मुस्लिमों को नागरिकता संशोधन बिल में क्यों नहीं किया गया शामिल? अमित शाह ने बताई ये वजह

मुस्लिमों को नागरिकता संशोधन बिल में क्यों नहीं किया गया शामिल? अमित शाह ने बताई ये वजह
विपक्ष ने जब नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पर सवाल उठाए तो अमित शाह ने कांग्रेस पर सीधा हमला कर दिया.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने लोकसभा (Lok Sabha) में नागरिकता संशोधन बिल 2019 (Citizen Amendment Bill 2019) को पेश करने के बाद कहा कि कांग्रेस (Congress) ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा किया. अगर तब ऐसा नहीं हुआ होता तो आज हमें ये नहीं करना पड़ता. साथ ही कहा कि इस बिल में संविधान (Constitution) की मूल भावना से छेड़छाड़ नहीं की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 9, 2019, 3:01 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने आज लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizen Amendment Bill 2019) पेश किया. इस पर विपक्ष ने जबरदस्‍त हंगामा करना शुरू कर दिया. पहले तो इसी बात पर बहस होती रही कि इस विधेयक को निचले सदन में पेश किया जा सकता है या नहीं. इसके बाद जब विपक्ष ने बिल के अल्पसंख्यक विरोधी (Anti Minority) होने का आरोप लगाया तो शाह ने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए बंटवारे का जिक्र कर डाला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस (Congress) ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा (Partition) किया. अगर तब ऐसा नहीं किया गया होता तो आज हमें यह नहीं करना पड़ता.

पड़ोसी देशों में मुसलमानों पर नहीं होती धार्मिक प्रताड़ना
शाह ने कहा कि पड़ोसी देशों में मुसलमानों (Muslims) के खिलाफ धार्मिक प्रताड़ना (Religious Persecution) नहीं होती है. इसलिए इस बिल का फायदा उन्हें नहीं मिलेगा. अगर ऐसा हुआ तो यह देश उन्हें भी इसका फायदा देने पर विचार करेगा. साथ ही दावा किया कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है. विपक्ष ने कहा कि ऐसे बिल पर सदन में चर्चा हो ही नहीं सकती. कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा कि संसद को ऐसे विधेयक पर चर्चा का अधिकार नहीं है. यह भारतीय गणतंत्र के मूलभूत मूल्यों का उल्लंघन है. क्या हमारी राष्ट्रीयता का निर्णय धर्म के आधार पर होगा? यह संविधान की प्रस्तावना का भी उल्लंघन करता है.

कांग्रेस-टीएमसी ने बिल को बताया संविधान के खिलाफ
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chaudhary) ने विधेयक को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि सरकार आर्टिकल-14 को नजरअंदाज कर रही है. यह हमारे लोकतंत्र का ढांचा है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत राय ने कहा, 'संविधान का अनुच्छेद-14 कहता है कि राज्य (State) भारत में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा. ये बिल नेहरू-अंबेडकर की सोच के भारत के खिलाफ है. एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता (Secularism) इस देश के मूलभूत ढांचे का हिस्सा है. यह विधेयक मौलिक अधिकारों का उल्‍लंघन करता है.



अमित शाह ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक का जिक्र किया.


शाह ने पलटवार करते हुए इंदिरा गांधी का किया जिक्र
अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि सदन के नियम 72(1) के हिसाब से यह बिल किसी भी आर्टिकल का उल्लंघन नहीं करता है. अनुच्छेद-11 को पूरा पढ़िए. कुछ सदस्यों को लगता है कि इस बिल से समानता के अधिकार का उल्लंघन होता है. पूर्व पीएम इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने 1971 में निर्णय किया था कि बांग्लादेश (Bangladesh) से आए लोगों को भारत की नागरिकता दी जाए तो पाकिस्तान (Pakistan) से आए लोगों के साथ ऐसा क्‍यों नहीं किया गया. उसके बाद युगांडा से आए सारे लोगों को कांग्रेस के शासन में नागरिकता दी गई. तब इंग्लैंड से आए लोगों को क्यों नहीं दी गई? फिर दंडकारण्य कानून लाकर नागरिकता दी गई. उसके बाद राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ने असम समझौता किया. उसमें भी 1971 की ही कट ऑफ डेट रखी तो क्या समानता हो पाई? हर बार तार्किक वर्गीकरण के आधार पर ही नागरिकता दी जाती रही है.

'सभी देश अलग-अलग आधार पर देते हैं नागरिकता'
गृह मंत्री शाह ने कहा कि दुनियाभर के देश अलग-अलग आधार पर नागरिकता देते हैं. जब कोई देश कहता है कि उसके देश में निवेश करने वाले व्‍यक्ति को नागरिकता देगा तो क्या वहां समानता का संरक्षण हो पाता है? अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकार कैसे होंगे? वहां समानता का कानून कहां चला जाता है? क्या अल्पसंख्यकों को अपना शैक्षणिक संस्थान चलाने का अधिकार समानता के कानून के खिलाफ है? भारत की सीमा से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान सटे हैं. भारत की 106 किमी जमीनी सीमा अफगानिस्तान से मिलती है. इसलिए उसे भी शामिल करना जरूरी था.

'बिल तैयार करते समय पड़ोसी देशों के संविधान को भी देखा'
अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक का आधार सिर्फ भौगोलिक नहीं है. हमें इन तीनों देशों के संविधान को भी देखना होगा. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान के संविधान के मुताबिक इस्लाम राज्य का धर्म है. पाकिस्तान का संविधान कहता है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान का धर्म इस्लाम है. वहीं, बांग्लादेश का संविधान भी इस्लाम को राज्य का धर्म बताता है. 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ. दोनों देशों ने अपने अल्पसंख्यकों के संरक्षण का संकल्प लिया. भारत में इसका गंभीरता से पालन हुआ, लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हुए जुल्म को पूरी दुनिया ने देखा.

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