भारत-चीन सीमा विवाद : सैनिकों की शहादत के मामले पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष

भारत-चीन सीमा विवाद : सैनिकों की शहादत के मामले पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष
सर्वदलीय बैठक में सोनिया गांधी सरकार से तीखे सवाल पूछ सकती हैं.

ये बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बुलाई है. इसमें करीब 17 राजनीतिक पार्टियों के नेता शामिल हो सकते हैं. बैठक में सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) गलवान घाटी में 20 सैनिकों की शहादत पर सरकार से तथ्यपरक जानकारी मांग सकती हैं.

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नई दिल्ली. चीन (China) के साथ सीमा विवाद (Border Dispute) को लेकर होने वाली सर्वदलीय बैठक (All Party Meeting) में सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है. ये बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलाई है. इसमें करीब 17 राजनीतिक पार्टियों के नेता शामिल हो सकते हैं. इंडिया टुडे पर प्रकाशित एक खबर के मुताबिक सोनिया गांधी गलवान घाटी में 20 सैनिकों की शहादत पर सरकार से तथ्यपरक जानकारी मांग सकती हैं. इससे पहले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव इस बैठक में आमंत्रण न दिए जाने की बात कह चुके हैं. उन्होंने भी सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं.

चीन को लेकर ठोस रणनीति पर हो सकती है बात
माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार से चीन को लेकर एक ठोस रणनीति बनाने की बात कही जा सकती है. दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी भी सरकार को घेर सकती है. उसे भी इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया है. पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि क्या हमारी राय केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण नहीं है? लेकिन हम ये जानना चाहते हैं कि पीएम मोदी इस मसले पर क्या कहेंगे?

दरअसल इस बैठक में राजनीतिक दलों को आमंत्रित करने के लिए सरकार ने एक आधार तैयार किया था. इनमें वो पार्टियां शामिल हैं जिनके पास कम से 5 लोकसभा सीटें हों. इसके अलावा उत्तर पूर्व के राजनीतिक दलों के अलावा कैबिनेट में शामिल दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है.
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राहुल गांधी ने भी पूछे हैं सवाल
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने गलवान घाटी में सैनिकों की शहादत पर सरकार से सवाल पूछे हैं. उन्होंने कहा है कि अगर हमारे सैनिकों पर हमला हो रहा था उन्होंने गोली क्यों नहीं चलाई. बाद में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि अगर मैं वहां मौजूद होता तो तुरंत शूट का ऑर्डर दे देता.

विदेश मंत्री ने दी जानकारी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर इस जवाब भी दिया है. उन्होंने लिखा- 'बॉर्डर पर ड्यूटी करने वाले सभी सैनिक अपने साथ हथियार रखते हैं. विशेष तौर पर तब जब वो अपनी पोस्ट छोड़ रहे हों. 15 जून के दिन गलवान घाटी में भी सैनिकों के पास हथियार थे. लेकिन भारतीय सैनिकों ने 1996 और 2005 में चीन के साथ हुए समझौतों की वजह से गोलियां नहीं चलाईं.' हालांकि विदेश मंत्री के जवाब को कई एक्सपर्ट्स ने पर्याप्त नहीं माना है.

 
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