तलवार ने आरुषि-हेमराज को बेडरूम में देखा था, CBI की थ्योरी को HC ने नकारा

News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 11:52 AM IST
तलवार ने आरुषि-हेमराज को बेडरूम में देखा था, CBI की थ्योरी को HC ने नकारा
9 साल पुराने आरुषि और हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई की थ्योरी को नकारते हुए दोषी नूपुर और राजेश को बरी कर दिया.
News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 11:52 AM IST
9 साल पुराने आरुषि और हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई की थ्योरी को नकारते हुए दोषी नूपुर और राजेश को बरी कर दिया. सीबीआई ने अपनी थ्योरी में कहा था, दोनों को सेक्सुअल एक्ट में देखने के बाद राजेश ने उनकी हत्या कर दी थी.

सीबीआई ने अपनी थ्योरी में यह भी कहा था कि 14 साल की बेटी और हेमराज को समझौते की स्थिति में देखकर राजेश का खुद पर नियंत्रण नहीं रहा. गुस्से में आकर उसने उनकी हत्या कर दी. लेकिन हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सीबीआई की इस थ्योरी को इस बिनाह पर मानने से इनकार कर दिया कि सीबीआई हत्या की मंशा पर कोई विश्वसनीय सबूत नहीं उपलब्ध करा पाई है.

हाईकोर्ट ने कहा, अभियोजन पक्ष ने इस केस में कोई भी विश्वनयी सबूत नहीं दिया, जिससे हत्या की मंशा स्पष्ट नहीं हो पाई. इस दोहरे हत्याकांड में अभियोजन की तरफ से हत्या का जो आधार बनाया गया था वह पुष्ट नहीं हो सका.

सीबीआई के द्वारा उपलब्ध कराई गई कई मेडिकल और फोरेंसिक सबूतों पर बेंच ने कहा, यहां एक भी स्पष्ट सबूत नहीं मिले जिससे यह मालूम हो कि राजेश ने आरुषि और हेमराज को बेडरुम में देखर गुस्से में हत्या को अंजाम दिया. कोर्ट ने कहा कि इस दोहरे हत्याकांड में मकसद को काफी महत्वपूर्ण मान लिया गया. लेकिन अभियोजन सबूत के परिस्थितियों को साबित करने में विफल रहा.

ट्रायल कोर्ट को भी जांच टीम से यह सवाल करना चाहिए कि क्यों बिना किसी ठोस सबूत के केवल कहानी के दम पर दोनों को दोषी मान लिया गया. चीजों को एक गणित के टीचर के तौर पर नहीं देखा जा सकता है, जो कि निश्चित आकृति के आधार पर सवाल को हल कर रहा होता है.
First published: October 13, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर