क्या BSP के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले का मतलब यूपी में महागठबंधन का अंत है?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें बीएसपी के विधानसभा उप-चुनाव लड़ने के बारे में कोई जानकारी नहीं है और अगर बीजेपी को हराना है तो जमीन पर काम करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है.


Updated: June 3, 2019, 10:10 PM IST
क्या BSP के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले का मतलब यूपी में महागठबंधन का अंत है?
SP से ब्रेकअप की खबरों के बीच BSP ने विधानसभा उप-चुनाव में अकेले उतरने का फैसला किया

Updated: June 3, 2019, 10:10 PM IST
(काजी फराज अहमद)

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने उप-चुनाव न लड़ने की अपनी दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों पर होने वाले उप-चुनाव लड़ने का फैसला किया है. ये सीटें यहां के विधायकों के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई हैं. यह निर्णय कथित तौर पर सोमवार को दिल्ली में बीएसपी प्रमुख द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में लिया गया. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि बीएसपी इन सभी 11 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेगी या फिर अपनी गठबंधन सहयोगी एसपी के साथ सीटें साझा करेगी.

बीएसपी के शीर्ष सूत्रों का दावा है कि बीएसपी प्रमुख ने पार्टी के नेताओं से उप-चुनाव लड़ने की तैयारी करने के लिए कहा है. सूत्रों ने यह भी दावा है कि मायावती ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और संरक्षक मुलायम सिंह यादव के प्रयासों की प्रशंसा की.

हालांकि बीएसपी प्रमुख ने कथित तौर पर मुलायम सिंह के भाई शिवपाल पर चुनावों के दौरान गड़बड़ करने और कम से कम तीन लोकसभा सीटों में यादव समुदाय के वोट बीजेपी को ट्रांसफर करने का आरोप लगाया.

इस बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव जो सोमवार को अपनी संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में थे, उन्होंने कहा कि उन्हें बीएसपी के विधानसभा उप-चुनाव लड़ने के बारे में कोई जानकारी नहीं है और अगर बीजेपी को हराना है तो जमीन पर काम करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा, "बीजेपी को हराने का एक ही तरीका है और वह है जमीन पर काम करना. मुझे बीएसपी के फैसले के बारे में कोई जानकारी नहीं है, फिलहाल मैं आजमगढ़ में हूं और अपने लोगों से मिल रहा हूं."

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लोकसभा चुनाव के एक हफ्ते बाद बीएसपी प्रमुख मायावती ने अपने प्रदर्शन का जायजा लेने के लिए दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई थी. सूत्रों के मुताबिक बसपा सुप्रीमो ने स्वीकार किया कि उन्हें एसपी से वोट ट्रांसफर की उम्मीद नहीं थी और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव और उनके चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव सहित कई सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवारों की हार की मुख्य वजह यही थी.
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इससे पहले, बीएसपी सुप्रीमो ने व्हिप जारी करके छह राज्यों उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, ओडिशा, गुजरात और राजस्थान के प्रभारियों को हटा दिया, दिल्ली और मध्य प्रदेश के अध्यक्षों को भी हटा दिया गया है.

लोकसभा चुनाव में बीएसपी ने चुनाव से पहले एसपी तथा आरएलडी के साथ गठबंधन किया था और 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.

समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा वहीं तीन सीटें आरएलडी को दी गईं. अमेठी और रायबरेली की दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ी गईं थी. हालांकि बीजेपी के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा ये गठबंधन बेअसर रहा और बीएसपी 10 जबकि एसपी मात्र पांच सीटें जीतने में ही कामयाब हो पाई.

वहीं आरएलडी के खाते में एक भी सीट नहीं आई और अमेठी और रायबरेली जो दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी गईं थी, उनमें से अमेठी बीजेपी ने झटक ली.

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First published: June 3, 2019, 9:58 PM IST
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