों ने पालन करना छोड़ दिया और अब नतीजे आपके सामने हैं. वहां फिर से केस बढ़ रहे हैं.'
लॉकडाउन का कितना होगा फायदा?


'जहां ज्यादा केस हैं वहां हमें आक्रामक होना पड़ेगा. सिर्फ लॉकडाउन ही नहीं बल्कि हमें घर-घर जाकर सर्वे करना पड़ेगा जिससे कि उस खास इलाके में कोरोना के संक्रमण को रोका जा सके. संक्रमित लोगों की पहचान करना फिर उन्हें आइसोलेट करना बेहद जरूरी है.'

एंटीबॉडी टेस्ट का फायदा?
डॉक्टर गुलेरिया ने कहा, 'इस टेस्ट से हमें ये फायदा हो रहा है कि कितने लोगों में कोरोना के लक्षण कम या न के बराबर हैं. उदाहरण के तौर पर आप दिल्ली में देखिए काफी बड़ी संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित हो गए जबकि उन्हें इसका पता भी नहीं चला. बिना किसी टेस्ट और इलाज के वो ठीक हो गए. इससे ये साबित होता है कि हमारे यहां मौत की दर और भी कम हैं जो फिलहाल हम दावा कर रहे हैं. लेकिन बुरी खबर ये है कि लोगों को संक्रमण के बारे में पता नहीं है और वो दूसरों में भी कोरोना फैला रहे हैं.'

एंटीबॉडी बनने पर कब तक रहती है इम्युनिटी?
डॉक्टर गुलेरिया ने कहा, 'ये वैक्सीन के नजरिए से भी काफी अहम सवाल है. मौजूदा डेटा ये दिखाता है कि किसी भी शख्स में कोरोना होने के बाद करीब 3 महीने तक इम्युनिटी बनी रहती है. हालांकि ये अलग-अलग लोगों पर भी निर्भर करता है. हम लोग अभी इस पर रिसर्च कर रहे हैं.'

क्या मानसून में बढ़ेंगे कोरोना के केस?
डॉक्टर गुलेरिया ने कहा, 'ये हमारे लिए चिंता की बात है. आमतौर पर देखा जाता है कि हमारे देश में सर्दी, जुकाम और बुखार के केस मानसून और ठंड के दिनों में बढ़ जाते हैं. हालांकि कोरोना एक नया वायरस है इसके बारे में फिलहाल कुछ साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है. ऐसे मौसम में ये वायरस लंबे वक्त तक लोगों के बीच रह सकता है. पश्चिम के देशों में कहा जा रहा है कि जाड़े के दिनों में ये फिर से खतरनाक रूप ले सकता है. ऐसे में हमें सावधान रहने की जरूरत है.'
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