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इलाहाबाद विश्वविद्यालय मना रहा है अपना 135 वां स्थापना दिवस, जाने 134 साल के इसके सफर को

इविवि

इविवि के 134 साल

इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के 134 साल पूरे कर चुका है.

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    इलाहाबाद विश्वविद्यालय 23 सितंबर को अपना 135 वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है. 135 सालों के सफर में विश्वविद्यालय ने अनेक उपलब्धियां, गौरव अपने नाम किया है. वक्त के साथ-साथ यह अपने कद को और ऊंचा करता गया. अब यह एक धरोहर है देश की, प्रदेश की.
    अपनी ऐतिहासिकता और भव्यता को यह आज तक कायम रखे हुए हैं. पूरब का ऑक्सफोर्ड कहां जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत के चार पुराने विश्वविद्यालय में से एक है. गुलामी की जंजीरों, आजादी के संघर्ष, बदलते और संवरते भारत का साक्षी है यह केंद्रीय विश्वविद्यालय.
    अब जब विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के 1 साल और पूरे कर रहा है तो बेशक अतीत से प्रेरणा और सबक लेकर, आगे बढ़ने के लिए यह तत्पर है. यहां के शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने हिस्से के वक्त और परिश्रम से इसे बनाया है. ऐसे में स्थापना दिवस एक अवसर है, नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के लिए.

    ऐसे पड़ी विश्वविद्यालय की नींव
    ब्रिटिश हुकूमत के समय समूचे उत्तर भारत में शिक्षा का कोई केंद्र नहीं था. शिक्षण संस्थाओं की संबद्धता कोलकाता विश्वविद्यालय से थी. फिर 1866 में इलाहाबाद में म्योर कॉलेज की स्थापना की गई जो आगे चलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ. 9 दिसंबर 1873 को इसकी आधारशिला रखी गई. इसका औपचारिक उद्घाटन 8 अप्रैल 1886 को वायसराय लॉर्ड डफरिन ने किया. इसका नक्शा प्रसिद्ध अंग्रेज वास्तुविद इमरसन ने बनाया था. भारत के काल में स्थापित कलकत्ता (कोलकाता),बाम्बे (मुंबई), मद्रास यूनिवर्सिटी के बाद यह देश की चौथी सबसे पुरानी  है. 2005 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ था.

    आकर्षित करते हैं इसके गुंबद और मेहराब
    इलाहाबाद विश्वविद्यालय हमेशा से अपनी बनावट और वास्तुकला के चलते भी लोगों के बीच लोकप्रिय है. दशकों पुरानी इसकी इमारत तत्कालीन समय के वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसकी ऐतिहासिक और भव्य इमारत अलग-अलग शैली में बनाई गई हैं. गुंबदों, स्तंभों और मेहराबों वाला यह विश्वविद्यालय सिर्फ छात्र-छात्राओं के लिए नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी एक दर्शनीय स्थल है. विश्वविद्यालय परिसर में विजयनगरम हॉल, सीनेट हॉल जैसे खूबसूरत धवन मौजूद है. विजयनगरम हॉल फिल्मों में दिखाए जाने वाले रंग महल से कम नहीं है जो कि गोथिक शैली पर बनाया गया है.वहीं सीनेट हॉल पर मौजूद बड़ी सी घड़ी जो कभी पूरे शहर को समय बताती थी, आज भी आकर्षण का केंद्र है.


    अनेको शख्सियतों को तराशा है विश्वविद्यालय ने

    इलाहाबाद विश्वविद्यालय का ध्येय वाक्य है- Quote Rami Tot arbore
    जो कि लैटिन भाषा से लिया गया है. जिसका अर्थ है- \’जितनी शाखाएं उतने ज्यादा पेड़\’
    सच है.. यहां से पढ़े अनेकों छात्र-छात्राओं ने आगे चलकर इस विश्वविद्यालय के गौरव को बढ़ाया है. यहां से मार्गदर्शन प्राप्त करके जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सफल हुए लोगों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. फिर चाहे वह विज्ञान के क्षेत्र में मेघनाथ साहा,नीलरत्न धर जैसे वैज्ञानिक हो या साहित्य क्षेत्र में धर्मवीर भारती, हरिवंश राय बच्चन, महादेवी वर्मा हो. फिराक गोरखपुरी जैसे शायर हो.साथ ही राजनीति के क्षेत्र में भी यह कई सफल राजनीतिज्ञों की प्रथम पाठशाला रही है. राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर राव, वीपी सिंह जैसे नेताओं ने राजनीति में पहला कदम यही से बढ़ाया. यह सभी लोग प्रेरणा है आज की पीढ़ी के लिए. यह सभी विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का प्रमाण है जो उस विवि को लगातार आगे ले जा रहा है.
    अतः इस साल का स्थापना दिवस अवसर है, यहां के छात्रों, शिक्षकों के लिए वह अपने विश्वविद्यालय पर गर्व करें और इसे बहुत आगे तक ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत रहे.

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