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अजित पवार ने 13 दिन पहले ही दे दिया था नाराजगी का इशारा, नहीं समझ पाए चाचा शरद- रिपोर्ट

News18Hindi
Updated: November 24, 2019, 2:13 PM IST
अजित पवार ने 13 दिन पहले ही दे दिया था नाराजगी का इशारा, नहीं समझ पाए चाचा शरद- रिपोर्ट
चाचा शरद पवार को दे दिया झटका!

अजित पवार (Ajit Pawar) और देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के बीच पहली बार 10 नवंबर को बातचीत हुई थी. इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच लगभग हर दिन बातचीत हो रही थी.

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  • Last Updated: November 24, 2019, 2:13 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र में शनिवार सुबह से सियासी घमासान जोरों पर है. यहां एनसीपी नेता अजित पवार ने अपने चाचा और पार्टी सुप्रीमो शरद पवार से बगावत करके बीजेपी को समर्थन दे दिया. अजित के समर्थन के बल पर देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. सरकार गठन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, जिस पर वहां अब सोमवार को सुनवाई होगी. हालांकि इस बीच सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सियासत के धुरंधर शरद पवार को उन्हीं के भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) ने आखिर कैसे गच्चा दे दिया. इसे लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आ रही है. अंग्रेजी अखबार मुंबई मिरर ने दावा किया है कि अजित ने 10 नवंबर को ही शरद पवार (Sharad Pawar) के सामने बीजेपी के साथ जाने की मंशा जता दी थी, लेकिन पवार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया. इसके बाद वह लगातार बीजेपी से बातचीत करते रहे.

शरद पवार को पहला संकेत
अखबार के मुताबिक, अजित पवार ने 17 नवंबर को शरद पवार के साथ हुई बैठक में ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि वो बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं. ये बैठक पुणे में हुई थी, जिसमें अजित ने कहा था कि वो शिवसेना और कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने ये कहते हुए सबको चौंका दिया था कि एनसीपी को बीजेपी को सरकार बनाने में मदद करनी चाहिए. हालांकि उनके इस प्रस्ताव को नहीं माना गया. दरअसल उस वक्त सरकार बनाने को लेकर एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के बीच बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई थी.

शरद पवार को दूसरा संकेत

शरद पवार ने भले ही उस वक्त अजित की बातों को सीरे से खारिज कर दिया हो, लेकिन वो उनके मन की बात पढ़ने में कामयाब नहीं रहे. इतना ही नहीं शरद पवार के घर पर एक बैठक में धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने वहीं बात दोहराई जो अजित पवार ने कहा था.

लगातार हो रही थी फडणवीस  से बात
मुंबई मिरर ने दावा किया है कि सरकार बनाने को लेकर अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच पहली बार 10 नवंबर को बातचीत हुई थी. इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच लगभग हर दिन बातचीत हो रही थी. अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच क्या खिचड़ी पक रही थी, इसकी जानकारी एनसीपी में सिर्फ धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे को ही थी. बता दें कि तटकरे अजित पवार के बेहद करीबी माने जाते हैं, जबकि मुंडे को फडणवीस का करीबी माना जाता है.
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विधायकों को अपने पाले में किया
कहा जा रहा है कि अजित पवार सोमवार से ही भरोसेमंद विधायकों को अपने पाले में लाने में जुट गए. अखबार के मुताबिक इस दौरान पवार दिल्ली और मुंबई में कम से कम 5 अहम बैठकों का हिस्सा बने. कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक शुक्रवार को नेहरू सेंटर में एक बैठक करीब 2 घंटे तक चली. लेकिन पवार इस बैठक से सिर्फ 55 मिनट में ही छोड़ कर बाहर आ गए.

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First published: November 24, 2019, 1:32 PM IST
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