40 साल बाद इंसाफ! हत्या के वक्त नाबालिग पाया गया शख्स, उम्रकैद माफ़

साल 2009 में बनारस सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पटना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी. उनके वकील ने बिहार चाइल्ड्स एक्ट और जुविनाइल जस्टिस एक्ट का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी.

News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 10:02 AM IST
40 साल बाद इंसाफ! हत्या के वक्त नाबालिग पाया गया शख्स, उम्रकैद माफ़
40 साल बाद मिला इंसाफ
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Updated: July 17, 2019, 10:02 AM IST
कहा जाता है कि कानून के घर में देर है अंधेर नहीं. कोर्ट कचहरी में कई बार न्याय मिलने में देरी होती है, लेकिन फैसला आता जरूर है. कुछ ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट में देखने को मिला. चालीस साल के बाद कोर्ट ने एक शख्स के हक में फैसला सुनाते हुए कहा है कि वो मर्डर करते समय नाबालिग था.

क्या है पूरा मामला?
ये घटना 1980 की है. बिहार के गया में बनारस सिंह अपने चचेरे भाई के साथ एक होटल पहुंचे. इसी होटल में उसने भाई की हत्या कर दी. कुछ देर के बाद होटल स्टाफ को पता चला कि बनारस सिंह वहां से गायब हो गया. लेकिन बाद में पुलिस से उसे गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद गया की एक कोर्ट ने उसे हत्या के आरोप में आजावीन कारावास की सजा सुना दी. वो 10 साल से ज्यादा समय तक जेल में रहा.

फैसले को चुनौती

इसके बाद बनारस सिंह ने पटना हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की. उनकी दलील थी कि उसने जिस वक्त हत्या की तब वो नाबालिग था. सिंह ने कोर्ट में कहा कि उस वक्त उनकी उम्र 17 साल 6 महीने थी. उस लिहाज से उसे नाबालिग के हिसाब से सजा दी जाए, लेकिन हाई कोर्ट ने 1998 में उनकी इस अपील को खारीज कर दी.

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
साल 2009 में सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पटना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी. उनके वकील ने बिहार चाइल्ड्स एक्ट और जुविनाइल जस्टिस एक्ट का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी. दस साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से जवाब मांगा. रिपोर्ट में 10वीं के सर्टिफिकेट और बाकी रिकॉर्ड्स के हवाले ये साबित हो गया कि बनारस सिंह हत्या के समय 17 साल 6 महीने के थे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिंह पहले ही करीब 10 साल की सजा काट चुके हैं. ऐसे में तुरंत उसे जेल से रिहा किया जाना चाहिए.
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First published: July 17, 2019, 9:09 AM IST
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