इमारतें और दूसरे स्ट्रक्चर ढहने से देश में हर दिन हुईं 7 मौतें

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 से 2015 के बीच इमारतों और अन्य स्ट्रक्चर के ढहने से 38,363 लोगों की मौत हुई. इनमें ज्यादातर लोगों की मौत आवासीय इमारतें ढहने से हुई है.

News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 5:06 PM IST
इमारतें और दूसरे स्ट्रक्चर ढहने से देश में हर दिन हुईं 7 मौतें
साल 2001 से 2015 के बीच देशभर में इमारतों समेत दूसरे स्ट्रक्चर ढहने से 38,363 लोगों की मौत हुई.
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Updated: August 2, 2019, 5:06 PM IST
मुंबई में 16 जुलाई, 2019 को एक बिल्डिंग ढह गई. हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई. इससे कुछ दिन पहले ही पुणे में एक दीवार ढहने पर 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 से 2015 के बीच देशभर में इमारतें और दूसरे स्ट्रक्चर ढहने से 38,363 लोगों की मौत हुई. इस दौरान स्ट्रक्चर ढहने की 37,514 घटनाएं हुईं. अकेले 2015 में 1885 लोगों को ऐसी ही दुर्घटनाओं में जान गंवानी पड़ी. साल-दर-साल ऐसी दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या लगातार घट तो रही है, लेकिन फिर भी हताहतों की संख्या ज्यादा है.

NCRB ने असमय मौत का बड़ा कारण माना
NCRB की सालाना रिपोर्ट 'एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड इन इंडिया' में लोगों की असमय मौत के कई कारणों को सूचीबद्ध किया है. इनमें विभिन्न ढांचों के ढहने को लोगों की असमय और अप्राकृतिक मौत का बड़ा कारण माना गया है. एनसीआरबी ने 2015 के बाद इस रिपोर्ट को प्रकाशित ही नहीं किया. इसलिए ऐसी घटनाओं के 2015 तक के ही आंकड़े उपलब्ध हैं. स्ट्रक्चर्स ढहने की घटनाओं में किसी साल वृद्धि हो जाती है तो कभी ये कम हो जाती हैं. साल 2001 से 2015 के बीच इमारतें और दूसरे स्ट्रक्चर ढहने की सबसे ज्यादा घटनाएं 2011 में हुईं. इस साल देश भर में 3,125 स्ट्रक्चर ढहे. इसके अलावा साल 2008 और 2013 में भी स्ट्रक्चर ढहने की 3000-3000 से ज्यादा घटनाएं हुईं.

हर साल घटती-बढ़ती रही है मृतकों की संख्या

साल 2014 और 2015 में ऐसी 2000-2000 से कम घटनाएं दर्ज की गईं. हालांकि, सिर्फ यही ऐसे दो साल हैं, जिनमें 2000 से कम ऐसी दुर्घटनाएं हुईं. साल 2001 से 2015 के बीच स्ट्रक्चर ढहने की हर दिन औसतन 7 घटनाएं हुई हैं. इससे होने वाली मौतों के मामले में 2001 और 2011 में 3000-3000 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इसके अलावा बाकी 11 साल में हुई घटनाओं में मरने वालों की संख्या 2000 से 3000 के बीच रही. वहीं, 2014 और 2015 में स्ट्रक्चर ढहने पर मरने वालों की संख्या 2000 से कम रही.

स्ट्रक्चर ढहने से हुई कुल मौतों के 5 फीसदी लोगों को बांध और पुल ढहने पर अपनी जान गंवानी पड़ी.


महिलाओं से ढाई गुना ज्यादा पुरुष आए चपेट में
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इन 15 साल में ऐसी दुर्घटनाओं में 27,000 पुरुषों की मौत हुई, जबकि 11,000 से कुछ ज्यादा महिलाओं को अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी. इन 15 में से 5 साल में महिलाओं के मुकाबले मरने वाले पुरुषों की संख्या ढाई गुना रही. सिर्फ 2001 में पुरुषों के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा महिलाएं ऐसी दुर्घटनाओं की शिकार बनीं. एनसीआरबी ने स्ट्रक्चर ढहने के मामलों को पांच कैटेगरी में बांटा है. साल 2001 से 2015 के बीच आवासीय इमारतें ढहने के कारण 15 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई. वहीं, कमर्शियल बिल्डिंग्स के ढहने से 3,981 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इसके अलावा फ्लाईओवर जैसे स्ट्रक्चर ढहने से कुल मृतकों के 45 फीसदी लोगों की मौत हुई. बाकी 5 फीसदी लोगों को बांध और पुल ढहने पर अपनी जान गंवानी पड़ी.

छोटे राज्यों से बड़े राज्यों में ज्यादा हुईं दुर्घटनाएं
साल 2001 से 2015 के बीच ज्यादातर स्ट्रक्चर ढहने की घटनाएं बड़े राज्यों में हुई हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 5690 लोगों की मौत ऐसी दुर्घटनाओं में ही हुई. वहीं, गुजरात में 3,961, तमिलनाडु में 3,457 और मध्य प्रदेश में 3,353 लोग स्ट्रक्चर ढहने पर काल के गाल में समा गए. इन 15 वर्षों में पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और केरल में 1000 से कम लोगों की ऐसी दुर्घटनाओं में मौत हुई. मुंबई में 2005 और 2013 में 100-100 से ज्यादा लोगों की मौत स्ट्रक्चर ढहने से हुई. इसके अलावा 6 ऐसे साल रहे जब हर साल 50 से ज्यादा लोग ऐसी दुर्घटनाओं के शिकार बने. मुंबई में बाकी के 7 साल में हर साल 50 से कम लोगों की स्ट्रक्चर ढहने से मौत हुई.

खस्ता हालत में हैं देश की हजारों स्कूली इमारतें
पूरे देश में सैकड़ों ऐसी इमारतें हैं, जो बहुत पुरानी हो चुकी हैं और कभी भी ढह सकती हैं. अकेले मुंबई में ऐसी 700 इमारतों को सरकार ने चिह्नित किया हुआ है. एक सर्वे के मुताबिक, पूरे देश में 0.67 फीसदी स्कूली इमारतें खस्ता हालत में हैं, जिनकी संख्या हजारों में होगी. अगर ऐसी तमाम इमारतों की पहचान कर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्ट्रक्चर ढहने से परिवारों के उजड़ने का सिलसिला जारी रहेगा. जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग ऐसी इमारतों को लेकर सख्त व ठोस कदम उठाएंं.

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First published: August 2, 2019, 4:51 PM IST
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