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ममता की टेंशन बढाएंगे ओवैसी, बंगाल चुनाव में जीत के लिए बिहार के विधायक उतारे मैदान में

पश्चिम बंगाल में 2021 की गर्मियों की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे और ओवैसी की नजर राज्य के मुस्लिम मतदाताओं पर है.(फाइल फोटो)
पश्चिम बंगाल में 2021 की गर्मियों की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे और ओवैसी की नजर राज्य के मुस्लिम मतदाताओं पर है.(फाइल फोटो)

West Bengal Assembly Election 2021: AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने रविवार को पार्टी के 8 नेताओं को बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 31, 2021, 8:38 PM IST
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नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 (West Bengal Assembly Election 2021) के लिए ऑल इंडिया मजलिसे ए इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने पार्टी के 8 नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. AIMIM की ओर से जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, उनमें तेलंगाना के नामपल्ली से विधायक जफर हुसैन मेराज और विधान परिषद सदस्य मिर्जा रियाज उल हसन एफेंदी को कोलकाता और दक्षिण बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है. मुर्शिदाबाद, बीरभूम और नाडिया के लिए बिहार के अमौर से विधायक अख्तर उल ईमान, बिहार के AIMIM यूथ प्रेसिडेंट आदिल हुसैन को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है. वहीं उत्तर, दक्षिण दिनाजपुर, कूच बिहार और अलीपुरद्वार के लिए बिहार के जोकीहाट से विधायक शाहनवाज, बिहार के कोचाधमान से पार्टी विधायक हाजी मोहम्मद इजहर अस्फी को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. मालदा क्षेत्र के लिए बिहार के बैंसी से एआईएमआईएम विधायक सैयद रूकनुद्दीन अहमद और बिहार के बहादुरगंज से विधायक MLA अंजार नईमी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है.

ओवैसी की पार्टी की ओर से नियुक्त विधायकों को देखें, तो ज्यादातर उनकी पार्टी के हालिया चुने गए विधायक और विधानसभा सदस्य हैं. पार्टी ने 2020 में संपन्न बिहार विधानसभा में पहली बार शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत हासिल की और हिंदी पट्टी के राज्य में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई. बिहार में मिली सफलता के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश जैसे सियासी रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. पश्चिम बंगाल में 2021 की गर्मियों की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे और ओवैसी की नजर राज्य के मुस्लिम मतदाताओं पर है, जहां उनका वोट शेयर 30 फीसदी के करीब है.

2011 के विधानसभा चुनाव में लेफ्ट की सत्ता को धूल-धूसरित करते हुए सत्ता में विराजमान हुई ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी ने मोर्चा खोल रखा है. ममता पर 2016 के विधानसभा चुनाव परिणाम को दोहराने की चुनौती है, लेकिन उनकी पार्टी के बड़े नेताओं ने पाला बदलकर बीजेपी का हाथ थामना शुरू कर दिया है.

मुकुल रॉय, सुवेंदु अधिकारी के बाद तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आ रहे नेताओं के क्रम में बीते शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के 5 नेताओं ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर बीजेपी का दामन थामा.
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