जन-धन के खातों में अपनी जेब से पैसे डाल रहे हैं बैंककर्मी, पढ़ें-चौंकाने वाली हकीकत!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनधन योजना की तारीफ करते नहीं थकते। देश हो या विदेश वे तकरीबन हर मंच पर गर्व के साथ बताते हैं कि इस योजना के तहत साढ़े 21 करोड़ बैंक खाते खुले वो भी महज कुछ महीनों में।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनधन योजना की तारीफ करते नहीं थकते। देश हो या विदेश वे तकरीबन हर मंच पर गर्व के साथ बताते हैं कि इस योजना के तहत साढ़े 21 करोड़ बैंक खाते खुले वो भी महज कुछ महीनों में।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनधन योजना की तारीफ करते नहीं थकते। देश हो या विदेश वे तकरीबन हर मंच पर गर्व के साथ बताते हैं कि इस योजना के तहत साढ़े 21 करोड़ बैंक खाते खुले वो भी महज कुछ महीनों में।

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जनधन योजना में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जो वादे इस योजना के तहत खाते खुलवाने वालों से किए गए थे, बात जब उन्हें पूरा करने की आती है तो खाताधारकों को नियम-कायदे बताकर वापस लौटा दिया जाता है। हाल ये है कि इस योजना के तहत खाताधरकों को मिलने वाले दुर्घटना बीमा के 40 फीसदी आवेदन खारिज कर दिए गए। यही नहीं ओवरड्राफ्ट की जो सुविधा इस योजना में देने का वादा किया गया था वो भी सिर्फ 3 फीसदी लोगों के लिए मंजूर किया गया है। योजना के तहत खुले 27 फीसदी खातों में एक रुपया भी जमा नहीं हुआ है और वो बैंकों के लिए समस्या बन गए हैं।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनधन योजना की तारीफ करते नहीं थकते। देश हो या विदेश वे तकरीबन हर मंच पर गर्व के साथ बताते हैं कि इस योजना के तहत साढ़े 21 करोड़ बैंक खाते खुले वो भी महज कुछ महीनों में। यही नहीं वो इस खातों में जमा हुई 36 हजार 600 करोड़ रुपये की रकम को भी उपलब्धि बताते हैं। पीएम के दावे गलत भी नहीं हैं लेकिन कई ऐसी बातें हैं जो इस योजना का लोगों तक पूरी तरह लाभ पहुंचने के दावे पर सवाल खड़े करती हैं। सीएनबीसी आवाज के लक्ष्मण राय ने जब योजना की पड़ताल की तो जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आई।



खाली खातेः एक अप्रैल 2016 तक 21 करोड़ 51 लाख से ज्यादा बैंक खाते जनधन योजना के तहत खोले जा चुके हैं लेकिन खास बात ये है कि इनमें से 5 करोड़ 72 लाख यानी करीब 27 फीसदी खातों में एक पैसा भी जमा नहीं हुआ है। हालांकि बाकी के अकाउंट में तकरीबन 36 हजार करोड़ से ज्यादा रकम जमा हो चुकी है। अब बैंक कर्मचारियों के ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि इन खाली खातों में कम से कम एक रुपये ही जमा करवा दें। कई जगह तो कर्मचारी खुद अपनी जेब से 1-1 रुपये जमा करा रहे हैं, ताकि खाली खातों की संख्या घटाई जा सके और आंकड़े देखने में निगेटिव न लगें।


दुर्घटना बीमा योजनाः प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खाताधारकों को एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी मिलना था लेकिन जब कुछ खाताधारकों ने दुर्घटना के बाद इसका क्लेम किया तो उनका ये दावा खारिज कर दिया गया। उन्हें बताया गया कि चूंकि उन्होंने दावा करने के पिछले 45 दिन की समयावधि में अपने खाते में कोई लेनदेन नहीं किया इसलिए उनका बीमा दावा खारिज किया जाता है।





ऐसे एक दो नहीं बल्कि तकरीबन 40 फीसदी बीमा आवेदन खारिज कर दिए गए क्योंकि वो प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत मिलने वाले बीमा की शर्तों का पालन नहीं कर पाए। मसलन, पहली अप्रैल 2016 तक इस योजना के तहत सिर्फ 558 लोगों ने दुर्घटना बीमा का दावा किया। इनमें से भी 219 दावे खारिज कर दिए गए। इनमें से 165 दावे सिर्फ इसलिए खारिज हो गए कि खाताधारक ने दुर्घटना से 45 दिन पहले तक कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया था जो बीमा के लिए अहम शर्त है। यानी जिस गरीब के पास खाते में जमा करने के लिए एक रुपया भी नहीं है उसे ही दुर्घटना होने पर आर्थिक मदद नहीं मिलेगी।



ओवरड्राफ्टः जनधन योजना के तहत जो खाते खुले उसकी एक बड़ी वजह ये भी थी कि सरकार ने इन खातों पर ओवरड्राफ्ट की सुविधा का ऐलान किया हुआ था यानी खाताधारक जब चाहें तब अपने अकाउंट से पांच हजार रुपये निकाल सकते हैं भले ही उनके अकाउंट में पैसे हो या नहीं। लेकिन हकीकत ये है कि जो 21 करोड़ 51 लाख बैंक खाते खुले हैं उनमें से तीन फीसदी खाते भी ओवरड्राप्ट लायक नहीं हैं। नियम-कायदे ऐसे कि 8 अप्रैल तक 62 लाख खाते ही ओवरड्राफ्ट लायक पाए गए। जबकि सिर्फ 35 लाख खाताधारकों को ही ओवरड्राफ्ट की सुविधा मंजूर की गई, जिनमें से 19 लाख लोगों को ओवरड्राफ्ट दिया गया। गौर करने वाली बात ये है कि निजी क्षेत्र के यस बैंक ने अपने किसी भी खाताधारक को ओवरड्राफ्ट लायक नहीं पाया। जबकि आईसीआईसीआई बैंक ने 6000 और एचडीएफसी बैंक ने 17500 खाताधारकों को इसके लायक पाया।
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