इस साल मौसम में दिखेगा 'ला नीना' का असर, कड़ाके की ठंड के लिए हो जाएं तैयार

इस साल कड़ाके की ठंड के लिए हो जाएं तैयार.
इस साल कड़ाके की ठंड के लिए हो जाएं तैयार.

भारतीय मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल शीत लहर चलेगी, जिसका कारण ला नीना (La Nina) का प्रभाव होगा. ला नीना के कमजोर पड़ने से पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा ठंड पड़ने की संभावना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 2:31 PM IST
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नई दिल्ली. इस बार भले ही ठंड का मौसम (Weather) थोड़ा देर से आ रहा हो लेकिन जब शुरू होगा तो सर्दी (Cold) भी काफी पड़ेगी. भारतीय मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा के मुताबिक इस साल ठंड के मौसम में ला नीना (La Nina) का प्रभाव देखने को मिलेगा, जिसके कारण ठंड का काफी ज्यादा एहसास होगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल शीत लहर चलेगी, जिसका कारण ला नीना का प्रभाव होगा. ला नीना के कमजोर पड़ने से पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा ठंड पड़ने की संभावना है.

पंतनगर विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह के मुताबिक कमजोर ला नीना की वजह से सर्दियों में इस बार कड़ाके की ठंड पड़ेगी और सर्द हवाओं के चलते ठंड का काफी ज्यादा अहसास होगा. एल नीनो और ला नीना का मौसम पर खास असर दिखाई देता है और सर्द हवाएं चलने के कारण ठंड काफी ज्यादा महसूस होती है. बता दें कि ला नीना समुद्री प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र में पानी ठंडा होने लगता है, जिसके कारण हवाओं में इसका असर साफ दिखाई देता है.

हवाओं में ठंड का एहसास होने के कारण तापमान में भी इसका असर दिखाई देता है. ये अंतर महासागरीय घटनाओं समेत दुनिया के मौसम और जलवायु को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने का कारण बन सकते हैं.इसी तरह एल नीनो में इसका विपरीत असर देखने को मिलता है. एल नीनों के चलते समुद्र का पानी गर्म हो जाता है और इसके प्रभाव से गर्म हवाएं चलती है.
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कई राज्यों में बन रहे बारिश के आसार
दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार बुधवार को देश से विदा हो गया. यह अपनी सामान्य तिथि के 13 दिन बाद वापस गया. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत हो गई है, जिसके चलते तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश के हिस्सों, कर्नाटक और केरल में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बारिश होती है. आईएमडी के मुताबिक, बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र में एक चक्रवाती दौर बना हुआ है.
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