COVID-19: मार्च से ही मृतकों का करा रहा था अंतिम संस्कार, एंबुलेंस ड्राइवर आरिफ की हो गई कोरोना से मौत

कोरोना से हुई एंबुलेंस चालक की मौत.

Corona Warrior Arif Khan: आरिफ खान दिल्‍ली में फ्री एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने वाले शहीद भगत सिंह सेवा दल में काम करते थे. अगर किसी कोरोना मरीज के अंतिम संस्कार में उसके परिवार वालों को रुपये की जरूरत होती थी तो वह आर्थिक रूप से भी उनकी मदद करते थे.

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    नई दिल्‍ली. देश-दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या काफी ज्‍यादा है, जो कोरोना महामारी (Corona Warriors) के इस बुरे वक्त में अपने घर परिवार से दूर रहकर लोगों की मदद कर रहे हैं. ऐसे ही एक व्‍यक्ति थे आरिफ खान (Arif Khan). वह दिल्‍ली के सीलमपुर के रहने वाले थे, लेकिन पिछले 6 महीने से घर सोने तक नहीं गए थे. दरअसल आरिफ दिल्‍ली में एंबुलेंस चालक थे. वह इस साल मार्च से ही पार्किंग एरिया में रहे थे. उन्‍होंने इन छह महीनों में करीब 200 कोरोना मरीजों (Coronavirus patients) को अपनी एंबुलेंस (Ambulance) से अस्‍पताल पहुंचाया था. इनमें से कुछ की मौत के बाद उन्हें अंतिम संस्‍कार के लिए भी लेकर गए थे. वह उनकी मदद के लिए 24 घंटे उपलब्‍ध रहते थे. लेकिन अब शनिवार को सुबह उनकी मौत खुद कोरोना वायरस महामारी के कारण दिल्‍ली के हिंदू राव अस्‍पताल में हो गई.

    आरिफ खान दिल्‍ली में फ्री एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने वाले शहीद भगत सिंह सेवा दल में काम करते थे. बताया गया कि अगर किसी कोरोना मरीज की मौत होती थी और उसके परिवार वालों को अंतिम संस्‍कार के लिए रुपये की मदद होती थी तो आरिफ खान आर्थिक रूप से भी उनकी मदद करते थे. लेकिन जब उनकी मौत हुई तो उनके अंतिम संस्‍कार में उनके परिवार लोग भी पास नहीं थे. उनके परिवार ने आरिफ का शव काफी दूर से कुछ मिनट के लिए ही देखा.

    जानकारी के मुताबिक, 3 अक्‍टूबर को आरिफ की तबीयत खराब हुई थी. उन्‍होंने अपना कोविड टेस्‍ट कराया, जो कि पॉजिटिव आया. इसके बाद उन्‍हें जिस दिन अस्‍पताल में भर्ती कराया गया, उसी दिन उनकी मौत हो गई. आरिफ के 22 साल के बेटे आदिल ने बताया कि उन लोगों ने मार्च से लेकर अब तक बस कभी-कभी ही उन्‍हें देखा था. वह जब भी घर पर कपड़े या कुछ अन्‍य सामान लेने आते थे, बस तभी कुछ समय के लिए वे लोग आरिफ को देख पाते थे. परिवार को हमेशा उनकी चिंता होती थी. लेकिन वह कोविड 19 से कभी घबराए और अपनी जॉब की.

    आरिफ घर में एकलौते कमाने वाले थे. उनकी सैलरी 16000 रुपये थी. उनका घर का मासिक किराया 9000 रुपये है. आदिल के अनुसार एक बार उसने और उसके भाई ने नौकरी की, लेकिन वह ज्‍यादा समय तक नहीं रही. आरिफ के दोस्‍त जितेंद्र कुमार ने कहा कि अब परिवार के लिए दुख का पहाड़ टूट गया है. उन्‍होंने कहा, 'यह एक चुनौती भरा समय था. लेकिन खान इसमें भी लोगों की बढ़कर मदद करता था. वह लोगों का अंतिम संस्‍कार तक कराता था. वह मुस्लिम था, लेकिन हिंदुओं के भी अंतिम संस्‍कार कराता था. वह अपने काम के प्रति जिम्‍मेदार था.'

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