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तीन तलाक में सजा के प्रावधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

News18Hindi
Updated: October 21, 2019, 9:02 PM IST
तीन तलाक में सजा के प्रावधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
ट्रिपल तलाक (Triple Talaq) में सजा के प्रावधान के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया है

ट्रिपल तलाक (Triple Talaq) में सजा के प्रावधान के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया है

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  • Last Updated: October 21, 2019, 9:02 PM IST
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नई दिल्ली. तीन तलाक (Triple Talaq) में सजा के प्रावधान के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंचा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने याचिका दाखिल कर तीन तलाक में सजा के प्रावधान को चुनौती दी है.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि तलाक-ए-बिद्दत को अपराध बनाना असंवैधानिक है. इससे पहले अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए तीन तलाक कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

क्या है तलाक-ए-बिद्दत
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 तलाक-ए-बिद्दत या तलाक के ऐसे ही किसी अन्य रूप, जिसमें मुस्लिम पति तत्काल तलाक देता है, को निरर्थक और अवैध करार देता है. यह कानून बोलकर, लिखकर, एसएमएस अथवा वाट्सऐप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एक बार में तीन

तलाक को अवैध करार देता है. इसमें कहा गया कि ऐसा करने पर दोषी पति को तीन साल की कैद हो सकती है या उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

याचिका में कही गई ये बात
एआईएमपीएलबी और कमाल फारुकी की तरफ से दायर याचिका में इस आधार पर कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है कि यह मनमाना है और संविधान के अनुच्छेद 14,15,20 और 21 को प्रभावित करता है तथा हनफी :मत के: मुसलमानों पर लागू होने वाली मुस्लिम पर्सनल लॉ की अनावश्यक/गलत व्याख्या करता है. याचिका में कहा गया कि यह कानून मुसलमानों की जिंदगी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गलत प्रभाव डाल रहा है.
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आपको बता दें कि तीन तलाक को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद से ये गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में शामिल हो गया है. ऐसे में आरोपी को सिर्फ मजिस्ट्रेट ही जमानत दे सकता है. इतना ही नहीं पीड़ित महिला के ब्लड रिलेटिव्स भी तीन तलाक के मामले में एफआईआर दर्ज करा सकेंगे.

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First published: October 21, 2019, 5:19 PM IST
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