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Kisaan Andolan: कृषि कानून नहीं लिया जाएगा वापस, किसानों से सरकार की इन मुद्दों पर हो सकती है बात

केंद्र के तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में तो प्रदर्शन पहले से चल रहा था, लेकिन 6 दिन पहले पंजाब-हरियाणा के किसानों ने दिल्ली कूच कर दिया.
केंद्र के तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में तो प्रदर्शन पहले से चल रहा था, लेकिन 6 दिन पहले पंजाब-हरियाणा के किसानों ने दिल्ली कूच कर दिया.

Kisaan Andolan: केंद्र के तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में तो प्रदर्शन पहले से चल रहा था, लेकिन 6 दिन पहले पंजाब-हरियाणा के किसानों ने दिल्ली कूच कर दिया. पुलिस ने उन्हें बॉर्डर पर ही रोक दिया. सरकार ने किसानों से कहा कि वे प्रदर्शन खत्म कर बुराड़ी आ जाएं तो बातचीत पहले भी हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 11:13 PM IST
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Farmers Protest Latest Updates: केंद्र के नए कृषि कानूनों (New Agriculture Law) के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज छठा दिन है. किसान अपनी मांगों पर डटे हुए हैं. इस बीच सरकार भी एक्टिव मोड में आ गई है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने किसानों को दोपहर 3 बजे बातचीत के लिए बुलाया है. सरकार की ओर से इसकी अगुवाई रक्षामंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. इससे पहले सरकार के मंत्री एक अलग मीटिंग कर रहे हैं. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर हो रही मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद हैं. इसमें किसानों से बातचीत को लेकर रणनीति बनाई जा रही है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक सरकार किसी भी कीमत पर नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी.

Farmer Protest: किसानों ने दी चेतावनी, 3 बजे फैसला नहीं हुआ तो बैरिकेड तोड़कर जंतर मंतर जाएंगे

सिंघु बॉर्डर 32 साल बाद सबसे बड़े किसान आंदोलन का गवाह बना है. 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के 5 लाख किसान यहां पर जुटे थे. किसानों ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह जब तक हमारी बात नहीं सुनते तब तक आंदोलन चलेगा. सरकार नहीं मानी तो और कड़ा कदम उठाएंगे. सरकार को हमारी बात माननी ही पड़ेगी. यह ऐतिहासिक लड़ाई है. हम लंबी लड़ाई के लिए आए हैं. कृषि क़ानून नहीं बदला तो सरकार का तख़्ता पलट देंगे.




आइए जानते हैं कि किसानों के साथ सरकार की बातचीत में किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा:-
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के मुताबिक, उनकी अहम मांगों में से एक है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर ख़रीद को अपराध घोषित करे. एमएसपी पर सरकारी ख़रीद लागू रहे. इसपर मीटिंग में चर्चा हो सकती है. हालांकि, एमएसपी पर प्रधानमंत्री मोदी कह चुके हैं कि नए कृषि कानून आने के बाद भी MSP की व्यवस्था जारी रहेगी, सरकारी ख़रीद जारी रहेगी. हम यहां अपने किसानों की सेवा के लिए हैं.
आज की मीटिंग में बीजेपी अपने शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से MSP-मंडी के मुद्दे पर भरोसा दिलवाएगी. इसके अलावा सरकार स्पष्ट कर सकती है कि कानून वापस नहीं होंगे, लेकिन किसी कमेटी का गठन हो सकता है.
पीएम मोदी के अलावा बीजेपी के बड़े नेता, केंद्र सरकार में मंत्रियों द्वारा बीते दिन सोशल मीडिया पर लगातार कृषि कानूनों के फायदे गिनाए गए और इन्हें ऐतिहासिक कदम करार दिया गया. इससे साफ है कि सरकार जिस तरह नए कृषि कानूनों का गुणगान कर रही है, उसे वापस तो कतई नहीं लिया जाएगा.
बातचीत से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि चर्चा सड़क पर नहीं हो सकती है, जब बात होगी तो हर विषय पर होगी. सरकार ने पहले भी किसानों से बात की है, फिर एक बार बिना किसी झिझक के मंथन होगा.
इस मीटिंग में सरकार की कोशिश रहेगी कि किसान सड़कों से हटें और बुराड़ी के एक ग्राउंड में आ जाएं. किसान अब तक ऐसा करने से इनकार कर रहे हैं. अब सरकार की ओर से राजनाथ सिंह किसानों से बात करेंगे. राजनाथ सिंह की छवि किसान नेता की रही है और हर संगठनों में उनके प्रति एक सम्मान है, ऐसे मुश्किल समय में सरकार ने उनको ही मैदान में आगे किया है.
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा- किसान संगठन आज सरकार से बातचीत करने के लिए दोपहर 3 बजे विज्ञान भवन जाएंगे. वहां बातचीत में किसानों के हक में जो भी फैसला होगा, उसे हम सब मानेंगे.
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