हरियाणा विधानसभा चुनाव के शंखनाद के लिए जींद चुनने के पीछे आखिर क्या है शाह की रणनीति?

Kinshuk Praval | News18Hindi
Updated: August 16, 2019, 4:14 PM IST
हरियाणा विधानसभा चुनाव के शंखनाद के लिए जींद चुनने के पीछे आखिर क्या है शाह की रणनीति?
विधानसभा के महाभारत में जीत हासिल करने के लिए जींद के ‘कुरुक्षेत्र’ में गृह मंत्री अमित शाह ने आस्था रैली की है

विधानसभा के 'महाभारत' में जीत हासिल करने के लिए जींद के ‘कुरुक्षेत्र’ में गृह मंत्री अमित शाह ने आस्था रैली की है

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इस साल हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है. बीजेपी ने हरियाणा में 75+ सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के जींद में रैली कर चुनाव का बिगुल फूंक दिया.  उन्होंने कहा कि जब वो पहली दफे जींद आए तो बीजेपी को 47 सीटें मिली थीं तो दूसरी बार जींद आने पर जीत के आंकड़े को 75 के पार पहुंचा दिया जाए. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि लोकसभा चुनाव में हरियाणा की दस सीटें जीतने वाली बीजेपी ने आखिर जींद से ही चुनावी आगाज़ क्यों किया?

चौधरी देवीलाल से मनोहर लाल तक कैसे बदला जींद?

हरियाणा की राजनीति के इतिहास में जींद का जलवा सबसे ज्यादा है. जींद हरियाणा की राजनीति की दशा-दिशा तय करता आया है. कहा जाता है कि हरियाणा की सत्ता का रास्ता जींद जिले से जाता है और इसकी मिसाल स्वर्गीय चौधरी देवीलाल हैं. स्वर्गीय चौधरी देवीलाल की कर्मभूमि रहा है जींद जहां उन्होंने साल 1986 में न्याय युद्ध का ऐलान कर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था. जींद से ही पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल की नींव पड़ी थी. स्वर्गीय चौधरी देवीलाल पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री तो बाद में देश के उप-प्रधानमंत्री बने.

जींद को इनेलो और कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. यहां मुख्य मुकाबला इनेलो और कांग्रेस के बीच ही रहा है . लेकिन साल 2014 से हालात बदले. अब चौधरी देवीलाल की जगह बीजेपी के मनोहर लाल का कमाल दिखने लगा. साढ़े चार साल के शासन में एंटी इंकंबेंसी लहर के दावों के बीच मनोहर लाल खट्टर जींद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी के लिए सीट निकालने में कामयाब रहे. अपनी पहली और बड़ी अग्निपरीक्षा में बीजेपी के इस 'लाल' ने करिश्मा कर दिखाया. बंजर माने जाने वाली जींद की जमीन पर पहली दफे कमल खिल गया. इसी के साथ ही जींद ने इनेलो-कांग्रेस की नींद उड़ाने का काम किया है. बीजेपी के उम्मीदवार कृष्ण मिड्डा यहां से विजयी हुए. जबकि दूसरे नंबर पर नवगठित जजपा के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला रहे. इस तरह हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले जींद से जीत का आगाज़ बीेजेपी के लिए शुभ  संकेत है.

इनेलो विधायक हरिचंद मिड्डा के निधन की वजह से जींद में उपुचनाव हुआ था जिसे यहां के राजनीतिक दलों ने साख का सवाल बना लिया था. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी, इनेलो, कांग्रेस और जजपा के बीच था. कांग्रेस के प्रवक्ता और कैथल से विधायक रहे रणदीप सुरजेवाला के जींद से चुनाव लड़ने से मुकाबला रोचक हो गया था. लेकिन बीजेपी की आंधी का दूसरी कोई पार्टी सामना नहीं कर सकी. बीजेपी में शामिल हो कर टिकट पाने वाले हरिचंद मिड्डा के बेटे कृष्ण मिड्डा जीत गारंटी शुरुआत में ही पक्की कर ली थी. जबकि सुरजेवाला का विधायक से विधायक बनने का सपना टूट गया.

जींद में कांग्रेस को मिली 5 बार जीत

पिछले 10 साल में जींद में इंडियन नेशनल लोकदल का ही दबदबा था. इनेलो के हरिचंद्र मिड्डा ने साल 2009 में कैबिनेट मंत्री मांगे राम गुप्ता को हराया था. इसके बाद साल 2014 में भी हरिचंद मिड्डा ने इनेलो से बीजेपी में आए सुरेंद्र बरवाला को हराकर दोबारा जींद सीट से चुनाव जीता था.
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जींद में अबतक 12 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं. कांग्रेस ने जिसमें पांच बार तो लोकदल-इनेलो ने चार बार जीत हासिल की है. जबकि एक-एक बार जींद की सीट हरियाणा विकास पार्टी और निर्दलीय विधायक के कब्जे में आई है.  कांग्रेस नेता मांगे राम गुप्ता जींद में सबसे ज्यादा चार बार जीत हासिल करने वाले कांग्रेस विधायक थे.

जींंद में जाति-समीकरण

जींद विधानसभा में जाट वोटर की संख्या ज्यादा है. यहां तकरीबन 48 हजार जाट वोटर हैं तो पंजाबी, वैश्य और ब्राह्मण वोटरों की संख्या 15 हज़ार के लगभग है. इसके बावजूद यहां ज्यादातर पंजाबी और वैश्य समुदाय से ही विधायक चुने गए.

जींद का महाभारत कनेक्शन

जींद का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है. जींद से महाभारत की कई कथाएं जुड़ी हुई हैं. वहीं पुराणों में भी जींद का उल्लेख किया गया है. वामन पुराण, नारद पुराण और पद्म पुराण में जीन्द का उल्लेख मिलता है. जींद को लेकर पौराणिक कथा कहती है कि महाभारत काल में पाण्डवों ने यहां पर विजय की देवी जयंती देवी के मन्दिर का निर्माण किया था और युद्ध में कौरवों को हराने के लिए उन्होंने इसी मन्दिर में पूजा की थी. देवी के नाम पर ही इस इलाके का नाम जयंतापुरी रखा गया था जो कि समय के साथ बदलकर जीन्द हो गया.

अब विधानसभा के 'महाभारत' में जीत हासिल करने के लिए जींद के ‘कुरुक्षेत्र’ में गृह मंत्री अमित शाह ने आस्था रैली कर जाटों के प्रति पार्टी की आस्था भी दिखाई है.  शाह ने जाट बहुल इलाके में पहली रैली कर जाटों को लुभाने की कोशिश की है ताकि ये संदेश जाए कि बीजेपी की रणनीति में जाटों की अहमियत गैर जाट सीएम बनने से कम नही हुई है. वैसे भी जींद की जमीन संकेतों की राजनीति के लिए ही जानी जाती है. चौधरी देवीलाल को जननायक बनाने वाली जींद की ज़मीन से ही उनके परपोते दुष्यंत और दिग्विजय सिंह ने इनेलो के ही खिलाफ नई पार्टी जननायक जनता पार्टी का एलान किया था. इस लिहाज़ से जींद के सियासी और जातिगत मायने बहुत हैं तभी गृह मंत्री अमित शाह ने जींद से ही चुनावी बिगुल बजाने का काम किया.

हालांकि, बीजेपी के लिए इस बार विधानसभा में मैदान साफ दिखाई दे रहा है. जहां कांग्रेस जींद जैसे गढ़ में हरियाणा के दिग्गज नेता रणदीप सुरजेवाला की हार देखकर बाकी राज्य में अपनी स्थिति का आंकलन कर चुकी है तो वहीं इंडियन नेशनल लोकदल के नेताओं में बीजेपी और जजपा जाने की होड़ मची हुई है. जाहिर तौर पर जजपा जहां इनेलो को कमज़ोर कर रही है तो वहीं कमजोर कांग्रेस को वापसी के लिए उम्मीद कम दिखाई दे रही है.

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First published: August 16, 2019, 2:43 PM IST
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