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तमिलनाडु: रजनीकांत के बाद अलागिरी ने बढ़ाया सियासी सस्पेंस, जनवरी में लॉन्च कर सकते हैं पार्टी

एमके अलागिरी का फाइल फोटो
एमके अलागिरी का फाइल फोटो

Tamil nadu Assembly Election: रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने अलागिरी को अपनी ओर लाने का काफी प्रयास किया. खास बात यह है कि बीजेपी राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राह तैयार करने में लगी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2020, 3:54 PM IST
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(बी शिवकुमार)


चेन्नई. तमिलनाडु में अगले साल चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्य में राजनीतिक उठा पटक जारी है. इसी बीच डीएमके (DMK) के पूर्व प्रमुख एमके अलागिरी (MK Alagiri) एक बार फिर सियासी वापसी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. अलागिरी तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि (M Karunanidhi) के बड़े बेटे हैं. उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. गौरतलब है कि अभिनेता रजनीकांत (Rajinikanth) की राजनीति में एंट्री को लेकर भी राज्य की जनता कयास लगा रही है.

दूसरी यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे अलागिरी ने गुरुवार को गोपालपुरम निवास में इलाज करा रहीं अपनी मां दयालु अम्माल से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने पत्राकारों से बात की. अलागिरी ने बताया कि वह 3 जनवरी को समर्थकों के साथ विचार विमर्श करेंगे और नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने पर फैसला लेंगे. उन्होंने कहा, 'अगर मेरे समर्थक चाहते हैं कि मैं नई पार्टी लॉन्च करूं, तो मैं ऐसा करूंगा. लेकिन डीएमके का समर्थन नहीं करूंगा.' उन्होंने साफ किया, 'मुझे डीएमके की तरफ से दोबारा पार्टी जॉइन करने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है.'
यह भी पढ़ें: रजनीकांत अगले साल पार्टी बनाकर लड़ सकते हैं चुनाव, समर्थकों से पूछा- क्‍या जनवरी के लिए तैयार हैं?



रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने अलागिरी को अपनी ओर लाने का काफी प्रयास किया. खास बात यह है कि बीजेपी राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राह तैयार करने में लगी है. रजनीकांत से मुलाकात पर अलागिरी ने कहा कि उन्हें पता चला है कि अभिनेता अभी अनाथी की शूटिंग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'एक बार वो हैदराबाद से वापस लौटेंगे, तो मैं उनसे मुलाकात करूंगा.'

अलागिरी को छोटे भाई एमके स्टालिन (MK Stalin) से विवाद के चलते पार्टी से निकाल दिया गया था. निष्कासन से पहले उन्हें पार्टी का बड़ा नाम समझा जाता था. पार्टी में उनकी पकड़ का आलम यह था कि चुनावी गठबंधन से लेकर प्रचार तक पार्टी के फैसलों पर उनकी इच्छा का खासा प्रभाव होता था. पार्टी के अंदर मौजूद कई सूत्र बताते हैं कि अपने छोटे भाई के पार्टी में बढ़ते कद और पिता के मिलते समर्थन को देखकर अलागिरी का मोहभंग हो गया था.

50 साल से ज्यादा समय तक पार्टी की कमान संभालने वाले करुणानिधि के हाथ में पूरी ताकत होने के बावजूद अलागिरी को पार्टी से निकाल दिया गया था. मार्च 2014 में पार्टी के दक्षिण संगठनात्मक सचिव अलागिरी को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया. करुणानिधि ने अपने आवास पर प्रेस से बात की थी. इस दौरान यह साफ कर दिया गया था कि अलागिरी की पार्टी में कोई जगह नहीं है.
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