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कश्मीर पर बदलने वाली है मोदी सरकार की रणनीति, पहली मीटिंग में ही अमित शाह ने दिए संकेत

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर अमित शाह ने की अहम बैठक

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर अमित शाह ने की अहम बैठक

News18 को मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में कश्मीर से जुड़े मुद्दों की भी चर्चा की गई. बता दें कि बीते दिनों शाह ने राज्यपाल सत्यपाल मालिक से मुलाक़ात की थी, जिसके बार विधानसभा सीटों के परिसीमन की चर्चाएं सामने आयीं थीं.

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    राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गुरूवार को गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और गृह सचिव राजीव गाबा ने बैठक की. News18 को मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में कश्मीर से जुड़े मुद्दों की भी चर्चा की गई. बता दें कि बीते दिनों शाह ने राज्यपाल सत्यपाल मालिक से मुलाक़ात की थी, जिसके बार विधानसभा सीटों के परिसीमन की चर्चाएं सामने आयीं थीं. चुनाव आयोग ने भी कहा है कि इस साल के अंत तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं.

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मीटिंग का मुख्य मुद्दा आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा ही था. इसमें चर्चा की गई कि गृह मंत्रालय इन दोनों क्षेत्रों में सामने आ रही चुनौतियों का कैसे सामना करेगा. इस मीटिंग में भी कश्मीर अहम मुद्दा रहा और आगामी विधानसभा के दौरान सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई. कश्मीर में बर्फ पिघलने के मौसम के दौरान ही पाकिस्तान की तरफ से सबसे ज्यादा घुसपैठ देखी जाती है, इसके लिए अधिक सतर्कता बरतने का फैसला लिया गया. शाह ने इस मीटिंग में निर्देश दिया कि इस घुसपैठ को सिरे से ख़त्म करना बेहद ज़रूरी है.

    कश्मीर पर बदलेगी रणनीति
    बता दें कि पीडीपी के साथ गठबंधन में होने के चलते जम्मू कश्मीर में कट्टरपंथ के शिकार युवाओं के प्रति बीजेपी का रुख भी नरम और सुधारवादी था लेकिन अब अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद इसमें बदलाव होना तय माना जा रहा है. गौरतलब है कि बिश्केक में SCO (Shanghai Cooperation Organisation) समिट के दौरान भी पीएम नरेंद्र मोदी का पाकिस्तानी पीएम इमरान खान से मुलाक़ात न करना इसी बदली रणनीति की तरफ इशारा करता है.

    परिसीमन की बातचीत भी जारी
    पिछले दिनों ख़बरें आयीं थीं कि गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग के गठन पर विचार कर रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 1995 में परिसीमन किया गया था. 1995 में राज्यपाल जगमोहन के आदेश पर जम्मू-कश्मीर में 87 सीटों का गठन किया गया था.जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 111 सीटें हैं, लेकिन 24 सीटों को खाली रखा गया है. जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 47 के मुताबिक इन 24 सीटों को पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ गया है और बाकी बची 87 सीटों पर ही चुनाव होता है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर का अलग से भी संविधान है.

    जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुसार हर 10 साल के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाना चाहिए. ऐसे में राज्य में सीटों का परिसीमन 2005 में होना चाहिए था. लेकिन राज्य में 2002 में तत्कालीन फारुक अब्दुल्ला की सरकार ने इस पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी थी. अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू-कश्मीर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1957 और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बदलाव करते हुए यह फैसला लिया था.

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