चीन से सीमा विवाद के बीच इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल कर मंगाई गईं हैमर मिसाइलें

चीन से सीमा विवाद के बीच इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल कर मंगाई गईं हैमर मिसाइलें
HAMMER एक मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

INDIA-CHINA STANDOFF: दुनिया के सबसे शानदार लड़ाकू विमानों में से राफेल (Rafale) की मारक क्षमता हैमर (HAMMER) मिसाइल के साथ और भी घातक हो जाएगी. ये मिसाइल 60 से 70 किमी की दूरी तक किसी भी तरह के लक्ष्य पर निशाना लगाने में सक्षम हैं.

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 नई दिल्ली. चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद (Border Dispute with China) के बीच मोदी सरकार (Modi Government) ने इमरजेंसी पावर (Emergency Powers) का इस्तेमाल कर फ्रांस से हैमर (HAMMAR) मिसाइलें मंगवाई हैं. इन मिसाइलों की पहले खेप आगामी 29 जुलाई को भारत पहुंच जाएगी. इन मिसाइलों को राफेल विमानों में लगाया जाएगा. दुनिया के सबसे शानदार लड़ाकू विमानों में से एक राफेल की मारक क्षमता हैमर मिसाइल के साथ और भी घातक हो जाएगी. ये मिसाइल 60 से 70 किमी की दूरी तक किसी भी तरह के लक्ष्य पर निशाना लगाने में सक्षम हैं.

समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि हैमर मिसाइलों के भारतीय बेड़े में शामिल होने के बाद किसी भी तरह के बंकर पर निशाना लगाने की क्षमता और भी ज्यादा बढ़ जाएगी. HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) एक मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है जिसे फ्रेंच एयरफोर्स और नेवी के इस्तेमाल के लिए बनाया गया था.

इससे पहले खबर आई थी कि अब पूर्वी लद्दाख बॉर्डर के लिए सेनाएं इजरायल से हेरॉन सर्विलांस ड्रोन (Heron drones) और स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (Spike anti-tank guided missiles) खरीदेंगी. अन्मैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) का इस्तेमाल तीनों भारतीय सेनाओं द्वारा पहले से भी किया जा रहा है.



हेरॉन ड्रोन
वर्तमान स्थितियों को देखते हुए हेरॉन यूएवी की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है. इसी वजह से और ज्यादा संख्या में हेरॉन यूएवी का ऑर्डर देने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि यह नहीं बताया गया कि कुल कितने हेरॉन मंगाए जाएंगे.

दूसरी तरफ आर्मी भी इजरायल से स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने पर विचार कर रही है. इन मिसाइलों की एक खेप भारत के पास बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भी आई थी. पिछली बार सेना को 12 लॉन्चर और 200 स्पाइक मिसाइलें मिली थीं. सूत्रों का कहना है कि अब हम एंटी टैंक मिसाइल की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. इस बीच DRDO भी पोर्टेबेल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल तैयार कर रहा है. कहा जा रहा है कि डीआडीओ के इस प्रोजेक्ट के जरिए सेना को बल्क में ये मिसाइल सप्लाई करने में आसानी होगी. इसके अलावा सेना की तरफ से पहले ही स्पाइस 2000 बम खरीदे जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है.
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