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किसान आंदोलन: अमेरिका ने किया नए कृषि कानूनों का समर्थन, कहा- हम शांतिपूर्ण विरोध के साथ

किसान केंद्र द्वारा पारित किये गये कृषि कानूनों के खिलाफ 71 दिनों से आंदोलित हैं.
किसान केंद्र द्वारा पारित किये गये कृषि कानूनों के खिलाफ 71 दिनों से आंदोलित हैं.

Farmers Protest: किसान आंदोलन पर अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी की है. डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ऐसे कदमों का स्वागत करता है जो भारत के बाजारों की स्थिति में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र में अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2021, 5:38 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिका ने भारत के नए कृषि कानूनों (Farm Laws) का समर्थन किया है. अमेरिका ने कहा कि वह ऐसे कदमों का स्वागत करता है जो भारतीय बाजारों की 'निपुणता में सुधार' करेंगे और निजी क्षेत्र के अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे. भारत में चल रहे किसान आंदोलन (Kisan Andolan) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका यह मानता है कि शांतिपूर्ण विरोध किसी भी संपन्न लोकतंत्र की पहचान है. मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए.

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र की पहचान मानता है. भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है. हम मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने को प्रोत्साहित करते हैं. प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ऐसे कदमों का स्वागत करता है जो भारत के बाजारों की स्थिति में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र में अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे.






71 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलित हैं किसान
किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इन कानूनों में किसान व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 शामिल है.

इसी आंदोलन के तहत 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा भड़की. प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में प्रवेश करने के लिए बैरिकेड्स तोड़ दिए और केंद्र की तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में अपनी ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में हिंसा हुई.



22 जनवरी को किसानों के साथ 11 वें दौर की वार्ता के दौरान सरकार ने नए कानूनों डेढ़ साल के लिए सस्पेंड करने के साथ ही इस पर चर्चा के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का भी प्रस्ताव रखा था.
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