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अजमेर ब्लास्ट: इंद्रेश और प्रज्ञा सिंह की भूमिका की जांच पर एनआईए सवालों के घेरे में

Bhawani Singh
Updated: March 22, 2017, 9:22 PM IST
अजमेर ब्लास्ट: इंद्रेश और प्रज्ञा सिंह की भूमिका की जांच पर एनआईए सवालों के घेरे में
image source-PTI

2007 में अजमेर दरगाह पर विस्फोट में दोषी देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को आज एनआईए कोर्ट ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है. 2007 के इस विस्फोट में तीन लोग मारे गए थे और 17 लोग घायल हुए थे.

  • Last Updated: March 22, 2017, 9:22 PM IST
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2007 में अजमेर दरगाह पर विस्फोट में दोषी देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को आज एनआईए कोर्ट ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई  है. 2007 के इस विस्फोट में तीन लोग मारे गए थे और 17 लोग घायल हुए थे. उस वक्त की तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस केस की जांच एनआईए को सौंप दी थी. लेकिन इस फैसले के बाद एनआईए साख पर सवाल खड़ा हो रहा है.

क्या है मामला

दरअसल, इस केस में सजा सुनाने से पहले 06 फरवरी को जयपुर की एनआईए कोर्ट ने जांच एजेंसी एनआईए से इंद्रेश कुमार और साध्वी प्रज्ञा सिंह समेत जिन चार लोगों की रिपोर्ट मांगी थी . एनआईए ने  चार्जशीट इन सभी लोगो के नाम दर्ज किया था. आपको बता दें,एनआईए ने 21 फरवरी को कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में इंद्रेश कुमार समेत चारों को  हुए क्लीन चिट दे दी थी. एनआईए ने यह कहते हुए आगे तफ्तीश करने से इंकार कर दिया था कि इनके खिलाफ धमाकों की साजिश से जुड़े कोई साक्ष्य नहीं है.इसलिए इन चारों के बारे में आगे जांच का इरादा नहीं है.

कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर क्या सवाल उठाया

जयपुर की एनआईए कोर्ट ने सजा का फैसला सुनाते वक्त इस रिपोर्ट पर सवाल उठाया. कोर्ट का कहना है ना तो विधिसम्मत है न ही न्यायोचित. न्यायाधीश दिनेश गुप्ता ने कहा कि इसी वजह से वे इन चारों के बारे में कोई आदेश नहीं दे पा रहे हैं. कोर्ट ने एनआईए से 28 मार्च तक इन चारों समेत दो आरोपियों रमेस गोहिल और अमित के खिलाफ फाईनल रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा. उसके बाद कोर्ट फैसला करेगा.
एनआईए ने शुरुआती जांचो में क्या कहा था

दरअसल 18 जुलाई 2011 में एनआईए की ओर से अजमेर बम धमाकों को लेकर पेश की गई. दूसरी चार्जशीट में में कहा गया था कि 31 अक्टूबर 2005 को जयपुर के गुजराती समेत के गेस्ट हाउस में एक बैठक हुई थी.बैठक में लोकेश, रामजी कलसांगरे, प्रज्ञा सिंह समेत बम धमाके से जुड़े आरोपी शामिल थे.ये गलत नाम- पते से ठहरे थे.बैठक को संघ के प्रचारक इंद्रेश कुमार.ने संबोधित किया था.क्या कहती है एनआईए की चार्जशीट रिपोर्ट

एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक इंद्रेश कुमार ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि आप किसी धार्मिक संगठन से जुड़ कर अपने मिशन को अंजाम दे सकते है. .जिससे कोई आप पर शक नहीं करेगा. चार्जशीट में उज्जैन में 2004 में सिंहस्थ कुंभ में साध्वी प्रज्ञा सिंह,असीमानंद, रामजी कलसांगरे,समेत अन्य आरोपी शामिल होने और बैठक को भी धमाकों की साजिश से जोड़ा गया.

हालांकि दोनो बैठकों के आधार पर इंद्रेश कुमार या साध्वी प्रज्ञा सिंह को आरोपी नहीं बनाया था. कहा गया कि इस बारे में एनआईए की जांच जारी है.लेकिन उसके बाद एनआईए ने आगे दायर की किसी भी चार्जशीट में इंद्रेश और साध्यी प्रज्ञा और इन बैठकों का न जिक्र किया न जांच के बारे में बताया न क्लीन चिट दी न आरोपी बनाया.एनआईए तब जागी जब फैसले से पहले एनआईए कोर्ट ने इन संग्दिधों की भूमिका के बारे में रिपोर्ट मांगी.

अब सवाल ये उठता है कि कि एनआईए ने उसके बाद दायर की चार्जशीट में इन लोगों की भूमिका को लेकर क्यों नहीं बताया. कोर्ट को इनकों आरोपी नहीं बनाने की वजह क्यों नहीं बताई. जब रिपोर्ट मांगी तब सीधे क्लीन चिट की रिपोर्ट कैसे दे दी.अब देखना है 28 मार्च को एनआईए क्या रिपोर्ट देता और क्या कोर्ट क्या फैसला लेती है.

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First published: March 22, 2017, 8:49 PM IST
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