रामदेव की कोरोनिल: Covid मरीजों में ट्रायल के दौरान लक्षण बढ़ने पर दी एलोपैथिक दवा?

रामदेव की कोरोनिल: Covid मरीजों में ट्रायल के दौरान लक्षण बढ़ने पर दी एलोपैथिक दवा?
बाबा रामदेव द्वारा लॉन्च की गई दवा कोरोनिल सवालों के घेरे में आ गई है.

Coronavirus: राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल हेल्थ ऑफिसर नरोत्तम शर्मा का कहना है- 'NIMS अस्पताल में सिर्फ लक्षणविहीन कोरोना रोगी ही भर्ती कराए जा रहे हैं. इसलिए ये कहना उचित नहीं कि इस दवा ने कोरोना रोगियों का सौ प्रतिशत इलाज कर दिया है.'

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  • Last Updated: June 25, 2020, 12:32 PM IST
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नई दिल्ली. बाबा रामदेव (Baba Ramdev) द्वारा लॉन्च की गई दवा कोरोनिल (Coronil) सवालों के घेरे में आ गई है. बाबा ने इस दवा को लॉन्च करते हुए कोविड-19 के सौ प्रतिशत इलाज का दावा किया था. बुधवार को आयुष मंत्रालय द्वारा बाबा रामदेव से जवाब मांगे जाने के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि उन्होंने ऐसी किसी दवा के लिए लाइसेंस नहीं दिया है. वहीं, राजस्थान सरकार की तरफ से कहा गया है कि उन्हें इस दवा के ट्रायल की कोई जानकारी नहीं है.

गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने कहा था कि इस दवा का ट्रायल राजस्थान के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्चेस (NIMS) में किया गया है. ये एक प्राइवेट अस्पताल है जहां पर कोरोना के मरीजों का इलाज चल रहा है.

गंभीर रोगियों को नहीं किया गया ट्रायल में शामिल
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दवा का ट्रायल सिर्फ हल्के लक्षणों वाले और लक्षणविहीन कोरोना रोगियों पर किया गया है. लेकिन जैसे ही रोगियों में लक्षण गंभीर हुए तो उन्हें एलोपैथिक दवाएं दी गईं. इस ट्रायल के दौरान कोरोना के गंभीर रोगियों को शामिल ही नहीं किया गया था.
अभी तक नहीं आई फाइनल रिपोर्ट


निम्स जयपुर के चीफ इन्वेस्टिगेटर डॉ. गनपत देवपुरा के मुताबिक-ये सौ मरीजों पर किए गए ट्रायल की सिर्फ एक अंतरिम रिपोर्ट थी. फाइनल रिपोर्ट 15 से 25 दिनों के भीतर आएगी. इसके बाद ही इसे पीयर रिव्यू यानी बेहतर मूल्यांकन के लिए भेजा जाएगा. डॉ. गनपत ने साफ किया है कि जब ट्रायल के दौरान रोगियों में बुखार या अन्य लक्षण उभरे तो उन्हें एलोपैथिक दवाएं दी गईं.

कैसे हुआ ट्रायल?
इस ट्रायल के बारे में विस्तार से बताते हुए डॉ. गनपत ने कहा है- 'ये एक डबल ब्लाइंड रैंडमाइज्ड ट्रायल था. 50 मरीजों को प्लेसेबो और 50 मरीजों को आयुर्वेदिक इलाज दिया गया था. हमने पहले, तीसरे और सातवें दिन RT PCR टेस्ट किए थे. और इनमें से 69 प्रतिशत मरीजों का टेस्ट तीसरे दिन निगेटिव आया था. प्लेसेबो ग्रुप में सिर्फ 50 प्रतिशत का टेस्ट निगेटिव आया. सातवें दिन किए गए टेस्ट में आयुर्वेदिक दवाओं वाले ग्रुप के सभी मरीज निगेटिव आए थे जबकि प्लेसेबो ग्रुप में 65 प्रतिशत. यानी 35 प्रतिशत रोगियों का इलाज आगे भी जारी रहा. आयुर्वेदिक इलाज में मरीजों को स्वसरी रस (500 एमजी), अश्वगंधा (500 एमजी), गिलोय अर्क (500 एमजी), तुलसी अर्क(500 एमजी) दिए गए.'

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'निम्स में भर्ती हो रहे सिर्फ लक्षणविहीन रोगी'
राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल हेल्थ ऑफिसर नरोत्तम शर्मा का कहना है- 'NIMS अस्पताल में सिर्फ लक्षणविहीन कोरोना रोगी ही भर्ती कराए जा रहे हैं. इसलिए ये कहना उचित नहीं कि इस दवा ने कोरोना रोगियों का सौ प्रतिशत इलाज कर दिया है.' वहीं राजस्थान के हेल्थ मिनिस्टर रघु शर्मा के मुताबिक- 'ये क्लीनिकल ट्रायल बिना सरकार से अनुमति लिए किए गए हैं. क्लीनिकल ट्रायल को लेकर स्पष्ट गाइडलाइंस मौजूद हैं.'
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