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    धर्म परिवर्तन को लेकर इलाहाबाद HC के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, याचिका में फैसले को बताया 'गलत मिसाल'

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है. (फाइल फोटो)
    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है. (फाइल फोटो)

    पश्चिम यूपी के मुजफ्फरनगर के एक जोड़े ने अदालत में एक याचिका दायर कर लड़की के पिता से सुरक्षा की मांग की थी. अदालत ने इस रिट याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने बताया था कि केवल शादी के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 6, 2020, 11:44 AM IST
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    नई दिल्ली. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में बीते महीने एक शादीशुदा जोड़े ने पुलिस संरक्षण की मांग की थी. जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया था. इस जोड़े में दोनों का संबंध अलग-अलग धर्म से था. अब हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर एक चुनौती दी गई है. याचिका में हाईकोर्ट के इस फैसले को गलत मिसाल बताते हुए रोक लगाने की मांग की गई है.

    वकील अलदानिश रीन ने अपनी याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में गैर-धर्म में शादी करने वाले न केवल परिवारों की नफरत के सहारे छोड़ दिया है, बल्कि एक गलत मिसाल भी पेश की है. याचिका में बताया गया है कि विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) केवल उन जोड़ों के लिए है, जहां दोनों परिवार शादी के लिए तैयार होते हैं और जोड़े को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. ऐसा इसलिए है, क्योंकि एक्ट एक नोटिस अवधि को अनिवार्य करता है और इस तरह के नोटिस पर आपत्तियां बुलाता है, जिससे भागकर शादी करने वालों को मुश्किल होती है.

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिली थॉमस बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा जताया था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कहा था कि अगर एक व्यक्ति किसी दूसरे धर्म को केवल सांसारिक फायदे के लिए अपनाता है, तो यह धार्मिक कट्टरता होगी.

    इलाहाबाद कोर्ट से जोड़े ने मांगी थी सुरक्षा


    पश्चिम यूपी के मुजफ्फरनगर के एक जोड़े ने अदालत में एक याचिका दायर कर लड़की के पिता से सुरक्षा की मांग की थी. अदालत ने इस रिट याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने बताया था कि केवल शादी के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है. जस्टिस महेश चंद्र की एकल पीठ ने प्रियांशी उर्फ समरीन और उनके पति की याचिका पर सुनवाई करने के बाद पाया कि महिला जन्म से मुस्लिम थी और अपनी शादी के एक महीने पहले ही उसने हिंदू धर्म अपना लिया था.
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