केरल विमान हादसा: खाई में गिरकर दो टुकड़े हुआ विमान, आखिर कैसे बच गई 150 से ज्यादा सवारियों की जान

हादसे में दोनों पायलट दीपक वसंत साठे और अखिलेश कुमार की मौत हो गई. विमान को हादसे से बचाने में पायलट दीपक वसंत साठे का अनुभव काम आया.

Air India flight crash-lands: लैंड करते ही विमान दो हिस्सों में टूट गया. आमतौर पर ऐसे बड़े हादसे में किसी की भी बचने की उम्मीद बेहद कम होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैसे एक बड़ा हादसा टल गया.

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    कोझिकोड. केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट (Kozhikode Airport) पर दुबई से आ रहा एअर इंडिया का विमान शुक्रवार शाम हादसे (Kerala Plane Accident) का शिकार हो गया. इस हादसे में अब तक 18 लोगों की जान गई है. दोनों पायलट की भी मौत हो गई, जबकि सौ से ज्यादा यात्री घायल हो गए. विमान में 190 यात्री सवार थे. हादसे के दौरान विमान रनवे से फिसकर 35 फीट खाई में गिर गया और फिर दो हिस्सों में टूट गया. हादसे की तस्वीरें डराने वाली है. यात्रियों की किस्मत अच्छी थी कि हादसे में काफी कम लोगों की मौत हुई.

    कैसे टला एक बड़ा हादसा?
    कोझिकोड में शाम सात बजकर 41 मिनट पर रनवे पर फिसल गया. कोझिकोड एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक वहां कई घंटों से ज़ोरदार बारिश हो रही थी. ऐसे में विमान के पायलट कैप्टन वसंत साठे एयरपोर्ट के दो चक्कर काटने के बाद रनवे पर उतरने की कोशिश की. साठे वायुसेना के अनुभवी फायलट पायलट रह चुके हैं और उन्हें वहां सोर्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया था. पहली कोशिश के वक्त कैप्टन साठे को यह मुश्किल काम लगा. ऐसे में वह विमान लैंड करने की जगह उसे दोबारा आसमान में ले गए. इसके थोड़ी देर में उन्होंने दोबोरा कोशिश की. इस बार उन्होंने विमान को रनवे पर उतारा, लेकिन वहां पानी जमा होने के कारण विमान रनवे से आगे निकलकर आगे खाई में गिर गया और वहां उसके दो टुकड़े हो गए. आमतौर पर ऐसे बड़े हादसे में किसी की भी बचने की उम्मीद बेहद कम होती है, लेकिन यहां विमान में सवार 190 लोगों में से केवल 18 लोगों की मौत हुई, जबकि 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैसे एक बड़ा हादसा टल गया.

    कोझिकोड बनाम मैंगलोर हादसा
    कोझिकोड एयरपोर्ट पर टेबल टॉप रनवे है. ऐसे रनवे पहाड़ों के ऊपर होते हैं. यानी हवाई पट्टी के इर्द-गिर्द गहरी खाई होती है. दरअसल पहाड़ों को काट कर ये रनवे तैयार किए जाते हैं. ऐसे रनवे पर किसी विमान को लैंड कराना पायलट के लिए मुश्किल चुनौती होती है. आपको याद होगा साल 2010 में मैंगलोर में भी एक विमान हादसा हुआ था, जिसमें 160 यात्रियों की मौत हो गई थी. वहां भी ऐसे ही टेबल टॉप रनवे है. कोझिकोड एयरपोर्ट पर रनवे की लंबाई 2860 मीटर है. यानी मैंगलोर से करीब 400 मीटर ज्यादा. ऐसे में हो सकता है कि लंबाई थोड़ी ज्यादा होने के चलते ज्यादा बड़ा हादसा नहीं हुआ. लिहाजा डेढ़ सौ से ज्यादा यात्रियों की जान बच गई.

    अनुभवी पायलट
    हादसे में दोनों पायलट कैप्टन वसंत साठे और अखिलेश कुमार की मौत हो गई. विमान को हादसे से बचाने में पायलट दीपक वसंत साठे का अनुभव काम आया. साठे एयफोर्स के पूर्व विंग कमांडर थे. अधिकारियों के मुताबिक उन्हें कोझिकोड सेक्टर में विमान उड़ाने का लंबा अनुभव था. कैप्‍टन साठे 'Sword of honor' विजेता थे और वायु सेना अकादमी ने उन्‍हें सम्‍मानित किया था. साठे ने खराब मौसम के चलते रनवे के ऊपर दो चक्कर लगाए. इसके बाद उन्होंने लैंड करने की कोशिश की. गनीमत ये रही कि विमान में आग नहीं लगी.


    ईंधन ज्यादा लीक होने से बचाया गया
    क्रैश होते ही विमान का ईंधन लीक होने लगा. ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन में थोड़ी देरी हुई. राहत की बात ये है कि रनवे पर अधिकारियों ने ईधन लीक होते हुए देख लिया और सबसे पहले इसे रोकने की कोशिश की गई. अगर ऐसा नहीं किया जाता तो फिर आग लगने का खतरा था. आमतौर पर किसी भी विमान हादसे में आग लग जाती है. ऐसे में किसी को बचाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन राहत की बात ये रही कि अधिकारियों की सूझबूझ के चलते ऐसा नहीं हुआ.

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