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क्‍या काम करती है तबलीगी जमात, जुड़े हैं 15-25 करोड़ मुस्लिम, चौंका देगा ये वीडियो

भाषा
Updated: April 1, 2020, 9:31 PM IST
क्‍या काम करती है तबलीगी जमात, जुड़े हैं 15-25 करोड़ मुस्लिम, चौंका देगा ये वीडियो
निजामुद्दीन में हुआ था तब्‍लीगी जमात का कार्यक्रम.

तबलीगी जमात (Tablighi jamaat) सदस्य केवल मुसलमानों के बीच काम करते हैं और उन्हें पैगंबर मोहम्मद द्वारा अपनाए गए जीवन के तरीके बताए जाते हैं.

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नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus) से हुई कुल 39 में से एक चौथाई मौतों को नई दिल्ली (Delhi) के निजामुद्दीन (Nizamuddin) में इस्लामी प्रचारकों के आयोजन से जोड़ा रहा है, जिसके बाद तबलीगी जमात (Tablighi jamaat) के आयोजक विभिन्न दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन को लेकर अधिकारियों के निशाने पर आ गए हैं. मरकज से देश के अलग-अलग हिस्‍सों में लौटे अधिकांश लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है. साथ कुछ की मौत भी हुई है.

इस बीच दिल्‍ली पुलिस (Delhi police) ने निजामुद्दीन की मरकज (Nizamuddin Markaz) इमारत का वीडियो भी जारी किया है. 26 मार्च के इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे के बीच बड़ी संख्‍या में जमाती वहां किस तरह ठहरे हुए थे. ये वीडियो चौंकाने वाला है.

 



तबलीगी जमात क्या है?
तबलीगी जमात की शुरुआत लगभग 100 साल पहले देवबंदी इस्लामी विद्वान मौलाना मोहम्मद इलयास कांधलवी ने एक धार्मिक सुधार आंदोलन के रूप में की थी. तब्लीगी जमात का काम विशेषकर इस्लाम के मानने वालों को धार्मिक उपदेश देना होता है.

इस्लाम के 5 बुनियादी सिद्धांंत का करते हैं प्रचार
पूरी तरह से गैर-राजनीतिक इस जमात का मकसद पैगंबर मोहम्मद के बताये गए इस्लाम के पांच बुनियादी अरकान (सिद्धातों) कलमा, नमाज, इल्म-ओ-जिक्र (ज्ञान), इकराम-ए-मुस्लिम (मुसलमानों का सम्मान), इखलास-एन-नीयत (नीयत का सही होना) और तफरीग-ए-वक्त (दावत व तब्लीग के लिये समय निकालना) का प्रचार करना होता है. दुनियाभर में एक प्रभावशाली आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में मशहूर जमात का काम अब पाकिस्तान और बांग्लादेश से होने वाली गुटबाजी शिकार हो गया है.

कैसे काम करती हैं तबलीगी जमातें?
दक्षिण एशिया में मौटे तौर पर तबलीगी जमातों से 15 से 25 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं. जमात सदस्य केवल मुसलमानों के बीच काम करते हैं और उन्हें पैगंबर मोहम्मद द्वारा अपनाए गए जीवन के तरीके सिखाते हैं.

तब्लीग का काम करते समय जमात के सदस्यों को छोटे-छोटे समूहों में बांट दिया जाता है. हर समूह का एक मुखिया बनाया जाता है, जिसे अमीर कहते हैं. ये समूह मस्जिद से काम करते हैं. चुनिंदा जगहों पर मुसलमानों की बीच जाकर उन्हें इस्लाम के बारे में बताते हैं.



कोविड-19 और तबलीगी जमात
मार्च की शुरुआत में निजामुद्दीन इलाके में स्थित बंगले वाली मस्जिद में जमातियों का इज्तिमा (कार्यक्रम) हुआ. यहीं पर जमात का मरकज यानी केन्द्र स्थित है. बताया जा रहा है कि इस इज्तिमे में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, नेपाल, म्यांमा, बांग्लादेश, श्रीलंका और किर्गिस्तान से आए 800 के अधिक विदेशी नागरिकों ने शिरकत की.

सरकार के अनुसार एक जनवरी के बाद से 70 देशों से 2 हजार से अधिक विदेशी जमात की गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिये भारत आ चुके हैं. इनमें से एक हजार से अधिक विदेशी लॉकडाउन के चलते निजामुद्दीन में ही फंस गए. इनमें से कई के पास छह महीने का पर्यटन वीजा है.

इंडोनेशियाई नागरिक की मौत से सामने आया मामला
विवाद तब खड़ा हुआ जब इज्तिमे में शिरकत कर तेलंगाना जा रहे एक इंडोनेशियाई नागरिक की मौत हो गई. वह 18 मार्च को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया . गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को प्रचारकों को लेकर 21 मार्च को सतर्क किया.

1,500 लोग मरकज से गए
जमात का दावा है कि निजामुद्दीन मरकज में लगभग 2,500 सदस्य थे. 22 मार्च को अचानक जनता कर्फ्यू की घोषणा हुई, इसके बाद दिल्ली सरकार ने भी ऐसा ही कदम उठाया. आखिरकार प्रधानमंत्री ने 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया, जिसके चलते बड़ी संख्या में जमात के सदस्य मरकज में ही फंसे रह गए जबकि 1,500 लोग वहां से चले गए.

तबलीगी जमात के इज्तिमे में शिरकत करने वालों में फिलिपीन के नागरिक समेत अबतक 10 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जा चुके हैं, जबकि मरकज में ठहरे 285 लोगों को संदिग्ध रोगी मानकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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First published: April 1, 2020, 8:23 PM IST
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