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आंदोलनकारी किसानों से बोले कैप्टन- पंजाब को अशांत न करें, दिल्ली-हरियाणा में करें प्रदर्शन

कैंप्‍टन अमरिंदर सिंह. (फाइल फोटो)

कैंप्‍टन अमरिंदर सिंह. (फाइल फोटो)

कैप्टन अमरिंदर (Captain Amarinder Singh) ने कहा है कि जिस राज्य की जनता किसानों के जायज मुद्दों के पक्ष में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी हो, उसे भाजपा द्वारा पारित इन कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य भर में विरोध प्रदर्शन करने से बचना चाहिए.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) ने सोमवार को विभिन्न किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ राज्यभर में विरोध प्रदर्शन न करें क्योंकि राज्य सरकार और उसके लोगों ने पहले ही इसके साथ एकजुटता व्यक्त की है. किसान आंदोलन पर चिंता जाहिर करते हुए कैप्टन ने कहा-अगर आपको केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है तो अपना आंदोलन दिल्ली में की कीजिए. पंजाब को अपने आंदोलन से अशांत मत कीजिए.

    वह होशियारपुर के चब्बेवाल विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मुखलियाना में जनसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जिस राज्य की जनता किसानों के जायज मुद्दों के पक्ष में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी हो, उसे भाजपा द्वारा पारित इन कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य भर में विरोध प्रदर्शन करने से बचना चाहिए.

    राज्य के हित में नहीं है प्रदर्शन
    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब में 113 जगहों पर किसानों द्वारा किया जा रहा विरोध प्रदर्शन राज्य के हित में बिल्कुल भी नहीं है, इससे उसके आर्थिक विकास पर काफी असर पड़ा है और उम्मीद है कि आंदोलन करने वाले किसानों द्वारा उनके अनुरोध को स्वीकार किया जाएगा. शहीद भगत सिंह नगर के बल्लोवाल सौंखड़ी एक अन्य जनसभा में उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने खेती कानूनों के मुद्दे पर किसानों को धोखा दिया है.

    अकाली दल की मंजूरी से लाए गए थे कृषि कानून
    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कृषि कानून अकाली दल की मर्जी से ही अमल में लाए गए थे और हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्री होते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने आर्डिनेंस पास किए थे. इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की तरफ से भी खेती कानूनों की वकालत की गई लेकिन जब उनका विरोध शुरू हुआ तो अकाली दल ने सुर बदल लिए.

    पहले दिन से कानून के विरोध में है कांग्रेस
    कांग्रेस को इन काले कानूनों का पहले दिन से ही इनका विरोध करने वाली पार्टी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पहली सर्वदलीय मीटिंग बुलाई थी और उसके बाद किसान जत्थेबंदियों के साथ भी मीटिंग की. इसके बाद राज्य सरकार ने पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इन खेती कानूनों को प्रभावहीन करने के लिए बिल पास किए. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि 1950 से लेकर अब तक 127 बार संविधान में संशोधन किया जा चुका है.

    उन्होंने आगे कहा कि तो फिर अब क्यों नहीं एक बार और संशोधन करके किसानों को राहत देने के लिए खेती कानून रद्द किए जाएं. उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान अपनी जान गवाने वाले किसानों के परिवारों को 5 लाख रुपए प्रति किसान परिवार और परिवार के एक मेंबर को नौकरी प्रदान कर रही है.

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