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अमेठी अब बन गया है स्मृति दीदी का गढ़, पूरे इलाके की हैं सुख-दुख की साथी

अमेठी अब बन गया है स्मृति दीदी का गढ़, पूरे इलाके की हैं सुख-दुख की साथी

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी. (फाइल फोटो)

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी. (फाइल फोटो)

बीजेपी (BJP) के एक नेता सिद्धि नाथ सिंह पार्टी संगठन के काम के लिए जगदीशपुर गए हुए थे. वहीं बाजार में उन्होंने एक दिव्यांग को ट्राई साइकिल पर जाते हुए देखा. उसकी ट्राई साइकिल की सीट के पीछे दीदी स्मृति ईरानी (Smriti Irani) लिखा हुआ था. सिंह साहब, कौतुहलवश उसके पास पहुंचे और पूछा कि दीदी का नाम क्यों लिखवाया है? ऐसा सवाल सुनते ही वह भड़क गया और कहने लगा कि 20 साल से वह इसकी मांग कर रहा था. लेकिन अब जाकर दीदी स्मृति ईरानी ने उसे ये दी है. साफ़ है कि अमेठी (Amethi) से सांसद और केंद्रीय मंत्री (Union Minister) स्मृति ईरानी अब पूरे अमेठी इलाके की दीदी और सुख-दुख की साथी बन गई हैं.

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नई दिल्‍ली. चंद दिनों पहले बीजेपी (BJP) के एक नेता सिद्धि नाथ सिंह पार्टी संगठन के काम के लिए जगदीशपुर गए हुए थे. वहीं बाजार में उन्होंने एक दिव्यांग को ट्राई साइकिल पर जाते हुए देखा. उसकी ट्राई साइकिल की सीट के पीछे दीदी स्मृति ईरानी (Smriti Irani)  लिखा हुआ था. सिंह साहब, कौतुहलवश उसके पास पहुंचे और पूछा कि दीदी का नाम क्यों लिखवाया है? ऐसा सवाल सुनते ही वह भड़क गया और कहने लगा कि 20 साल से वह इसकी मांग कर रहा था. लेकिन अब जाकर दीदी स्मृति ईरानी ने उसे ये दी है.

साफ़ है कि अमेठी (Amethi) से सांसद और केंद्रीय मंत्री (Union Minister) स्मृति ईरानी अब पूरे अमेठी इलाके की दीदी और सुख-दुख की साथी बन गई हैं. अमेठी में उनके कार्यालय से पता चला कि अब तक वो लगभग 15 हजार ट्राई साइकिल अमेठी, रायबरेली और जगदीशपुर इलाके में बांट चुकी हैं. स्थानीय समाज कल्याण विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के सहयोग से ऐसे दिव्यांगों का पता लगाती रहती हैं. सूचना मिलते ही इलाके के ऐसे हर व्यक्ति तक सुविधा पहुंचाने का काम पूरा किया जाता है. इसके अलावा स्मृति ईरानी ट्राई साइकिल के मुफ्त वितरण के लिए समय समय पर मेला भी लगाती हैं.


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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जब अमेठी से 2014 का लोक सभा चुनाव हारी थीं तो कहा था कि वह गांधी परिवार के गढ़ से मैदान छोड़ कर नहीं भागेंगी. फ़िर तो वो अमेठी की ही होकर रह गईं. उन्होंने ना सिर्फ 2019 के लोक सभा चुनावों में युवराज राहुल गांधी को शिकस्त दी बल्कि अमेठी की जनता को जता दिया कि अब वो मैदान छोड़ कर कभी नहीं भागने वाली हैं. स्मृति ईरानी अक्सर कहती हैं कि उन्होंने क्षेत्रः की जनता को किया हर वायदा पूरा किया है. स्मृति की पहल से अमेठी बाइपास रोड का काम चल रहा है और साथ ही उन्होंने अमेठी में एक मेडिकल कॉलेज और सैनिक स्कूल बनाने का बीड़ा भी उठा लिया है.

अब स्मृति ईरानी अमेठी की दीदी बन चुकी हैं. चाहे समाज कल्याण के काम हों या फिर किसी के साथ हो रहा अन्याय, स्मृति ईरानी आनन फानन में उनकी भलाई के लिए मैदान में कूदने में कोई कोताही नहीं बरतती हैं. स्मृति ईरानी जो अब तक अमेठी में किराये के मकान में रह रही थीं, अब अमेठी में एक जमीन खरीदी है. स्मृति वहां अपना घर बनाएंगी और अमेठी उनका स्थायी निवास बन जाएगा. इसके भूमि पूजन में पूरे अमेठी की जनता को न्योता भेजा गया था. तभी तो स्मृति ईरानी बार बार राहुल गांधी की चुटकी लेते हुए कहती हैं कि इतिहास गवाह है कि अब तक अमेठी के किसी भी सांसद ने यहां अपना घर नहीं बनवाया और ना यहां रहा. लेकिन वो यहां की जनता का साथ नहीं छोड़ने वाली हैं.

Tags: BJP, Smriti Irani, Union Minister, अमेठी

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