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देश की पहली महिला फ्लाइट कमांडर शालिजा धामी ने कहा- एयरक्राफ्ट नहीं जानता कि उसे महिला उड़ा रही या पुरुष

देश की पहली महिला फ्लाइट कमांडेंट शालिजा धामी (Photo-ANI)

देश की पहली महिला फ्लाइट कमांडेंट शालिजा धामी (Photo-ANI)

International Women's Day: करीब 17 सालों से भी ज्यादा समय से भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे रहीं धामी को 2019 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर चेतक हेलीकॉप्टर यूनिट में देश की पहली फ्लाइट कमांडर का पद संभालने की जिम्मेदारी दी गई.

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नई दिल्ली. देश की पहली महिला फ्लाइट कमांडर शालिजा धामी ने रविवार को कहा कि भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों के लिए यह लगभग तीन दशक होगा. धामी ने कहा कि "एयरक्राफ्ट को ये नहीं पता कि उसे उड़ाने वाला पुरुष है या फिर महिला. एयरक्राफ्ट में बैठने के बाद ये एक सफर ही होता है जो सब कुछ कहता है. चाहे हम इसे कर पाएंगे या फिर नहीं. धामी ने आगे कहा कि अगर हम ऐसा करने में असमर्थ होते हैं, तो हम मौके पर नहीं पहुंच पाते. मैंने 17 साल से ज्यादा की सर्विस की है और मेरे जैसे कई और भी हैं."

करीब 17 सालों से भी ज्यादा समय से भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे रहीं धामी को 2019 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर चेतक हेलीकॉप्टर यूनिट में देश की पहली फ्लाइट कमांडर का पद संभालने की जिम्मेदारी दी गई. फ्लाइट कमांडर वायुसेना में पहली प्रमुख लीडरशिप पोजिशन होती है. धामी ने अपने करियर में चेतक और चीता हेलीकॉप्टर्स से उड़ान भरी है. इतना ही नहीं उनके नाम पर कई रिकॉर्ड्स भी दर्ज हैं. धामी चेतक और चीता हेलीकॉप्टर्स के लिए वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं.

लंबे कार्यकाल के लिए धामी को फ्लाइंग ब्रांच में स्थाई कमीशन दिया गया
शालिजा धामी वायुसेना की पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्हें लंबे कार्यकाल के लिए फ्लाइंग ब्रांच में स्थाई कमीशन दिया गया है. पंजाब के लुधियाना में रहने वाली धामी का एक बेटा भी है. मूल रूप से लुधियाना की रहने वाली धामी बचपन से ही पायलट बनना चाहती थीं.
शालिजा को चेतक हेलीकॉप्टर उड़ाने की जिम्मेदारी दी गई है जो कि एक लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर है, जिसमें 6 यात्री बैठ सकते हैं. इसकी अधिकतम स्पीड 220 किमी प्रति घंटा है.



बता दें भारत में 1994 में पहली बार महिलाओं को वायुसेना में शामिल किया गया है. लेकिन तभी से उन्हें नॉन कॉम्बैट रोल दिया गया था. दिल्ली हाईकोर्ट में चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद महिलाओं को भारतीय वायुसेना में स्थायी कमीशन का अधिकार दिया गया.
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