लंबे अरसे बाद वायुसेना को मिलेगा 'ब्रह्मास्त्र', 10 पॉइंट्स में जानें राफेल फाइटर जेट की खूबियां

लंबे अरसे बाद वायुसेना को मिलेगा 'ब्रह्मास्त्र', 10 पॉइंट्स में जानें राफेल फाइटर जेट की खूबियां
आज भारत को मिल जाएगा राफेल.

फ्रांस से सोमवार को भारत के लिए निकले 5 राफेल (Rafale Fighter jets) आज दोपहर को अंबाला एयरबेस पर लैंड करेंगे. वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया राफेल विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल करेंगे.

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नई दिल्‍ली. बेहद शक्तिशाली मल्‍टरोल लड़ाकू विमान राफेल (Rafale) आज भारत आ रहा है. फ्रांस से सोमवार को भारत के लिए निकले 5 राफेल आज दोपहर को अंबाला एयरबेस पर लैंड करेंगे. वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया रणनीतिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अंबाला एयरबेस पर राफेल विमानों को भारतीय वायुसेना (Indian Air force) में शामिल करेंगे. इससे भारतीय वायुसेना कई गुना अधिक ताकतवर हो जाएगी. इस शक्तिशाली लड़ाकू विमान के भारत आने से पाकिस्‍तान और चीन भी हिमाकत करने से पहले सोचेंगे. इस विमान में कई ऐसी खासियतें हैं, जो इसे आसमान में दुश्‍मन के लिए घातक बनाती हैं.



राफेल विमान भारत द्वारा पिछले दो दशक से अधिक समय में लड़ाकू विमानों की पहली बड़ी खरीद है. इन विमानों के आने से भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ोत्तरी होने की संभावना है. भारत ने 23 सितंबर 2016 को फ्रांसीसी एरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था. आइये जानते हैं इसकी खासियत के बारे में...
राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, प्लेन के साथ मेटेअर मिसाइल भी है. विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम किलोग्राम है. पहले तय किया गया था कि राफेल के ट्रायल के लिए स्पाइस 2000 बम की जरूरत हो सकती है, इसलिए इसकी डिलीवरी में देरी हुई.
अंबाला एयरबेस चीन की सीमा से 200 किमी की दूरी पर है. यहीं पर, राफेल 17वीं स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज राफेल की पहली स्क्वाड्रन होगी. इसमें ताकतवर एम 88 इंजन लगा हुआ है.
राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा है बताया जा रहा है कि राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है. जबकि स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर है.
राफेल डीएच (टू-सीटर) और राफेल ईएच (सिंगल सीटर), दोनों ही ट्विन इंजन, डेल्टा-विंग, सेमी स्टील्थ कैपेबिलिटीज के साथ चौथी जनरेशन का फाइटर है. ये न सिर्फ फुर्तीला है, बल्कि इससे परमाणु हमला भी किया जा सकता है.
इस फाइटर जेट को रडार क्रॉस-सेक्शन और इन्फ्रा-रेड सिग्नेचर के साथ डिजाइन किया गया है. इसमें ग्लास कॉकपिट है. इसके साथ ही एक कम्प्यूटर सिस्टम भी है, जो पायलट को कमांड और कंट्रोल करने में मदद करता है.
राफेल में एक एडवांस्ड एवियोनिक्स सूट भी है. इसमें लगा रडार, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और सेल्फ प्रोटेक्शन इक्विपमेंट की लागत पूरे विमान की कुल कीमत का 30% है.
इस जेट में आरबीई 2 एए एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार लगा है, जो लो-ऑब्जर्वेशन टारगेट को पहचानने में मदद करता है. राफेल का रडार सिस्टम 100 किमी के दायरे में भी टारगेट को डिटेक्ट कर लेता है.
राफेल सिंथेटिक अपरचर रडार (SAR) भी है, जो आसानी से जाम नहीं हो सकता, जबकि इसमें लगा स्पेक्ट्रा लंबी दूरी के टारगेट को भी पहचान सकता है. किसी भी खतरे की आशंका की स्थिति में इसमें लगा रडार वॉर्निंग रिसीवर, लेजर वॉर्निंग और मिसाइल एप्रोच वॉर्निंग अलर्ट हो जाता है और रडार को जाम करने से बचाता है.
राफेल सिंथेटिक अपरचर रडार (SAR) भी है, जो आसानी से जाम नहीं हो सकता, जबकि इसमें लगा स्पेक्ट्रा लंबी दूरी के टारगेट को भी पहचान सकता है. किसी भी खतरे की आशंका की स्थिति में इसमें लगा रडार वॉर्निंग रिसीवर, लेजर वॉर्निंग और मिसाइल एप्रोच वॉर्निंग अलर्ट हो जाता है और रडार को जाम करने से बचाता है.
राफेल फाइटर जेट को माली अफगानिस्तान, इराक और लीबिया में इस्तेमाल किया जा चुका है. राफेल फाइटर जेट में भारतीय वायुसेना के हिसाब से फेरबदल किए गए हैं यानी इंडियन एयरफोर्स के हिसाब से ये बिल्कुल सटीक है.
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