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जानिए क्यों तुर्की से न्यूक्लियर हथियारों के लिए समझौता कराना चाहते हैं पाक आतंकी

नीतीश कुमार | News18Hindi
Updated: October 21, 2019, 3:34 PM IST
जानिए क्यों तुर्की से न्यूक्लियर हथियारों के लिए समझौता कराना चाहते हैं पाक आतंकी
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन

तुर्की परमाणु बम (Nuclear Bomb) और हथियारों के लिए बड़े पैमाने पर ट्रिगर मैकेनिज्म बनाता है. तुर्की अपने सामान को बेचने के लिए पाकिस्तान को एक बड़े बाजार के तौर पर देखता है. इसके साथ ही तुर्की बदलते वैश्विक हालात के बीच पाकिस्तान (Pakistan) से परमाणु बम भी हासिल करना चाहता है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकी इस मौके का फायदा उठाना चाह रहे हैं.

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  • Last Updated: October 21, 2019, 3:34 PM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से आर्टिकल 370 हटाये जाने से बौखलाए पाकिस्तान के आतंकी समूह (Terrorist Group) भारत में नफरत फैलाने के लिए नई साजिश रच रहे हैं. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ये आतंकी समूह इमरान सरकार (Imran Khan Government) पर तुर्की से परमाणु हथियारों की डिलिवरी सिस्टम और ट्रिगर मैकेनिज्म के लिए समझौते का  दबाव बना रहे हैं. मोटे तौर पर समझा जा सकता है कि डिलिवरी सिस्टम परमाणु हथियारों को लक्ष्य तक पहुंचाने और ट्रिगर मैकेनिज्म उसमें विस्फोट कराने के काम में आता है. कश्मीर मुद्दे पर तुर्की लगातार अपने दोस्त पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है. जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए- तैयब जैसे आतंकी संगठन चाहते हैं कि पाकिस्तान सरकार तुर्की से टैक्टिकल परमाणु हथियार की टेक्नॉलॉजी लेकर भारत पर बड़े हमले करे.

कश्मीर पर पाकिस्तान को तुर्की के समर्थन का क्या है राज़?
दरअसल, तुर्की परमाणु बम और हथियारों के लिए बड़े पैमाने पर ट्रिगर मैकेनिज्म बनाता है. तुर्की अपने सामान को बेचने के लिए पाकिस्तान को एक बड़े बाजार के तौर पर देखता है. इसके साथ ही तुर्की बदलते वैश्विक हालात के बीच पाकिस्तान से परमाणु बम भी हासिल करना चाहता है.

इस सिलसिले में तुर्की के एक्सपर्ट्स पिछले साल पाकिस्तान के परमाणु साइट का दौरा कर चुके हैं. तुर्की परमाणु ट्रिगर सिस्टम को पाकिस्तान को जल्द से जल्द बेचने के लिए उसके साथ एक समझौता करना चाहता है. इसी मकसद से तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) 23 अक्टूबर को पाकिस्तान के दौरे पर आ रहे हैं.

हाफिज सईद कर रहा लॉबिंग
उधर, लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठन भी इमरान सरकार पर दबाब बना रहे हैं कि वो तुर्की से परमाणु समझौता कर लें और तुर्की को पाकिस्तान में परमाणु डिलिवरी की कई यूनिट्स लगाने को बोले. इसके लिए खास तौर से हाफिज सईद ज्यादा लॉबिंग कर रहा है. हाफिज सईद समेत दूसरे आतंकी समूह चाहती हैं कि इस डील से कम रेंज के परमाणु हथियार, डिलीवरी सिस्टम और ट्रिगर सिस्टम उनके हाथ लग जाए.

IMRAN KHANN
इमरान खान

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दरअसल, चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) में चीन ने 912 मिलियन डॉलर की लागत से चीन पाकिस्तान टेक्निकल और वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीटूट नाम से एक न्यूक्लियर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट बनाया है. वहां जेहादी विचारधारा और आतंकी संगठनों से जुड़े कई लोग ट्रेनिंग कर रहे हैं.

अगर तुर्की पाक में न्यूक्लियर डिलीवरी और ट्रिगर सिस्टम की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाता है, तो आतंकी समूह वहां अपने लोगों को ट्रेनिंग करवाकर न्यूक्लियर डिलीवरी और ट्रिगर सिस्टम बनाना सीख सकते हैं. इससे उन्हें टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार हासिल करने में आसानी होगी. कश्मीर के मसले पर पाक को तुर्की के समर्थन के पीछे की भी ये बड़ी वजह है.

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First published: October 21, 2019, 1:21 PM IST
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