रूस की कोरोना वैक्सीन को भारत में मंजूरी की सिफारिश, जानें ‘स्पूतनिक वी’ के बारे में सबकुछ

रूसी वैक्सीन Sputnik V(फाइल फोटो)

रूसी वैक्सीन Sputnik V(फाइल फोटो)

Russia sputnik V Vaccine: भारत का औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) इस सिफारिश पर अंतिम निर्णय लेगा. यदि इस टीके को मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत में उपलब्ध तीसरा कोविड-19 रोधी टीका होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 6:01 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की एक विशेषज्ञ समिति ने देश में कुछ शर्तों के साथ रूस के कोविड रोधी टीके ‘स्पूतनिक वी’ के आपात इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने ‘स्पूतनिक वी’ के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दिए जाने के डॉ. रेड्डीज लैबोरैटरीज के आवेदन पर सोमवार को संज्ञान लिया. भारत का औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) इस सिफारिश पर अंतिम निर्णय लेगा. यदि इस टीके को मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत में उपलब्ध तीसरा कोविड-19 रोधी टीका होगा. सूत्रों ने कहा कि देश में आपात इस्तेमाल के लिए इस टीके का रूस से आयात किया जाएगा. बता दें कि वैश्विक स्तर पर रूस पहला देश था, जिसने सबसे पहले कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने का दावा किया था.

पिछले साल अगस्त में रूस ने इस वैक्सीन को स्पुतनिक-वी नाम देकर 1950 के दशक के स्पेस वार को जिंदा कर दिया. हालांकि रूस द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद ही इस वैक्सीन पर विवाद हो गया क्योंकि वैक्सीन को तीसरे चरण के ट्रायल से पहले ही लॉन्च कर दिया गया था. इस वैक्सीन के विकास के लिए रूस ने ‘रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड’ (आरडीआईएफ) से पैसा दिया था. स्पूतनिक वी’ के तीसरे चरण के परीक्षण के अंतरिम विश्लेषण में इसके 91.6 प्रतिशत प्रभावी होने की बात सामने आई जिसमें रूस के 19,866 स्वयंसेवियों पर किए गए परीक्षण का डेटा शामिल किया गया.

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स्पुतनिक-वी को जुकाम जैसी बीमार के लिए जिम्मेदार वायरस का प्रयोग करते हुए मानव शरीर में कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन का एक छोटा अंश विकसित करती है, जिससे कि शरीर में इम्युन रेस्पांस पैदा करने में मदद मिलती है. ये वैक्सीन भी उसी तरह काम करती है, जैसे कि ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन काम करती है.
ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन और स्पुतनिक-वी वैक्सीन में सिर्फ एक अंतर ये है कि रूसी वैक्सीन की दो अलग-अलग खुराकों में अलग-अलग वेक्टर्स का इस्तेमाल किया गया है, ये दो खुराकें मरीज को 21 दिनों के अंतर पर दी जाती हैं. इससे कोरोना वायरस से लड़ने में इम्युन रेस्पांस को मजबूती मिलती है. इससे भी अहम बात ये है कि रूसी वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री के तापमान पर स्टोर किया जा सकता है, जोकि भारतीय मौसम के बेहद अनुकूल है.

स्पुतनिक-वी को मंजूरी मिलने के बाद भारत को टीकाकरण अभियान को गति के साथ मजबूती भी मिलेगी. भारत इस समय कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहा है. महाराष्ट्र में वायरस संक्रमण ने आम जिंदगी को पटरी से उतार दिया है. इससे पहले भारत बायोटेक की ‘कोवैक्सीन’ और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रोजनेका के ‘कोविशील्ड’ टीके को पहले ही आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है.





डॉ. रेड्डीज ने पिछले साल सितंबर में इस टीके के चिकित्सकीय परीक्षण और भारत में इसके वितरण अधिकार के लिए ‘रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड’ (आरडीआईएफ) के साथ भागीदारी शुरू की थी.
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