इलाहाबाद HC का अहम फैसला, 60 साल से पहले हुई मौत तो नहीं रोक सकते ग्रेच्यूटी

इलाहाबाद HC का अहम फैसला, 60 साल से पहले हुई मौत तो नहीं रोक सकते ग्रेच्यूटी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला लिया है. (File Photo)

हाईकोर्ट (High Court) ने कहा है कि सहायक अध्यापक की पेंशन (Pension), ग्रेच्यूटी आदि भुगतान के संबंध में 16 सित॔बर 2009 को जारी शासनादेश 60 साल की आयु से पहले मृत्यु की दशा में ग्रेच्यूटी भुगतान पर रोक नहीं लगाता.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने मृत कर्मचारी के ग्रेच्युटी भुगतान (Gratuity Payment) को लेकर अहम आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि सहायक अध्यापक की पेंशन, ग्रेच्यूटी आदि भुगतान के संबंध में 16 सित॔बर 2009 को जारी शासनादेश 60 साल की आयु से पहले मृत्यु की दशा में ग्रेच्यूटी भुगतान पर रोक नहीं लगाता. बल्कि इसके क्लाज 5 में साफ लिखा है कि 60 साल या मृत्यु की दशा में ग्रेच्यूटी भुगतान किया जाएगा. कोर्ट ने 60 साल का विकल्प न देने के आधार पर विधवा याची को ग्रेच्यूटी का भुगतान करने से इंकार करने के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कन्नौज के 3 मार्च 20 के आदेश को रद्द कर दिया है. साथ ही  उषारानी केस के फैसले के तहत नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है. इस केस में कोर्ट ने भुगतान में देरी के लिए 8 फीसदी ब्याज देने का भी आदेश दिया है. यह आदेश जस्टिस एमसी त्रिपाठी ने प्रेम कुमारी की याचिका की स्वीकार करते हुए दिया है.

याचिका पर अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी ने बहस की. गौरतलब है कि याची के पति सुरवेन्द्र सिंह ग्राम्य शिक्षा निकेतन जूनियर हाई स्कूल जफराबाद उन्नाव में  1995 से सहायक अध्यापक थे. उनकी सेवा काल में मौत हो गई. पेंशन आदि का भुगतान किया गया किन्तु ग्रेच्यूटी रोक दी गई. कहा गया कि उन्होंने  60 साल में सेवानिवृत्त लेने का विकल्प नहीं भरा था. कोर्ट ने तय करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद याची की अर्जी निरस्त की गई जिसे चुनौती दी गई थी.

ये भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों के सभी अंतरिम आदेश 14 जुलाई तक बढ़े



अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ाई
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट सहित प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों, अधिकरणों, न्यायिक संस्थाओं द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेश (Interim Order) जो इस दौरान  समाप्त होने वाले हैंं उसे 14 जुलाई तक बढ़ा दिया है. इसी तरह जमानत के आदेश, ध्वस्तीकरण और बेदखली पर रोक के आदेश की भी अवधि 14 जुलाई तक बढ़ा दी गई है. यह आदेश जस्टिस शशिकान्त गुप्ता और जस्टिस वीसी दीक्षित की खंडपीठ ने स्वतः कायम जनहित याचिका पर दिया है. कोर्ट ने 8 जून, 20 और 19 जून 20 को पारित आदेशों को आगे जारी रखने का आदेश दिया है.
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