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बर्खास्‍तगी की कगार पर खड़े जवान के लगाया भेदभाव का आरोप, तब जनरल बिपिन रावत ने लिया था यह बड़ा फैसला...

बर्खास्‍तगी की कगार पर खड़े जवान के लगाया भेदभाव का आरोप, तब जनरल बिपिन रावत ने लिया था यह बड़ा फैसला...

सीडीएस जनरल बिपिन रावत जवानों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं.

सीडीएस जनरल बिपिन रावत जवानों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं.

सेना प्रमुख रहते हुए सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने अधिकारियों और जवानों को हमेशा एक नजर से देखा. एक गलती के लिए सेना के अधिकारी और जवान के लिए अलग-अलग फैसलों पर तत्‍कालीन जनरल बिपिन रावत का बडा फैसला जानने के लिए पढ़ें आगे...

नई दिल्‍ली. यह वाकया तब का है, जब सीडीएस जनरल बिपिन रावत भारतीय सेना के प्रमुख थे. एक जवान बड़ी टेड़ी सी फरियाद लेकर जनरल बिपिन रावत के पास पहुंचा था. दरअसल, इस जवान को शराब की लत के कारण एफ-5 कैटेगरी में डाल‍ दिया गया था. इस जवान को नौकरी से निकालने के आदेश जारी हो चुके थे और इस आदेश पर प्रशासनिक प्रकिया जा रही थी. जिसकेबाद अपनी फरियाद लेकर यह जवान जनरल बिपिन रावत के पास पहुंचा था.

जवान का पक्ष था कि उसके अफसर को इसी गलती की वजह से नशामु‍क्ति प्रोग्राम में डाल दिया गया है, जबकि उसके बर्खास्‍तगी के आदेश जारी कर दिए गए हैं. सेना में अफसर और जवान के साथ ऐसा भेदभाव क्‍यों? जवान की फरियाद सुनने के बाद जनरल ि‍बपिन रावत ने तत्‍काल बर्खास्‍तगी के आदेश को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया. साथ ही यह कहा कि चाहे जवान हो या फिर अफसर, किसी के भी साथ, किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए.

हर रविवार घर में जवानों से सीधा संवाद करते थे जनरल रावत 
भारतीय सेना के एडुटेंट जनरल रहे लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार के अनुसार, सेना प्रमुख रहते हुए जनरल बिपिन रावत की हमेशा यही कोशिश रही कि जवानों की समस्‍याओं को न केवल संवेदना के साथ सुना जाए, बल्कि उनका प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए. वे खुद हर रविवार अपने घर पर जवानों से सीधा संवाद करते थे और जवानों की हर छोड़ी-बड़ी शिकायत का प्राथमिकता के साथ समाधान करते थे. उनके घर के दरवाजे हमेशा सभी के लिए खुले रहे.

जवानों से मिलकर खास खुशी महसूस करते थे जनरल रावत
भारतीय सेना के एडुटेंट जनरल रहे लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार के अनुसार, सेना के जवानों के लिए जनरल बिपिन कुमार के दिल में खास प्‍यार था. वे एक ऐसे जनरल थे, जिन्‍होंने कभी जवान और जेसीओ में फर्क नहीं किया. वे जब भी कभी दौरे पर जाते थे, उनकी कोशिश होती थी कि वे सबसे पहले जवानों से मिले. उन्‍हें जवानों के साथ रहना, उसके साथ खाना साझा करना और जवानों के दिल में चल रही हर बात को समझ सकें.

जवानों के बीच बांट रखा था अपना व्हाट्सएप नंबर
सीडीएस बन जाने के बाद भी जवानों से मिलने का यह सिलसिला उनके घर पर हर रविवार जारी रहा. सेना प्रमुख रहते हुए उन्‍होंने अपना व्हाट्सएप नंबर जवानों को उपलब्‍ध कराया था, जिससे सेना के हर जवान की पहुंच सीधे सेना प्रमुख तक बन सके. बकौल लेफ्टिनेंट जनरल अश्‍विनी कुमार, थियेटर कमांड सहित सेना संगठन में हुए सुधारों के पीछे जनरल बिपिन रावत की दूरदृष्टि रही है.

Tags: Cds bipin rawat, General Bipin Rawat, Indian army, Indian Army Heroes

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