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Farmer's Protest: किसानों के आंदोलन के बावजूद कृषि कानून वापस लेने या बदलने को तैयार नहीं सरकार: सूत्र

farmers protest: कृषि कानून के विरोध में किसानों का 26 से 28 नवंबर तक दिल्ली चलो आंदोलन है.

farmers protest: कृषि कानून के विरोध में किसानों का 26 से 28 नवंबर तक दिल्ली चलो आंदोलन है.

Farmers Protests: केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि कृषि कानून को किसी भी कीमत पर न तो वापस लिया जाएगा और न ही उसमें को ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. कृषि कानून (Farms Law 2020) के विरोध में किसानों का 26 से 28 नवंबर तक 'दिल्ली चलो' (Delhi Chalo March) आंदोलन है. पंजाब और हरियाणा से हजारों की तादाद में किसान (Farmers Protest) दिल्ली की ओर निकले हैं. इस बीच केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर कृषि कानून को न तो वापस लिया जाएगा और न ही उसमें कोई फेरबदल किया जाएगा. सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक, सरकार की तरफ से ये साफ कर दिया गया है कि जो कानून बनाया गया है, वो किसानों के हित में है.

दिल्ली में किसानों के आंदोलन को लेकर दिल्ली हरियाणा सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर पर पुलिस फोर्स के अलावा CRPF की 3 बटालियन तैनात की गई हैं. पुलिस के मुताबिक, आने-जाने वाले हर वाहन पर नजर रखी जा रही है. होमगार्ड के जवान भी तैनात हैं. सीनियर अफसर लगातार दौरा कर रहे हैं. हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. किसानों रैली को देखते हुए दिल्ली-NCR में मेट्रो दोपहर 2 बजे तक बंद कर दी गई है.

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एक लाख किसानों के जुटने का दावा
कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के सैकड़ों किसान हरियाणा सीमा में प्रवेश कर गए हैं. हरियाणा सरकार ने पंजाब बॉर्डर सील कर दिया है. किसान संगठन का दावा है कि गुरुवार को यहां सीमा पर 1 लाख से ज्यादा किसान जुटेंगे. बुधवार को चंडीगढ़-दिल्ली हाईवे पर 15 किमी लंबा जाम लग गया. अंबाला हाईवे पर इकट्ठा हुए राज्य के किसानों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने उन पर पानी की बौछार भी की. यहां गुस्साए किसानों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए. ऐसे में एहतियातन धारा 144 लगा दी गई है और 100 से ज्यादा किसान नेता हिरासत में लिए गए हैं.

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नेशनल हाईवे-52 किया गया सील
हरियाणा सरकार ने जींद से लगे नेशनल हाईवे-52 को सील कर दिया. सड़क पर 5 फुट ऊंचे पत्थर और कंटीले तार से बैरिकेडिंग की गई है. हरियाणा के डीआईजी ओपी नरवाल बताया कि पंजाब- हरियाणा को जोड़ने वाले सभी 8 रास्तों को सील कर दिया गया है. 2 हजार पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं. किसी भी हालात में किसानों को हरियाणा में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा.

संसद ने किसानों के लिए 3 नए कानून बनाए हैं:-
कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020: इसमें सरकार कह रही है कि वह किसानों की उपज को बेचने के लिए विकल्प को बढ़ाना चाहती है. किसान इस कानून के जरिये अब एपीएमसी मंडियों के बाहर भी अपनी उपज को ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे. निजी खरीदारों से बेहतर दाम प्राप्त कर पाएंगे. लेकिन, सरकार ने इस कानून के जरिये एपीएमसी मंडियों को एक सीमा में बांध दिया है. इसके जरिये बड़े कॉरपोरेट खरीदारों को खुली छूट दी गई है. बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी कानून के दायरे में आए हुए वे किसानों की उपज खरीद-बेच सकते हैं.

कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020: इस कानून के संदर्भ में सरकार का कहना है कि वह किसानों और निजी कंपनियों के बीच में समझौते वाली खेती का रास्ता खोल रही है. इसे सामान्य भाषा में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कहते है. आप की जमीन को एक निश्चित राशि पर एक पूंजीपति या ठेकेदार किराये पर लेगा और अपने हिसाब से फसल का उत्पादन कर बाजार में बेचेगा. किसान इस कानून का पुरजोर विरोध कर रहे हैं.

आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020: यह न सिर्फ किसानों के लिए बल्कि आम जन के लिए भी खतरनाक है. अब कृषि उपज जुटाने की कोई सीमा नहीं होगी. उपज जमा करने के लिए निजी निवेश को छूट होगी. सरकार को पता नहीं चलेगा कि किसके पास कितना स्टॉक है और कहां है? खुली छूट. यह तो जमाखोरी और कालाबाजारी को कानूनी मान्यता देने जैसा है. सरकार कानून में साफ लिखती है कि वह सिर्फ युद्ध या भुखमरी या किसी बहुत विषम परिस्थिति में रेगुलेट करेगी. सिर्फ दो कैटेगोरी में 50% (होर्टिकल्चर) और 100% (नॉन-पेरिशबल) के दाम बढ़ने पर रेगुलेट करेगी नहीं, बल्कि कर सकती है कि बात कही गई है.

Tags: Agricultural Law, Farmers Protest

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