COVAXIN के ह्यूमन ट्रायल को लेकर एम्‍स ने दिया प्रोटोकॉल में सुधार का सुझाव

COVAXIN के ह्यूमन ट्रायल को लेकर एम्‍स ने दिया प्रोटोकॉल में सुधार का सुझाव
कोरोना की संभावित वैक्‍सीन का ह्यूमन ट्रायल आज से शुरू हो रहा है.

फार्मास्‍यूटिकल कंपनी भारत बायोटेक भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ मिलकर कोविड 19 (Covid 19 vaccine) की संभावित वैक्‍सीन का ह्यूमन ट्रायल मंगलवार से शुरू कर रही है.

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नई दिल्‍ली. देश-दुनिया में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस (Coronavirus) की वैक्‍सीन और दवा विकसित करने के लिए लगातार शोध हो रहे हैं. ऐसे में भारत की फार्मास्‍यूटिकल कंपनी भारत बायोटेक भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ मिलकर कोविड-19 (Covid 19 vaccine) की संभावित वैक्‍सीन का ह्यूमन ट्रायल मंगलवार से शुरू कर रही है. इस बीच दिल्‍ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (AIIMS) के विशेषज्ञों की एक टीम ने Covaxin नामक इस संभावित वैक्‍सीन के ह्यूमन ट्रायल के प्रोटोकॉल में बदलाव करने का सुझाव दिया है.

जानकारी के मुताबिक एम्‍स की एथिक्‍स कमेटी ने आईसीएमआर और सरकार को सुझाव दिया है कि वैक्‍सीन के ह्यूमन ट्रायल के प्रोटोकॉल के 11 प्‍वाइंट्स में सुधार किया जाए. उसके अनुसार अगर ये सुधार होते हैं तो इससे ह्यूमन ट्रायल और अधिक व्‍यावहारिक और सटीक हो पाएगा. वहीं आईसीएमआर के प्रोटोकॉल के मुताबिक ह्यूमन ट्रायल फास्‍ट ट्रैक आधारित होना चाहिए. यह भी कहा गया है कि अगर सैंपल टारगेट अधिक हो तो ट्रायल के नतीजे और अधिक सटीक आएंगे.

अभी जो प्रोटोकॉल है, उसके अनुसार कोवैक्सिन के ह्यून ट्रायल में कोरोना वायरस पर इसके असर, शरीर के अंदर और बाहर इसके असर, वैक्‍सीन के साइड इफेक्‍ट और रोग प्रतिरोधक पर इसके असर को देखा जाना है. साथ ही यह दो चरणों में होना है. पहले चरण में 18 से 55 साल के लोगों और दूसरे चरण में 12 से 65 साल तक के लोगों पर यह ट्रायल होगा. पिछले दिनों ऐसा कहा गया था कि 15 अगस्‍त तक इस वैक्‍सीन की घोषणा हो सकती है.



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चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा कोविड-19 का टीका जल्दबाजी में नहीं बनाने की सलाह के बाद आईसीएमआर ने 15 अगस्त तक कोरोना वायरस के टीके को लाने की योजना के तहत क्लीनिकल परीक्षण की प्रक्रिया तेज करने के कदमों का बचाव करते हुए शनिवार को कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह वैश्विक रूप से स्वीकार्य नियमों के अनुरूप है.

 

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा कि उसके महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव के, क्लीनिकल परीक्षण स्थलों के प्रमुख अन्वेषकों को लिखे पत्र का आशय किसी भी आवश्यक प्रक्रिया को छोड़े बिना अनावश्यक लाल फीताशाही को कम करना तथा प्रतिभागियों की भर्ती बढ़ाना है.
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