मोदी के नाम पर 2019 की जंग जीतेगी बीजेपी! जानें 2 दिन की कार्यकारिणी बैठक का निचोड़

दिल्ली के अंबेडकर भवन में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने की योजना बनी तो साफ था कि पार्टी देश भर के अनुसूचित जाति के लोगों को संदेश देना चाहती है.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: September 10, 2018, 5:21 PM IST
मोदी के नाम पर 2019 की जंग जीतेगी बीजेपी! जानें 2 दिन की कार्यकारिणी बैठक का निचोड़
मोदी के नाम पर 2019 जीतने की बीजेपी की कवायद, जानें 2 दिन की कार्यकारिणी का निचोड़ (Twitter Photo via PTI)
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: September 10, 2018, 5:21 PM IST
दिल्ली के अंबेडकर भवन में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने की योजना बनी तो साफ था कि पार्टी देश भर के अनुसूचित जाति के लोगों को संदेश देना चाहती है. दो दिनों तक मंथन चला. पूरा का पूरा माहौल अटलमय नज़र आया. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत पर भी सियासत चलेगी ये भी साफ हो गया.

पीएम मोदी ने नारा भी दिया, 'अजेय भारत-अटल भाजपा' और एजेंडा भी तय कर दिया. पीएम ने कार्यकारिणी के सदस्यों को दो टूक कहा कि उन्हें चुनौती कहीं नज़र नहीं आ रही है और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सत्ता में फेल हुए वो विपक्ष में भी फेल हुए हैं.

बढ़ी कीमतों या फिर बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भले ही चर्चा नहीं हुई हो, लेकिन इशारों-इशारों में पीएम मोदी ने जता दिया कि विपक्ष इस मुद्दे पर झूठ फैला रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें झूठ से लड़ना तो नहीं आता, लेकिन अब समय आ गया है कि विपक्ष के झूठ का जवाब देना ही होगा. संदेश साफ था कि बैकफुट पर रहने की बीजेपी को कोई ज़रूरत नहीं. अब हम आपको बताते हैं कि क्या रहा इस कार्यकारिणी का संदेश.

मोदी-शाह की जोड़ी पर भरोसा

चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले की ये आखिरी कार्यकारणी थी. चुनावी माहौल में पार्टी को अरसे बाद अपने संगठनात्मक चुनाव को एक साल के लिए टाल दिया. पार्टी ने प्रस्ताव पारित कर ऐलान कर दिया कि मिशन 2019 में मोदी-शाह की जोड़ी ही नैया पार लगाएगी. पीएम मोदी ने भी एक एक बूथ को मज़बूत करने की बात कही और कहा की कार्यकर्ता हर बूथ को एक चौकी मानें.

मोदी ने कहा कि कार्यकारिणी के बाद विजय के विश्वास के साथ कार्यकर्ता 125 करोड़ लोगों को जोड़ने के लिए निकल पड़े, क्योंकि महागठबंधन के पास न तो विचारधारा है, न समन्वय और ना ही नेतृत्व. पार्टी के राजनीतिक प्रस्ताव में माना गया कि इस जोड़ी ने पार्टी को 350 से ज्यादा सांसद, 1500 से ज्यादा विधायक और 19 राज्यों में बीजेपी की सरकारें दीं हैं. इसलिए जीत दिलाने का ज़िम्मा इसी जोड़ी को सौंप दिया गया.

सरकार के कामकाज को लेकर जनता के बीच जाएंगे

जीएसटी जैसे मुद्दों पर विपक्ष के उठते सवालों के जवाब में पीएम मोदी ने बीजेपी नेताओं को कहा कि 'एक राष्ट्र एक टैक्स' पर देश में 15 साल तक बहस चली. कुछ उसी तर्ज़ पर 'एक राष्ट्र एक चुनाव' पर बहस जारी रहनी चाहिए. पीएम ने कहा कि कांग्रेस को जवाब यही देना चाहिए कि 48 साल एक परिवार के बनाम बीजेपी के 48 महीने पर चर्चा होनी चाहिए.

पीएम मोदी ने अपने तमाम सांसदों और विधायकों को कहा कि अपने क्षेत्रों में मोदी सरकार की हर योजना पर 5-5 लोगों का इंटरव्यू करें, ताकि लोगों तक योजनाएं किस हद तक पहुंची इसका पता लगाया जा सके. कार्यकारिणी में नमो ऐप को लेकर एक प्रेजेंटेशन भी हुआ, जिसमें सदस्यों को बताया गया कि कैसे इसके इस्तेमाल से केंद्र सरकार के कामकाज के बारे में जनमत बनाया जा सकता है. आयुष्मान भारत योजना को पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू करने की बात भी हुई. यानी एजेंडा विकास का ही होगा.

पीएम मोदी के नाम और काम पर होगी जीत

बीजेपी जानती है कि पीएम मोदी उनके ट्रंप कार्ड हैं. कई फैसलों पर भले ही सवाल उठ रहे हों, लेकिन उनकी व्यक्तिगत छवि पर सवाल नहीं उठे हैं. तमाम सर्वे भी यही बताते हैं कि पीएम मोदी मिशन 2019 में प्रधानमंत्री के रूप में पहली पसंद हैं. पार्टी के राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि 4 साल के बाद भी मोदी की लोकप्रियता बनी हुई है और 70+ लोकप्रियता रेटिंग तो विपक्ष की समझ से परे है. पार्टी के राजनीतिक प्रस्ताव में 2022 तक नए भारत के निर्माण का ज़िक्र किया गया.

प्रस्ताव में कहा गया है कि पीएम मोदी जिस तरीके से काम कर रहे हैं उससे 2022 तक नए भारत का निर्माण संभव है.

आर्थिक हों या राजनीतिक मुद्दे तेवर आक्रमक रखें कार्यकर्ता

पीएम मोदी ने अपने कार्यकर्ताओं को आगाह भी किया कि महज़ पब्लिसिटी के लिए कुछ भी बोलने से बचें. सिर्फ पार्टी के अधिकृत प्रवक्ता ही मीडिया से बात करें और बयान दें. पीएम जानते हैं कि फिजूल की बयानबाज़ी से वार उल्टा भी पड़ सकता है. इसलिए पार्टी के बयानवीर बोलने से बचें तो ही बेहतर.

अपने अध्याय भाषण में अमित शाह ने साफ कहा कि बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता अपने तथ्यों की सही जानकारी रखें, ताकि चिदंबरम एंड कंपनी के झूठ पर पलटवार कर सके. हालांकि, महंगाई, पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ी कीमतों पर चुप्पी के कारण सवाल भी उठे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व यही जताता रहा कि विपक्ष झूठ और अफवाह उड़ा रहा है जिसका मुकाबला पार्टी को करना है. ज़ाहिर है विवादास्पद मुद्दों को न छूकर अपने कार्यकर्ताओं को आलाकमान ने यही बताया है कि ध्यान विकास के मुद्दों पर ही रहे तो बेहतर.

मोदी हटाओ मुहिम ही है महागठबंधन का एजेंडा

बीजेपी ने दो दिनों तक एक ही संदेश दिया कि विपक्ष के पास न तो नेता है और न ही नीयत अच्छी है और सोच भी एक ही है कि मोदी को हराना है. लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला. कुछ उसी तर्ज़ पर जिसपर 1971 में तमाम विपक्षी और कांग्रेस के लोग 'इंदिरा हटाओ' मुहिम में लगे थे और उन्होंने चुनाव जीत लिया था.

आखिर 2014 की मोदी लहर के बाद इस बार मोदी के नाम और काम पर जंग जीतनी है. हर राज्य में विपक्ष महागठबंधन भी बना रहा है और ऊपर से एंटी इनकंबेंसी भी होगी. ऐसे में लड़ाई आसान नहीं है और जीत का भरोसा भी सिर्फ इसलिए की पीएम मोदी की छवि बरकरार है. तभी तो एक तरफ मोदी देश भर का दौरा करने की योजना बना रहे हैं और अमित शाह संगठन को चाक-चौबंद करने में लगे हैं. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आगे-आगे क्या होता है.
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