भारत में वायु प्रदूषण से 2019 में हुई 16 लाख से ज्यादा लोगों की मौत, नवजातों को खतरा ज्यादा : रिपोर्ट

सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार आज लखनऊ शहर का एक्‍यूआई सबसे ज्‍यादा 328 दर्ज किया गया है.   (File Photo)
सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार आज लखनऊ शहर का एक्‍यूआई सबसे ज्‍यादा 328 दर्ज किया गया है. (File Photo)

Air Pollution: भारत सरकार के अध्ययनों से पता चला है कि भारत में हर आठ में से एक मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है; भारत में 2017 में वायु प्रदूषण के कारण हुई 12.4 लाख मौतों में से आधे से अधिक 70 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों की थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 7:54 PM IST
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(निखिल घानेकर)

नई दिल्ली. भारत (India) में बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण (Air Pollution) और कोविड-19 (Covid-19) के प्रसार को लेकर बढ़ रही अनिश्चितता के बीच यह सामने आया है कि वायु प्रदूषण अब लोगों की मौतों की बड़ी वजह बनकर उभर रहा है. इसमें भी सबसे ज्यादा खतरा नवजात शिशुओं को हो रहा है. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर (एसओजीए) रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, बाहरी और घरेलू वायु प्रदूषण लंबे समय के लिए जोखिम बनकर उभरा है- जिसके कारण स्ट्रोक, दिल का दौरा, मधुमेह, फेफड़ों का कैंसर, फेफड़ों की बीमारियां हो रही हैं. इस सबकी वजह से साल 2019 में 16,67,000 लोगों की मौत हो गई. बुधवार को सामने आई रिपोर्ट में पता चलता है कि वायु प्रदूषण अब सभी स्वास्थ्य जोखिमों के बीच मौतों का सबसे बड़ा कारक बनता जा रहा है.

वायु प्रदूषण में योगदान देने वाले विभिन्न रोगों के 2019 के आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग 60 प्रतिशत मौतें क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर (सीओपीडी) के कारण हुईं, श्वसन संक्रमण से 43 प्रतिशत, इस्केमिक के कारण 35 प्रतिशत, फेफड़े के कैंसर और इस्केमिक हृदय रोग के कारण 32 प्रतिशत मौतें हुईं. रिपोर्ट में उल्लिखित मौतों की कुल संख्या वायु प्रदूषण के कारण किसी दिए गए वर्ष में होने वाली मौतों की संख्या को बताती है, जो वायु प्रदूषण की अनुपस्थिति में होने की संभावना से पहले हुई थी.



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भारत में 2019 में 1,16,000 शिशुओं की हुई मौत
इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि वायु प्रदूषण दुनिया भर में और भारत में शिशुओं की मौत के एक बड़े कारण में से एक के रूप में उभरा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में भारत में सभी कारणों से हुई नवजात शिशुओं की मौत का 21 प्रतिशत या 1,16,000 मौतों का कारण परिवेशीय और घरेलू वायु प्रदूषण है. इस बात के संकेत मिलते हैं कि गर्भावस्था के दौरान वायु प्रदूषण के कारण जन्म के समय कम वजन और अपरिपक्व जन्म जैसी स्थिति पैदा होती है.

हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डैन ग्रीनबूम ने कहा, "एक शिशु का स्वास्थ्य हर समाज के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है और यह नवीनतम प्रमाण दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में पैदा होने वाले शिशुओं के लिए विशेष रूप से उच्च जोखिम को दिखाता है."

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भारत सरकार के अध्ययनों से पता चला है कि भारत में हर आठ में से एक मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है; भारत में 2017 में वायु प्रदूषण के कारण हुई 12.4 लाख मौतों में से आधे से अधिक 70 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों की थीं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में होने वाली मौतों में एंबियंट पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण और ओजोन प्रदूषण दो सबसे बड़े योगदानकर्ता थे. भारत में, पिछले एक दशक में, उच्च पीएम 2.5 के स्तर के संपर्क में होने के कारण 3.73 लाख मौतें हुईं और 76,500 मौतें उच्च ओजोन जोखिम से जुड़ी थीं. भले ही कोई स्पष्ट सबूत नहीं है जो यह बताता है कि वायु प्रदूषण SARS-CoV-2 के अधिक प्रसार में मदद करता है, यह अध्ययनों के माध्यम से अच्छी तरह से स्थापित किया गया है कि श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोग कमजोर प्रतिरक्षा रक्षा के कारण नए संक्रमणों के लिए अधिक जोखिम में हैं. (इस पूरी रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें)
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