दोबारा एक्‍शन में आए आईपीएस ऑफिसर अमिताभ गुप्ता, 900 दुकानों पर मारा छापा

इस कार्रवाई के दौरान करीब 80 मामले दर्ज किए गए. इनमें से ज्यादातर मामले महाराष्ट्र के नागपुर, मुंबई और पुणे के पाए गए.
इस कार्रवाई के दौरान करीब 80 मामले दर्ज किए गए. इनमें से ज्यादातर मामले महाराष्ट्र के नागपुर, मुंबई और पुणे के पाए गए.

इस कार्रवाई के दौरान करीब 80 मामले दर्ज किए गए. इनमें से ज्यादातर मामले महाराष्ट्र के नागपुर, मुंबई और पुणे के पाए गए.

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कोरोना वायरस महामारी के समय शानदार काम कर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ गुप्ता ने लोगों को ध्यान खींचा था. उन्‍होंने खासतौर पर उन शॉप्स और सर्विस प्रोवाइडर्स पर कार्रवाई की थी जो कोरोना महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का फायदा उठाकर एमआरपी से ज्यादा कीमतें लोगों से वसूल रहे थे. अब इस बार अमिताभ कुछ वास्तविक और वाजिब चीजों के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर के फिर से सुर्खियां बटोर रहे हैं. अमिताभ का इस बार का मामला 900 दुकानों पर छापा मारने के का है.

इस कार्रवाई के दौरान करीब 80 मामले दर्ज किए गए. इनमें से ज्यादातर मामले महाराष्ट्र के नागपुर, मुंबई और पुणे के पाए गए. अमिताभ गुप्ता ने बताया, "कोरोना वायरस आपदा के दौरान बहुत से ग्राहकों की शिकायतें मिली थीं. ज्यादातर का कहना था कि या तो उन्हें छला गया या लूटा गया. इसके जानकारी में आने के बाद खाद्य एवं नागरिक सेवा आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने मुझे इन मामलों को देखने का आदेश दिया ‌था." अमिताभ ने कहा कि इस महामारी के दौरान वाकई लोगों को बहुत ज्यादा लूटा गया है. बहुत ही ज्यादा कीमतें वसूली गई हैं.

इसके अलावा अमिताभ गुप्ता ने प्रवासी मजदूरों को उनके घर वापस भेजने में लगातार अपनी महती भूमिका अदा करते रहे हैं. उन्होंने मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में फंसे लोगों की मदद के लिए आगे आए. बता दें कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को उनके घर वापस पहुंचाने के लिए करीब 850 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन चलाई गईं. इनमें केवल महाराष्ट्र से करीब 12 लाख लोगों ने यात्रा की. इस दौरान उचित लोगों को ही उस ट्रेन तक पहुंचाने में आईपीएस अधिकारी गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.



इस मामले पर अमिताभ गुप्ता ने कहा, "श्रमिक एक्सप्रेस से करीब 1628 यात्रियों को कल भी मुंबई से पश्चिम बंगाला रवाना किया गया. हमें इन दिनों मजदूरों की ओर से भारी संख्या में आवेदन मिल रहे हैं. वो सभी अपने घर वापस जाना चाहते हैं. इसमें कोई दो राय नहीं कि आज भी बहुत से लोग फंसे हुए हैं. इसलिए हम और ज्यादा ट्रेन चलाने की मांग कर रहे हैं."
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