अमित शाह के मिशन बंगाल का आगाज, दो दिन के दौरे में क्या छिपा है संदेश

पश्चिम बंगाल की परंपरा के अनुसार, अमित शाह ने जमीन पर बैठकर केले के पत्ते पर भोजन किया.
पश्चिम बंगाल की परंपरा के अनुसार, अमित शाह ने जमीन पर बैठकर केले के पत्ते पर भोजन किया.

अमित शाह (Amit Shah) के दो दिवसीय दौरे से स्पष्ट है कि बीजेपी (BJP) ने ममता सरकार (Mamata Government) के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है. बंगाल सरकार के खिलाफ इस सियासी जंग में बीजेपी अब तक उपेक्षित समुदायों के हक की लड़ाई लड़ेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 8:37 PM IST
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अमित शाह (Amit Shah) के दो दिवसीय दौरे से स्पष्ट है कि बीजेपी (BJP) ने ममता सरकार (Mamata Government) के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है. बंगाल सरकार के खिलाफ इस सियासी जंग में बीजेपी अब तक उपेक्षित समुदायों के हक की लड़ाई लड़ेगी.

बिहार की सीमा पर लगे बंगाल (Bengal) के बांकुरा जिले में देश के गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) उतरे तो साफ था कि बीजेपी (BJP) आलाकमान ममता सरकार (Mamata Government) से हर स्तर पर जंग लड़ने की तैयारी में लग चुका है. ये लड़ाई मुद्दों पर होगी और साथ ही ममता बनर्जी को घेरने के लिये समाज के उन तबकों को तरजीह दी जाएगी जो विकास की राह में पीछे छूट गए हैं या फिर वो समुदाय जिन्हें किसी न किसी कारण से अब तक नकारा जाता रहा है. अगर 2 दिनों की परत दर परत समीक्षा की जाए तो तस्वीर कुछ ऐसी निकलेगी.

बांकुरा के आदिवासी समाज से मिशन की शुरुआत
झारखंड़ और उसके पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती जिलों में आदिवासी बहुतायत में हैं. बिरसा मुंडा को इन इलाकों में भगवान माना जाता है. बिरसा मुंडा ने ही अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था. इसे इतिहासकारों ने उलगुलान यानी ग्रेट रिवोल्ट का नाम दिया था. इस इलाके का आदिवासी समाज आज भी अपनी कुर्बानियों के लिए याद किया जाता है. जाहिर है जब मिशन बंगाल के लिए बांकुरा जिले को चुना गया तो एक बड़ी जंग का ही ऐलान था.
आलम ये था कि अमित शाह के कार्यक्रम की भनक लगते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आदिवासियों के लिये जमीन के पट्टे देने का ऐलान कर दिया और अपनी सरकार को आदिवासियों का क्षुब्ध चिंतक भी बताया. लेकिन ये गृह मंत्री अमित शाह को अपनी राह से डिगा नहीं सका. बांकुरा पहुंचने के बाद अमित शाह ने सबसे पहले बिरसा मुंडा की मूर्ति पर माल्यार्पण किया.



कार्यक्रम में बीजेपी कार्यकर्ताओं समेत स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. फिर अमित शाह का काफिला निकल पड़ा गांव चतुरडीह की ओर. सड़क के दोनों ओर अमित शाह के काफिले को देखने के लिए लोगों की कतार लगी थी. इस गांव में शाह का आदिवासी नृत्य और संगीत के साथ स्वागत किया गया.

भोजन के लिए अमित शाह जब पालथी लगाकर बैठे तो पूरा आदिवासी परिवार उत्साह से भर उठा. पत्ते पर परोसे गए खाने का लुत्फ उठाने से अमित शाह पीछे नहीं रहे. लेकिन भावुक पल तब आया जब भोजन समाप्त होने के बाद घर की एक बुजुर्ग महिला ने अपने हाथों से अमित शाह का मुंह साफ किया. अमित शाह से जब न्यूज18 ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि इससे ये साबित होता है कि ये समाज और बंगाल की जनता उन्हें कितना प्यार करती है.

दक्षिणेश्वर मंदिर में शाह ने की पूजा
गृह मंत्री अमित शाह के मिशन बंगाल के दूसरे दिन की शुरुआत हुई दक्षिणेश्वर मंदिर से. रामकृष्ण मिशन से जुड़े इस मंदिर की अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत है. शाह का यहां आने का मकसद स्पष्ट है. बंगाल की जनता को सीधा संदेश देना कि उनकी हर विरासत और संस्कृति के प्रवाह को उसी रफ्तार से चलने दिया जाएगा.

मतुआ समाज के साथ भोजन
मतुआ समाज के साथ समय बिता कर बंगाल के उस समुदाय को संदेश दिया गया जो आजादी के इतने साल बाद भी मूलभूत अधिकारों से वंचित है. न्यूज़18 से खास बात में अमित शाह ने कहा कि बांग्लादेश से आये इन हिन्दू अल्पसंख्यकों को नागरिकता तक नहीं मिली है. बीजेपी उनको उचित अधिकार देगी.

एक अनुमान के मुताबिक बंगाल में मतुआ समुदाय की आबादी 2 से ढाई करोड़ है और ये 60 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर अपना प्रभाव छोड सकते हैं. इसका महत्व अमित शाह जानते हैं. तभी तो पहले आदिवासियों के साथ भोजन किया और फिर मतुआ समुदाय के साथ भोजन कर ये जता दिया कि अब तक उपेक्षित समुदायों को लेकर बीजेपी ने जंग की शुरुआत कर दी है.

बीजेपी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कवायद
अमित शाह जानते हैं कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा का दौर थमने वाला नहीं है. इसलिए बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बांकुरा और फिर कोलकाता में बैठक करके साफ कर दिया कि न झुकना है और ना ही थकना है. शाह ने सिर्फ 200 कार्यकर्ताओं के साथ घंटों समय बिताया.

अमित शाह ने न्यूज़18 को बताया कि बीजेपी का पूरा इतिहास ही कार्यकर्ताओं की कुर्बानियों से भरा पड़ा है और बंगाल में भी किसी भी हिंसा से बीजेपी नहीं डरेगी. शाह की ओर से ये एक शुरुआत थी, कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने की और उसे चुनाव तक कायम रखने की.

महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी सांसदों की मौजूदगी के बीच उमड़ी भीड़ देखकर तो यही लगा है कि मानो डर कमाने लगा है. साथ ही जनता तक ये संदेश पहुँचाने का काम भी कार्यकर्ताओं को सौंपा गया है कि ममता सरकार केंद्र की योजनाओं को अमल में नहीं ला रही है.

अमित शाह के मिशन बंगाल की शुरुआत हो गई है. शाह कहते हैं कि बीजेपी को बंगाल में दो तिहाई बहुमत मिलेगा क्योंकि जनता बदलाव का मन बना चुकी है. इसलिए एक निश्चित एजेंडे के साथ शुरुआत हुई है. जैसे-जैसे राजनीति गर्माएगी अमित शाह की तरकश से और तीर निकलेंगे जो इस अभियान को और गति देंगे.
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