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    6 महीनों से कोविड मरीजों को पहुंचा रहे थे अस्पताल, अब संक्रमण ने ली एंबुलेंस ड्राइवर की जान

    आरिफ खान फ्री एंबुलेंस सेवा देने वाले शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ काम करते थे.
    आरिफ खान फ्री एंबुलेंस सेवा देने वाले शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ काम करते थे.

    दिल्ली के कोरोना मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले आरिफ खान फ्री एंबुलेंस सेवा (Free Ambulance Service) देने वाले शहीद भगत सिंह (Shaheed Bhagat Singh Seva Dal) सेवा दल के साथ काम करते थे. परिवार का कोई सदस्य कोरोना वायरस की चपेट में न आए इसके लिए आरिफ छह महीने से घर से 28 किमी दूर पार्किंग एरिया (Parking Area) में ही सो रहे थे. वह सिर्फ फोन के जरिए ही अपनी पत्नी और बच्चों के संपर्क में थे.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 12, 2020, 1:55 PM IST
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    नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में पिछले 6 महीनों से कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने वाले ड्राइवर की मौत हो गई. एंबुलेंस ड्राइवर का नाम आरिफ खान है. आरिफ ने रविवार को हिंदू राव अस्पताल में आखिरी सांस ली. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, कोरोना मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और उनके शवों को अंतिम संस्कार (Cremation) तक पहुंचाने वाले एंबुलेंस ड्राइवर (Ambulance Driver) आरिफ खान पिछले दिनों संक्रमित हो गए थे.







    दिल्ली के कोरोना मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले आरिफ खान फ्री एंबुलेंस सेवा (Free Ambulance Service) देने वाले शहीद भगत सिंह (Shaheed Bhagat Singh Seva Dal) सेवा दल के साथ काम करते थे. आरिफ सिर्फ मरीजों की ही मदद नहीं करते थे बल्कि कोरोना से जिन लोगों की मौत हो गई है और उनके परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं होते थे, तो आरिफ खान पैसे देकर भी उनकी मदद करते थे.

    कोरोना के कारण 6 महीने से नहीं गए थे घर
    परिवार का कोई सदस्य कोरोना वायरस की चपेट में न आए इसके लिए आरिफ छह महीने से घर से 28 किमी दूर पार्किंग एरिया (Parking Area) में ही सो रहे थे. वह सिर्फ फोन के जरिए ही अपनी पत्नी और बच्चों के संपर्क में थे. आरिफ खान अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे, वह हर महीने 16,000 रुपये कमाते थे. शहीद भगत सिंह सेवा दल के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह शंटी ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए कहा, आरिफ का जाना उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका है. आरिफ भले ही एक ड्राइवर थे, लेकिन वह मुस्लिम होते हुए भी हिंदुओं के अंतिम संस्कार के लिए पीड़ित परिवार की मदद करते थे, वह अपने काम के लिए पूरी तरह से समर्पित थे.


    200 से अधिक कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आए
    जितेंद्र कुमार ने कहा कि आरिफ ने सुनिश्चित किया था कि सभी को अंतिम विदाई मिले, लेकिन उनका अपना परिवार उनके लिए ये नहीं कर सका. आरिफ का परिवार सिर्फ कुछ मिनट के लिए ही उन्हें दूर से देख सका. जितेंद्र ने बताया कि मार्च से अब तक आरिफ 200 से अधिक कोरोना संक्रमित शवों के संपर्क में आए थे.

    आरिफ खान के 22 साल के बेटे आदिल ने कहा कि उन्होंने अपने पिता को 21 मार्च को अंतिम बार देखा था, जब वह घर पर कुछ कपड़े लेने गए थे. परिवार को हमेशा उनकी चिंता होती थी, वह अपना काम अच्छी तरह से कर रहे थे, वह कभी भी कोरोना संक्रमण से नहीं डरे, जब वह आखिरी बार घर गए थे, तब भी वह बीमार थे.
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