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इंडियन मुजाहिदीन: दूध की केन, टिफिन और प्रेशर कुकर वाला आतंकी संगठन

इंडियन मुजाहिदीन: दूध की केन, टिफिन और प्रेशर कुकर वाला आतंकी संगठन

इंडियन मुजाहिदीन

इंडियन मुजाहिदीन

इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) ने साल 2007 में मीडिया के जरिए भारत में अपनी उपस्थिति का ऐलान किया था. 'इंडियन मुजाहिदीन' खुद को पहले भारतीय इस्लामिक आतंकी संगठन के रूप में पेश करता है. आईएम ने अपने कैडर के तौर पर विदेशी रंगरूटों के बजाए हमेशा स्थानीय मुस्लिम आबादी को तरजीह दी.

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    गणतंत्र दिवस से ठीक पहले दिल्ली पुलिस ने आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य अब्दुल सुब्हान कुरैशी उर्फ तौकीर को धर दबोचा है. तौकीर को फैंटम या भारत के 'लादेन' के नाम से भी जाना जाता है. तौकीर साल 2008 में गुजरात और दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में संदिग्ध है. सुरक्षा एजेंसियां काफी वक़्त से उसकी ताक में थीं.

    इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) ने साल 2007 में मीडिया के जरिए भारत में अपनी उपस्थिति का ऐलान किया था. 'इंडियन मुजाहिदीन' खुद को पहले भारतीय इस्लामिक आतंकी संगठन के रूप में पेश करता है. आईएम ने अपने कैडर के तौर पर विदेशी रंगरूटों के बजाए हमेशा स्थानीय मुस्लिम आबादी को तरजीह दी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, आईएम उन कई आतंकी संगठनों में एक है, जिनकी स्थापना सिमी के सदस्यों ने की है. आईएम के ज्यादातर आतंकी पहले छोटे स्तर के कार्यकर्ता के रूप में सिमी में भर्ती हुए थे. सरकार ने जून 2010 में आईएम को आतंकी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया था.

    कैसे शुरू हुआ इंडियन मुजाहिदीन
    आईएम का जन्म साल 2000 में कर्नाटक के भटकल कस्बे में हुआ था. शुरुआत में इसका नाम अरबी से लिया गया शब्द उसाबा (Usaba) था, जिसका मतलब जनसमूह होता है. इसमें कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के लोग शामिल थे जिसका मुख्य लक्ष्य इस्लाम के सिपाही बनकर भारत के खिलाफ 'पवित्र जंग' शुरू करना था. बताया जाता है कि सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) से जुड़े लोगों ने ही आईएम को बनाया और फंडिंग देनी शुरू की थी.

    यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले प्रोग्रामिंग इंजीनियर मोहम्मद सादिक शेख ने उसाबा में आरिफ बदरुद्दीन शेख और डॉक्टर शाहनवाज़ को भी शामिल कर लिया. इन दोनों को बाद में ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेज दिया गया. इसी दौरान संगठन में रियाज़ भटकल और उसके भाई इकबाल भटकल की एंट्री हुई. आईएम के ही एक और संदिग्ध अदिक शेख को भी 2002 में पाकिस्तान ट्रेनिंग के लिए भेजा गया.



    एक और जांच में पता चला है कि आईएम अपने शुरुआती दिनों में बांग्लादेशी आतंकी संगठन हरकत-उल-ए-इस्लामी की मदद से आसिफ रज़ा कमांडो फ़ोर्स (ARCF) नाम से शुरू हुआ था जो बाद में आईएम में तब्दील हो गया.

    पहला हमला
    जांच एजेंसियों के मुताबिक आईएम ने कथित तौर पर अपना पहला हमला साल 2002 में कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर किया. इस हमले का मास्टरमाइंड आमिर रज़ा खान था. बताया जाता है कि उसने ये हमला 2002 गुजरात दंगों में मारे गए भाई आसिफ रज़ा खान की मौत का बदला लेने के लिए किया था. इस हमले के बाद उसाबा ख़त्म हो गया और आमिर रज़ा खान, इकबाल भटकल और रियाज़ भटकल ने मिलकर आईएम की शुरुआत की.



    साल 2003 से 2005 के बीच आईएम सबसे ज्यादा एक्टिव रहा और उसने IED के इस्तेमाल से कई जगह हमले किए. कथित तौर पर आईएम के ही संदिग्ध शाहनवाज़ और आरिफ ने 23 फरवरी 2005 को वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर दो धमाके किए थे. साल 2008 में दिल्ली के बटला हाउस में पुलिस ने आतिफ अमीन का एनकाउंटर किया. दिल्ली पुलिस का आरोप था कि आतिफ ने ही जुलाई 2005 में श्रमजीवी एक्सप्रेस में बम रखा,  जिससे जौनपुर के पास हुए धमाके में 13 लोग मारे गए थे.

    दूध की खाली केन और IED था सिग्नेचर मार्क
    IED और दूध की खाली केन को इस्तेमाल कर किए गए धमाके आईएम का सिग्नेचर मार्क माने जाते हैं. हालांकि रांची और पटना में धमाकों के लिए जिलेटिन की छड़ों का भी इस्तेमाल किया गया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक आंध्र प्रदेश और राजस्थान एक्सप्लोसिव लिमिटेड से डेटोनेटर और कैमिकल्स खरीदे जाते थे. इसके बाद दूध की खाली केन, सूटकेस, प्रेशर कुकर और टिफिन बॉक्स में इन बमों को बनाया जाता था. ये बम देखने में बेहद सामान्य लगते थे लेकिन भीड़ भरी जगहों के लिए बेहद घातक साबित होते थे. IED के जरिये एक से ज्यादा धमाके करना आसान था, जिससे ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा रहा था.

    कैसे सामने आए
    NIA (नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी) की साल 2014 में दायर की गई एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट के मुताबिक पहली बार नवंबर 2007 में लखनऊ कोर्ट में हुए बम ब्लास्ट की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन नाम के आतंकी सगठन ने ली. एक ईमेल सभी मीडिया हाउस को भेजा गया जिसमें लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए धमाकों की ज़िम्मेदारी ली गई थी. बाद में 2005 दिल्ली ब्लास्ट, 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट, 2007 वाराणसी और हैदराबाद ब्लास्ट की ज़िम्मेदारी भी इसी तरह मेल भेजकर ली गई.



    जांच एजेंसी के मुताबिक शुरू में इन सभी मामलों के लिए पाकिस्तानी आतंकी संगठनों पर शक जताया जाता रहा और जांच भी इसी दिशा में की जा रही थी. हालांकि इन सभी ईमेल में बाबरी मस्जिद विध्वंस, गुजरात दंगों और मुस्लिमों पर हो रहे आत्याचारों का लगातार ज़िक्र होता था. 2008 में हुए जयपुर और अहमदाबाद ब्लास्ट के बाद आए मेल में आईएम को पहला भारतीय आतंकी संगठन कहा गया और 'THE RISE OF JIHAD, REVENGE OF GUJARAT' इसका मोटो बताया गया.



    बता दें कि बटला हाउस एनकाउंटर से पहले तक जांच एजेंसियों को आईएम से जुड़े किसी ऑपरेटिव की कोई ख़ास जानकारी नहीं थी. 19 सितंबर 2008 को बटला हॉउस में कथित आईएम संदिग्ध आतिफ अमीन और मोहम्मद सज्जाद को एनकाउंटर में मार गिराया गया. जांच एंजेंसियों ने दावा किया कि ये दोनों ही 2005 से लगातार शहरों में हुए धमाकों में शामिल थे. ये भी दावा किया गया कि एनकाउंटर के बाद से ही रियाज़ और इकबाल भटकल अंडरग्राउंड हो गए हैं और पाकिस्तान भागने की फ़िराक में हैं.



    मोहम्मद अहमद सिद्दिबापा की गिरफ्तारी से पता चला कि रियाज़ ने यासीन भटकल को आईएम की जिम्मेदारी सौंप दी है. यासीन कथित तौर पर वो शख्स है जिसमें दरभंगा, दिल्ली और रांची में आईएम मोड्यूल बनाया है. यासीन ही जर्मन बेकरी ब्लास्ट, दिल्ली जामा मस्जिद शूटिंग, 2010 वाराणसी ब्लास्ट, 2011 मुंबई ब्लास्ट और 2013 हैदराबाद ब्लास्ट का मास्टरमाइंड माना जाता है. यासीन को असदुल्लाह अख्तर के साथ 2013 में नेपाल से गिरफ्तार कर लिया गया था.

    तालिबान और ISIS से जुड़ने की तैयारी
    NIA के मुताबिक भारत से भागने के बाद रियाज़ ने अल कायदा और तालिबान के पास मिलकर काम करने का प्रस्ताव भेजा था. जानकारी के मुताबिक अल कायदा ने रियाज़ को म्यांमार में नेटवर्क बनाने की ज़िम्मेदारी दी थी और कई यहूदियों के अपहरण के पीछे भी यही था. यासीन को रोहिंग्या मुसलमानों को आतंकी संगठनों में शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई है.



    NIA की चार्जशीट के मुताबिक फिलहाल आईएम पर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का कंट्रोल है. मौलाना अब्दुल खालिद सुलतान अरमार और उसका छोटा भाई शफी अरमार फिलहाल आईएम के चीफ माने जाते हैं. इन दोनों ने ही अफगानिस्तान में अंसार-उल-तावाहिद नाम के आतंकी संगठन की शुरुआत की थी. ये दोनों इस्लामिक स्टेट के करीबी हैं और उसकी भर्तियों से जुड़ा काम भी देखते हैं.

    कौन कहां है?



    रियाज़ भटकल
    स्टेटस- फरार
    इंडियन मुजाहिदीन का का सह-संस्थापक है और फिलहाल संगठन का चीफ भी माना जाता है. जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान और सऊदी अरब में छुपकर रह रहा है. इंटरपोल ने इसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है. NIA ने रियाज़ की गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है.



    आमिर रज़ा खान
    स्टेटस- फरार
    आईएम का सह-संस्थापक है और पिछले 10 सालों से फरार है. पाकिस्तान में ISI के प्रोटेक्शन में रह रहा है.



    इकबाल भटकल
    स्टेटस- फरार
    पाकिस्तानी लड़की से शादी कर वहीं सेटल हो गया है. बताया जाता है कि इसने अब आईएम से दूरी बना ली है.



    मोहसिन इस्माइल चौधरी

    स्टेटस- फरार
    मोहसिन भी बटला हाउस एनकाउंटर के बाद ही पाकिस्तान भाग गया था और वहीं से रहकर अब आईएम चला रहा है. मोहसिन का परिवार अब भी पुणे में रहता है.



    डॉक्टर शाहनवाज़
    स्टेटस- फरार
    शाहनवाज़ पेशे से यूनानी डॉक्टर था और यूपी के आजमगढ़ का रहने वाला था. बटला हाउस एनकाउंटर में छोटे भाई सैफ की गिरफ्तारी के बाद आईएम जॉइन कर लिया. फिलहाल अफगानिस्तान में रह रहा है.



    यासीन भटकल
    स्टेटस- ज्युडिशियल कस्टडी में
    आईएम का कमांडर था और सिर्फ 17 साल की उम्र में आतंकी संगठन जॉइन किया था. नेपाल से साल 2013 में गिरफ्तार हुआ.



    अबुल सुब्हान कुरैशी
    स्टेटस- गिरफ्तार
    तौकीर और फैंटम के नाम से भी जाना जाता है. आईएम से पहले सिमी के लिए भी काम कर चुका है. जानकारी के मुताबिक रियाज़ भटकल से मिलने सऊदी अरब भी गया था.

     

    आईएम को जिन हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है

    संकटमोचक मंदिर, वाराणसी
    7 मार्च 2006
    आरोपी : HuJI-B और आईएम
    केस स्टेटस : ट्रायल जारी

    सीरियल ट्रेन ब्लास्ट, मुंबई
    11 जुलाई 2006
    आरोपी : सिमी और लश्कर
    केस स्टेटस : 12 दोषी

    हैदराबाद बलास्ट
    25 अगस्त 2007
    आरोपी : सिमी और आईएम
    केस स्टेटस : ट्रायल जारी



    जयपुर सीरियल ब्लास्ट
    13 मई 2008
    आरोपी : सिमी और आईएम
    केस स्टेटस : ट्रायल जारी

    अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट
    26 जुलाई 2008
    आरोपी : सिमी और आईएम
    केस स्टेटस : ट्रायल जारी

    सूरत
    28-29 जुलाई 2008
    आरोपी : सिमी और आईएम
    केस स्टेटस : ट्रायल जारी

    दिल्ली सीरियल ब्लास्ट
    13 सितंबर 2008
    आरोपी : सिमी और आईएम
    केस स्टेटस : ट्रायल जारी

    जर्मन बेकरी ब्लास्ट, पुणे
    13 फरवरी 2010
    आरोपी : आईएम
    केस स्टेटस : 1 दोषी

    बोधगया ब्लास्ट, बिहार
    7 जुलाई 2013
    आरोपी : सिमी और आईएम
    केस स्टेटस : 1 दोषी

    पटना सीरियल ब्लास्ट
    27 अक्टूबर 2013
    आरोपी : सिमी और आईएम
    केस स्टेटस : 1 दोषी

    Tags: Indian mujahideen

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