कोरोना मरीज को प्लाज्मा देने से न घबराएं, जानिए प्लाज्मा डोनेशन पर और क्या कहते हैं एक्सपर्ट

कोरोना मरीज को प्लाज्मा देने से न घबराएं, जानिए प्लाज्मा डोनेशन पर और क्या कहते हैं एक्सपर्ट
क्या वास्तव में प्लाज्मा थेरेपी कोरोना का इलाज है?

कोरोना मरीजों को ठीक करने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भी चुनिंदा संस्थानों को प्लाज़्मा थेरेपी के ट्रायल की मंजूरी दे दी है. वहीं दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को भी कोरोना के दौरान प्लाज्मा थेरेपी दी गई थी.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (coronavirus) की चपेट में आए मरीजों को ठीक करने के लिए भारत में प्लाज्मा थेरेपी (plasma therepy) पर काम किया जा रहा है. इतना ही नहीं दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) सहित अन्य कई कोरोना के मरीजों को भी प्लाज्मा थेरेपी दी जा चुकी है. कुछ मामलों में इसके परिणाम भी सकारात्मक मिले हैं. यही वजह है कि भारत में कोरोना मरीजों के परिजन प्लाज़्मा डोनर की तलाश करते दिखाई दे रहे हैं. जबकि प्लाज्मा दान करने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं. प्लाज्मा डोनर न मिलने के पीछे प्लाज्मा दान के खतरों का अनुमान और डर बताया जा रहा है.

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यहां यह भी है कि क्या वास्तव में प्लाज्मा थेरेपी कोरोना का इलाज है?

News18hindi ने प्लाज्मा थेरेपी से जुड़े तमाम सवाल, डर और भ्रांतियों को लेकर अपोलो हॉस्पिटल में रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. राजेश चावला से बात की. पेश है प्लाज्मा थेरेपी और प्लाज्मा दान से जुड़ी तमाम ज़रूरी बातें.



सबसे पहले तो प्लाज्मा थेरेपी क्या है?
हमारे खून (blood) में चार प्रमुख चीजें होती हैं. डब्ल्यूबीसी, आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा. आजकल किसी को भी होल ब्लड (चारों सहित) नहीं चढ़ाया जाता. बल्कि इन्हें अलग-अलग करके जिसे जिस चीज की ज़रूरत हो वो चढ़ाया जाता है. प्लाज्मा, खून में मौजूद 55 फीसदी से ज्यादा हल्के पीले रंग का पदार्थ होता है, जिसमें पानी, नमक और अन्य एंजाइम्स होते हैं. ऐसे में किसी भी स्वस्थ मरीज जिसमें एंटीबॉडीज़ विकसित हो चुकी हैं, का प्लाज़्मा निकालकर दूसरे व्यक्ति को चढ़ाना ही प्लाज्मा थेरेपी है.

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क्या सभी लोग प्लाज्मा दान कर सकते हैं?

नहीं! जो लोग कोरोना होने के बाद ठीक हो चुके हैं. उनके अंदर एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी हैं. सिर्फ वे ही लोग ठीक होने के 28 दिन बाद प्लाज्मा दान कर सकते हैं.

प्लाज्मा देने वाले को क्या खतरे हो सकते हैं?

प्लाज्मा देने वाले को कोई खतरा नहीं है. बल्कि यह रक्तदान से भी ज्यादा सरल और सुरक्षित है. प्लाज्मा दान करने में डर की कोई बात नहीं है. हीमोग्लोबिन भी नहीं गिरता. प्लाज्मा दान करने के बाद सिर्फ एक-दो गिलास पानी पीकर ही वापस पहली स्थिति में आ सकते हैं.

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रक्तदान और प्लाज्मा दान में क्या अंतर है?

रक्तदान में आपके शरीर से पूरा खून लिया जाता है. जबकि प्लाज्मा में आपके खून से सिर्फ प्लाज्मा लिया जाता है और रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स वापस आपके शरीर में पहुंचाए जाते हैं. ऐसे में प्लाज्मा दान से शरीर पर कोई बहुत फर्क नहीं पड़ता.

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प्लाज्मा दान में कितना वक्त लगता है?

500 ml. प्लाज़्मा लेने में सिर्फ आधे से पौन घण्टा.

इससे पहले किसी बीमारी में प्लाज्मा का इस्तेमाल हुआ है?

हां, सार्स (SARS) और मर्स (middle east respiratory syndrome) में कुछ मरीजों को प्लाज़्मा से फायदा हुआ था. बहुत बड़ा नहीं लेकिन 20-20 मरीजों पर अध्ययन प्रकाशित हुए थे. इसी वजह से कोरोना मरीजों को भी प्लाज़्मा दिया जा रहा है.

क्या कोरोना के बाद रक्तदान की तरह प्लाज़्मा दान भी होगा?

अगर ट्रायल में सकारात्मक परिणाम आते हैं, रिसर्च स्टडीज़ सामने आती हैं तो निश्चित ही ऐसा हो सकता है. हालांकि इसमें वक्त लग सकता है.

आखिरी और महत्वपूर्ण बात, कोरोना के मरीजों में प्लाज्मा थेरेपी कितनी कारगर है?

एक बात यहां स्पष्ट करना बेहद ज़रूरी है कि कोरोना में प्लाज्मा थेरेपी को लेकर अभी तक कोई भी अध्ययन नहीं आया है, जिसमें कहा गया हो कि प्लाज्मा से फायदा होता है. न ही अभी तक देश भर में चल रहे 80 से ज्यादा ट्रायल में से किसी के परिणाम आए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इसमें एंटीबॉडीज़ होती हैं तो ये फायदा पहुंचा सकता है. कोरोना के कुछ मरीजों के ठीक होने के आधार पर ही प्लाज्मा थेरेपी को अनुमति दे दी गई है. हालांकि मोडरेट मरीज इस थेरेपी से ही नहीं वैसे भी ठीक हो रहे हैं.
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