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अब मूल मुस्लिम आबादी की पहचान करेगी असम सरकार, जल्द होगा सर्वे

News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 1:55 PM IST
अब मूल मुस्लिम आबादी की पहचान करेगी असम सरकार, जल्द होगा सर्वे
असम में कुल 1.3 करोड़ मुस्लिम आबादी है, जिनमें से करीब 90 लाख बांग्लादेशी मूल के हैं.

असम सरकार (Assam Government) की इस योजना के तहत ये सर्वे चार समुदाय के लोगों की पहचान करने के लिए है. यह चार सुमदाय हैं गोरिया, मोरिया, देसी और जोलाह. इन्हें राज्य का मूल निवासी माना जाता है.

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  • Last Updated: February 10, 2020, 1:55 PM IST
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गुवाहाटी. असम में नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. इस बीच असम में मूल मुस्लिम आबादी (Muslim Population) की पहचान करने और उन्हें बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों से अलग करने की कवायद तेज हो गई है. इसके तहत राज्य सरकार एक सर्वे कराने की योजना बना रहा है.

असम सरकार की इस योजना के तहत ये सर्वे चार समुदाय के लोगों की पहचान करने के लिए है. यह चार सुमदाय हैं गोरिया, मोरिया, देसी और जोलाह. इन्हें राज्य का मूल निवासी माना जाता है. असम के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रंजीत दत्ता ने चार समुदायों के विभिन्न संगठनों और अन्य पक्षकारों की मंगलवार को एक बैठक बुलाई है. इसमें इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा.

असम में 1.3 करोड़ मुस्लिम आबादी
असम अल्पसंख्यक विकास बोर्ड के अध्यक्ष मूमिनुल ओवाल ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से कहा,‘असम में कुल 1.3 करोड़ मुस्लिम आबादी है, जिनमें से करीब 90 लाख बांग्लादेशी मूल के हैं. शेष 40 लाख विभिन्न जनजातियों से हैं. उनकी पहचान करना जरूरी है.’


मूमिनुल ओवाल ने कहा कि बिना सही पहचान के मूल मुस्लिम आबादी को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं रहा है. उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) में बांग्लादेशी मूल के लाखों लोग शामिल हैं, इसलिए हम इस पर भरोसा नहीं कर सकते. अगर हमने अब कुछ नहीं किया तो एक दिन असम से सभी मूल जनजातियां सामाप्त हो जाएगीं.’


इसलिए जरूरी है सर्वेओवाल ने कहा,‘एक बार मूल जनजाति की आधिकारिक पहचान हो जाए, तो इन लोगों के विकास के लिए काम करना आसान हो जाएगा. मैंने इन जनजातियों के प्रतिनिधियों के तौर पर 2015 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी.' उन्होंने कहा कि मूल समूहों ने ही राजनाथ सिंह से इस तरह का सर्वे कराने की मांग की थी.

NRC NEW
असम में 31 अगस्त 2019 को एनआरसी की फाइनल लिस्ट आई थी.


कैसे होगा सर्वे?
ये सर्वे किस तरह से होगा? इस सवाल के जवाब में ओवाल ने कहा,‘हम राज्य सरकार से भारत के महा पंजीयक (RGI) की अनुमति लेने का अनुरोध करेंगे. आरजीआई की अनुमति के बगैर निष्कर्ष कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा.’

बता दें कि असम में नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर पहले से ही प्रदर्शन हो रहे हैं. बीते दिनों हुए हिंसक प्रदर्शन के कारण पीएम मोदी को जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ असम के गुवाहाटी में होने वाला शिखर सम्मेलन कैंसिल करना पड़ा था. अब स्वदेशी मुस्लिम आबादी की पहचान करने के लिए होने वाले सर्वे को लेकर भी लोगों को आक्रोश फैल सकता है.

कब आई थी NRC की फाइनल लिस्ट
असम की नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) की फाइनल लिस्ट 31 अगस्त 2019 को ऑनलाइन जारी की गई थी. एनआरसी की फाइनल लिस्ट में 19 लाख से ज्यादा लोगों को बाहर रखा गया है. असम में एनआरसी में शामिल होने के लिए 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन किया था. फाइनल लिस्ट से 19,06,657 लोगों को निकाल दिया गया जबकि 3,11,21,004 लोगों को भारतीय नागरिक बताया गया था. (PTI इनपुट)

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First published: February 10, 2020, 1:45 PM IST
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