मौसम बदलते ही बिगड़ी दिल्ली की आबोहवा, हरकत में आया प्रशासन

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वकील ने कहा कि किसानों को आर्थिक तौर पर सहयोग नहीं दिया गया जिसके चलते उन्हें पराली जाना आसान विकल्प लगता है. उधर, वायु प्रदूषण पर रिसर्च करने वाले पोलास मुखर्जी ने बताया कि इस वक्त जल्द से जल्द पराली जलाने से किसानों को रोकना जरूरी है, नहीं तो पिछले साल की तरह इस साल भी स्थिति बिगड़ सकती है.

Rachna Upadhyay | भाषा
Updated: October 13, 2018, 10:34 PM IST
मौसम बदलते ही बिगड़ी दिल्ली की आबोहवा, हरकत में आया प्रशासन
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Rachna Upadhyay | भाषा
Updated: October 13, 2018, 10:34 PM IST
ठंड शुरू होते ही वायु प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर में दस्तक दे दी है. इसकी सबसे बड़ी वजह पराली का जलाना बताया जा रहा है. हालांकि पिछले साल के मुकाबले स्थिति बेहतर है, लेकिन पंजाब के अलावा यूपी के कुछ इलाकों में पराली जलाने का सिलसिला जारी है. जिसे हालात बिगड़ सकते है. पर्यावरण विशेषज्ञ की माने तो अगले हफ्ते से दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर और बढ़ाना शुरू हो जाएगा.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वकील और पर्यावरण विशेषज्ञ विजय पंजवानी ने बताया कि पिछले तीन साल से दिल्ली के हालात नहीं बदले हैं. दिल्ली से सटे चार पड़ोसी राज्यों ने सिर्फ मीटिंग पर मीटिंग की, लेकिन जमीनी हकीकत पर उन्होंने कुछ नहीं किया. जिसके चलते किसान एक बार फिर पराली जलाने को मजबूर हैं.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वकील ने कहा कि किसानों को आर्थिक तौर पर सहयोग नहीं दिया गया जिसके चलते उन्हें पराली जाना आसान विकल्प लगता है. उधर, वायु प्रदूषण पर रिसर्च करने वाले पोलास मुखर्जी ने बताया कि इस वक्त जल्द से जल्द पराली जलाने से किसानों को रोकना जरूरी है, नहीं तो पिछले साल की तरह इस साल भी स्थिति बिगड़ सकती है.

मुखर्जी ने कहा कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए आदेश तो आ जाते लेकिन उसको लागू नहीं किया जाता. लेकिन पिछले साल की अपेक्षा इस साल वायु प्रदूषण बेहतर है और इसे बरकरार रखने के लिए किसानो को पराली जलाने से रोकना होगा.

बरहाल, वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मौसम विभाग अगले तीन दिनों के प्रदूषण का हाल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को बता सकेगा और इस पूर्वानुमान के आधार पर पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) तय करेगा कि स्थिति से निपटने के लिए क्या उपाय किए जाएं.

एयर क्वालिटी इमरजेंसी अर्ली वार्निंग सिस्टम का शुभारंभ सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री करेंगे. सर्दियों में हर साल दिल्ली एनसीआर की बिगड़ती हवा के मद्देनजर मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल एयर क्वालिटी इमरजेंसी अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार किया है. इस सिस्टम के तहत नोएडा का राष्ट्रीय मध्यावधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र और आइआइटीएम पुणे भी अपना नियमित इनपुट देंगे. तीनों के इनपुट को मिलाकर अंतिम पूर्वानुमान तैयार किया जाएगा. इस पूर्वानुमान में मौसम, तापमान, नमी, हवा की गति और दिशा सहित सभी अनुमान की जानकारी रहेगी.
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