Assembly Banner 2021

क्या पश्चिम बंगाल में भी बिहार जैसा करिश्मा दिखाने में कामयाब होंगे असदुद्दीन ओवैसी

ओवैसी आज से चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे. (फाइल फोटो)

ओवैसी आज से चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे. (फाइल फोटो)

प्रचार अभियान (Election Campaign) की शुरुआत के लिए असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कोलकाता के अल्पसंख्यक प्रभाव वाले मटिया ब्रिज इलाके को चुना है. मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी और दक्षिणी दिनाजपुर जैसे अल्पसंख्यक प्रभाव वाले जिलों पर ओवैसी की भी निगाहें हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 6:38 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने जब पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने की घोषणा की थी तब इस खबर की खूब चर्चा हुई थी. दरअसल ये घोषणा बिहार विधानसभा चुनाव में मिली सफलता से उत्साहित ओवैसी ने की थी. ओवैसी को लेकर बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी (TMC) की तरफ से आरोप भी लगने शुरू हो गए. कहा जाने लगा कि ओवैसी राज्य में बीजेपी की बी-टीम बनकर आ रहे हैं. इस पर ओवैसी की तरफ से भी पलटवार हुए. लेकिन इस बीच लगातार ये कयासबाजी की जा रही है कि क्या ओवैसी बिहार वाली सफलता बंगाल में दोहरा पाएंगे.

ओवैसी आज से पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार अभियान का आगाज करेंगे. प्रचार अभियान की शुरुआत के लिए उन्होंने कोलकाता के अल्पसंख्यक प्रभाव वाले मटिया ब्रिज इलाके को चुना है. हालांकि उनकी यात्रा के पहले एक बेहद ध्रुवीकरण वाले चुनाव में एमआईएम के कार्यकर्ता अपनी पार्टी के लिए जगह तलाश कर रहे हैं.

Youtube Video




100 सीटों पर अल्पसंख्यक वोटर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में तकरीबन 100 पर अल्पसंख्यक वोटर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. पूरे राज्य में इस समुदाय की आबादी तकरीबन 30 प्रतिशत है. अब जबकि बीजेपी जबरदस्त प्रचार अभियान शुरू कर चुकी है, ऐसे में ममता को तीसरे टर्म के लिए अल्पसंख्यक वोटों की बेहद जरूरत है.

अब मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी और दक्षिणी दिनाजपुर जैसे अल्पसंख्यक प्रभाव वाले जिलों पर ओवैसी की भी निगाहें हैं. ओवैसी कह चुके हैं कि उनकी पार्टी फुरफुरा शरीफ पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के निर्णयों के हिसाब से चलेगी. अब्बाद सिद्दीकी का अच्छा-खासा प्रभाव दक्षिणी 24 परगना में है. दिलचस्प है कि अब्बास सिद्दीकी ममता के बड़े समर्थक रहे हैं लेकिन राजनीतिक पार्टी बनाने के बाद से वो लगातार टीएमसी को निशाने पर ले रहे हैं.

अब्बास सिद्दीकी के नए कदम के बाद क्या करेंगे ओवैसी
बीते सप्ताह एक बड़े घटनाक्रम में अब्बास सिद्दीकी ने सीपीएम और कांग्रेस से हाथ मिला लिया. सीट शेयरिंग को लेकर अभी चर्चा जारी है. लेकिन इससे एमआईएम राज्य में अकेली पड़ जाएगी. राष्ट्रीय स्तर पर ओवैसी के स्टैंड की वजह से पार्टी का बंगाल में सीपीएम और कांग्रेस के साथ 'महागठबंधन' बनाना मुश्किल है.

अब अगर ओवैसी के बंगाल में प्रभाव की चर्चा की जाए तो ये अभी तक उर्दूभाषी अपर कास्ट मुस्लिम तक सीमित है. अगर पूरे बंगाल का मामला आएगा तो ओवैसी के सामने सबसे बड़ा पेच भाषा का होगा. इसके अलावा पार्टी की सफलता अब्बास सिद्दीकी पर भी निर्भर कर रही थी. एमआईएम अपना बेस उत्तरी दिनाजपुर में बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इस इलाके में मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत से ज्यादा है. साथ ही ये इलाका बिहार के किशनगंज से लगता भी है जहां पर विधानसभा चुनाव में एमआईएम ने जीत हासिल की थी. कहा जा रहा है कि ओवैसी युवाओं में लोकप्रिय हैं लेकिन वो इसे वोट में कितना बदल पाते हैं ये तो वक्त ही बताएगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज