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जम्मू-कश्मीर में RTI कानून के सभी प्रावधान लागू होंगे: जितेन्द्र सिंह

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Updated: January 15, 2020, 5:22 AM IST
जम्मू-कश्मीर में RTI कानून के सभी प्रावधान लागू होंगे: जितेन्द्र सिंह
केन्द्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह की फाइल फोटो

जितेन्द्र सिंह (Jitendra Singh) ने कहा कि केन्द्र शासित प्रशासन के तहत जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में दिए गए आरटीआई आवेदन (RTI Application) जल्द ही केन्द्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission) के अधिकार क्षेत्र में आ जाएंगे.

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  • Last Updated: January 15, 2020, 5:22 AM IST
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नई दिल्ली. केन्द्रीय कार्मिक राज्य मंत्री (Union Minister of State for Personnel) जितेन्द्र सिंह (Jitendra Singh) ने मंगलवार को कहा कि नवगठित केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के सभी प्रावधान पूरी तरह लागू होंगे.

उन्होंने कहा कि केन्द्र शासित प्रशासन के तहत जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में दिए गए आरटीआई आवेदन (RTI Application) जल्द ही केन्द्रीय सूचना आयोग के अधिकार क्षेत्र में आ जाएंगे.

'जल्द जारी होगी अधिसूचना, अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में भी होगा ऐसा'
गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मंत्री ने कहा, ‘‘इस संबंध में जल्दी ही एक अधिसूचना जारी की जाएगी और अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों (Union Territories) में भी ऐसा ही होगा.’’

जम्मू-कश्मीर में आरटीआई कानून (RTI Act) लागू करने में जटिलता के संबंध में मीडिया में आयी कुछ खबरों को खारिज करते हुए सिंह ने कहा कि आरटीआई कानून के सभी प्रावधान इस नवगठित केन्द्र शासित प्रदेश में लागू होंगे.

आर्टिकल 370 के खत्म होने से जम्मू-कश्मीर में बदल गई हैं ये चीजें-
>>जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी.>>जम्मू-कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले, तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी.
>>अगर कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती थी, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी.
>>आर्टिकल 370 के कारण कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती थी.
>>जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं था. यहां भारत की सर्वोच्च अदालत के आदेश मान्य नहीं होते थे.
>>जम्मू-कश्मीर का झंडा अलग होता था.
>>जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते थे.
>>कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता था.
>>आर्टिकल 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (RTI) लागू नहीं होता था.
>>जम्मू-कश्मीर में शिक्षा का अधिकार (RTE) लागू नहीं होता था.
>>जम्मू-कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू था.
>>जम्मू-कश्मीर में पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं था.
>>जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल होता था, जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल होता था.
>>भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में बहुत ही सीमित दायरे में कानून बना सकती थी.
>>जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले चपरासी को आज भी ढाई हजार रूपये ही बतौर वेतन मिलते थे.

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First published: January 15, 2020, 5:22 AM IST
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