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उन 4 महिलाओं से बातचीत, जिन्होंने शृंगार गौरी केस में याचिका दाखिल की

महिलाओं की दोस्ती मंदिरों में दर्शन-किर्तन करने के दौरान हुई.

महिलाओं की दोस्ती मंदिरों में दर्शन-किर्तन करने के दौरान हुई.

17 अगस्त 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दायर इस वाद में 5 महिलाओं ने मांग की है कि उन्हें मंदिर में प्रतिदिन दर्शन पूजा की अनुमति मिले. इसमें 4 महिलाएं वाराणसी और एक दिल्ली की हैं.

काशी विश्वनाथ मंदिर के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थित मां शृंगार गौरी के दर्शन के लिए 5 महिलाओं ने वाद दायर किया था. 17 अगस्त 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दायर इस वाद में महिलाओं ने मांग की है कि उन्हें मंदिर में प्रतिदिन दर्शन पूजा की अनुमति मिले. इसके बाद कोर्ट ने मामले में कमीशन गठित कर दिया था. जिसके बाद तीन दिन तक कमीशन ने वहां सर्वे किया और मामला कोर्ट में है.

न्यूज 18 हिंदी ने इस मामले में याचिका दाखिल करने वाली 5 महिलाओं में से 4 महिलाओं से बात की. 5वीं महिला रेखा सिंह दिल्ली में रहती हैं, उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन नहीं हो पाया. आइए जानते हैं याचिका दाखिल करने वाली महिलाओं ने क्या कहा…

मंजू व्यास
मंजू व्यास काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ही राम घाट इलाके में रहती हैं. उनका दावा है कि वह एक समाजसेविका हैं. कोविड काल में दो बार के लॉकडाउन में वह 88 घाटों पर राशन बांट चुकी हैं. वैक्सीनेशन अभियान में भी वह ऐसी महिलाएं जिनके पास स्मार्टफोन नहीं था और ऑनलाइन बुकिंग नहीं करा पा रही थीं. उन्हें वैक्सीन लगे, इसकी व्यवस्था करती रहीं. वह कहती हैं, “मैं लखनऊ की बेटी हूं. शादी के बाद बनारस की बेटी हो गईं. यहां मेरा ससुराल है. मैं बीए पास हूं. मेरे पति की ज्ञानवापी के पास ही बनारसी साड़ी की दुकान थी. लेकिन कॉरिडोर में टूट गई. मेरी एक बेटी है, जो 11वीं में पढ़ती है.”

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उनका कहना है, “हमारी दादी शृंगार गौरी मंदिर के बारे में बताती थीं. वह वहां पर पूजा करती थीं. पूरा मंदिर खुला रहता था. विधिवत पूजा होती थी. मुझे लगा कि हम लोग तो साल में एक बार ही दर्शन कर पाते हैं और वह भी चौखट के. दर्शन के लिए एक घंटे मंदिर खुलता है. उसमें भी आधी महिलाओं को दर्शन मिलता है और आधी को नहीं. इसके बाद हम 4 महिलाएं जो मंदिर में अक्सर मिलते थे, ने योजना बनाई कि इसके लिए कुछ किया जाए.”

उनका कहना है कि ऐसा मामला होता है तो बहुत से लोग हाथ नहीं डालते हैं. लोग डरते हैं. पीछे हटते हैं. लेकिन हम सभी चार महिलाओं ने निर्णय लिया कि हम पीछे नहीं हटेंगे. इसके बाद हम लोगों ने वकील हरिशंकर जैन और विष्णु जैन से बात की. इसके बाद हम लोगों ने याचिका दाखिल की. हमें विश्वास है कि न्यायालय से जीत मिलेगी.

रेखा पाठक
बनारस के हनुमान घाट की रहने वाली रेखा पाठक कहती हैं, “हम चारों लोग अक्सर मिलते रहते हैं. संकटा जी, दुर्गा जी और दूसरे मंदिरों में जहां सत्संग होता है हम लोग जाते रहते हैं. इसी दौरान हम लोगों के मन में एक बार विचार आया कि क्यों न शृंगार गौरी मंदिर का भी प्रतिदिन दर्शन हो. इसके लिए हम लोग कुछ लोगों से मिले. इसके बाद 17 अगस्त 2021 को याचिका दाखिल की और सोचा कि देखें भाग्य कहां तक ले जाता है. हम लोगों को नहीं मालूम था कि कोर्ट की कार्रवाई इतनी तेजी से होगी.”

वह कहती हैं, “मैंने भैरोनाथ स्थित बल्लभ इंटर कॉलेज से इंटर किया है. ग्रेजुएशन सेकेंड ईयर में थी तो शादी हो गई. इसके बाद बच्चे हो गए तो आगे की पढ़ाई नहीं कर पाई. मेरे पति मैकेनिकल इंजीनियर थे, लेकिन फिलहाल वह जॉब छोड़कर मां-पिता की सेवा के लिए आ गए हैं. पहले वह देहरादून में जॉब करते थे. हमारे दादा ससुर स्वतंत्रता सेनानी थे. वहीं, पिता लाटभैरव मंदिर के महंत रह चुके हैं. वह आदिरामलीला लाटभैरव के व्यास भी थे. मेरे भाई लोग रामलीला में स्वरूप भी बनते थे. मैं बनारस जिले में ही स्थिति हीरामनपुर गांव में 18 साल रहीं. बाद में बच्चों को पढ़ाने के लिए हनुमान घाट आकर रहने लगी..” उनके दो बेटे हैं. बड़ा बेटा बीसीए और छोटे बेटे ने बीकॉम किया है. दोनों फिलहाल आगे की तैयारी कर रहे हैं. अभी कोई जॉब नहीं करते हैं.

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वह कहती हैं, “इस केस में बहुत से लोग राजनीति भी देख रहे हैं. लेकिन, मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं है. मुझे आस्था से मतलब है. हमको भगवान को मुक्त कराना है. मां शृंगार गौरी को मुक्त कराना है. चौखट की पूजा कहीं नहीं होती है. लोग विग्रह की पूजा करते हैं. मंदिर खुलेगा तो सबके दर्शन हो जाएंगे. गए थे मैया को मुक्त कराने और मिल गए बाबा.”

लक्ष्मी देवी
लक्ष्मी देवी भी याचिकाकर्ताओं में से एक हैं. वह बनारस में सूरजकुंड इलाके में रहती हैं. उनका कहना है, “हम लोग साल में एक बार चैत की नवरात्रि की चतुर्थी को दर्शन के लिए जाते थे. लेकिन, वहां दर्शन कुछ समय के लिए ही मिलता था. सभी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन पूजा होता है और यहां पर साल में एक बार वह भी कुछ घंटे के लिए. इसे देखकर हम लोगों ने सोचा कि क्यों न ऐसा प्रयास किया जाए जिससे मंदिर के दर्शन प्रतिदिन हो सकें. इसके बाद हम चार महिलाएं और दिल्ली की एक राखी सिंह ने वकील विष्णु जैन से मिलकर याचिका दाखिल की.”

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लक्ष्मी देवी का जन्म मुंबई में हुआ. शादी के बाद वह बनारस आ गईं. वह कहती हैं, “हम चारों महिलाएं दर्शन पूजा के दौरान ही मिलते थे. इसी दौरान हम लोगों की दोस्ती हो गई. इसके बाद हम लोगों ने आपस में विचार करके याचिका दाखिल की. उनके पति डॉक्टर सोहन लाल आर्य इसी मामले से जुड़े हैं. उनके दो बच्चे हैं. उनका कहना है कि हम लोग न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं. हम लोग खुश हैं कि सर्वे अच्छी तरह से हुआ है. अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं.”

सीता साहू
मूलरूप से बनारस के चेतगंज मोहल्ले में रहने वाली सीता साहू भी इस मामले में एक याचिकाकर्ता हैं. उनका कहना है, हम लोग सत्संग में मिलते रहते थे. हम लोगों को साल में एक बार वो भी एक घंटे के लिए शृंगार गौरी के चौखट का दर्शन करने को मिलता है. इसमें भी कुछ लोग दर्शन कर पाते थे, कुछ लोग नहीं. धक्का-मुक्की होती थी. बस खानापूर्ति होती थी. यह बात हम लोगों को बुरी लगती थी. हम लोग ये बात करते थे कि सभी मंदिरों में प्रतिदिन पूजा करने को मिलती है तो फिर यहां क्यों नहीं मिलती है. इससे हम लोग बहुत दुखी होते थे. श्रृंगार गौरी के जितने गौरी-गणेश हैं, कार्तिकेय जी हैं, महादेव जी हैं, सभी दीवार के अंदर हैं और हम लोग चौखट पर ही दर्शन करके चले आते हैं. ये हम लोग को बर्दाश्त नहीं हुआ तो हम लोगों ने वकील हरिशंकर जैन और विष्णु जैन से मुलाकात कर ये बात रखी कि हम लोग प्रतिदिन विधिवत श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजा करना चाहते हैं. इसके बाद साल 2021 में हम लोगों ने ये याचिका दाखिल की.”

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सीता साहू ने कहा कि हमें लोगों का सपोर्ट मिल रहा है. हम लोग धर्म और आस्था की बात कर रहे हैं. लोगों का साथ पाकर अच्छा लगता है. हम लोगों ने न्यायालय की शरण ली है. उम्मीद है कि न्यायालय से न्याय मिलेगा. सीता साहू के पति गोपाल साहू परचून की दुकान चलाते हैं. हालांकि, उन्होंने पति और परिवार पर ज्यादा बात करने से सीधे इनकार कर दिया.

Tags: Gyanvapi Masjid Controversy, Gyanvapi Mosque, Kashi Vishwanath, News18 Hindi Originals

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