...तो आज पाकिस्तान का नक्शा कुछ और होता: सेना ने अफसर ने बताई करगिल की अनसुनी कहानी

बीस साल पहले पाकिस्तान की कमर तोड़ने ने लिए ऐसा प्लान बना था अगर वो अमल में लाया जाता तो पाकिस्तान का नक्शा आज कुछ और ही होता. बीस साल पहले की ये है अनकही अनसुनी दास्तान

Sandeep Bol | News18India
Updated: July 27, 2019, 2:02 PM IST
...तो आज पाकिस्तान का नक्शा कुछ और होता: सेना ने अफसर ने बताई करगिल की अनसुनी कहानी
करगिल के वीरों को याद कर रहा देश
Sandeep Bol
Sandeep Bol | News18India
Updated: July 27, 2019, 2:02 PM IST
करगिल की लड़ाई को बीस साल पूरे हो गए हैं. पूरा देश विजय दिवस की बीसवीं सालगिरह मना रहा है. लड़ाई के दौरान के कुछ किस्से लोगों के सामने हैं, लेकिन कुछ अब भी अनकहे अनसुने हैं. ये कहानी है एसी इन्फेंट्री बटालियन की जो करगिल की लड़ाई के बाद भी 4 महीने तक दुश्मन के इलाके में घुस कर कब्जा करने के आदेश का इंतजार कर रही थी. उस इन्फेंट्री बटालियन में तैनात एक अफसर ने बताया कि करगिल की लड़ाई के दौरान सेना का जोश इतना हाई था कि अगर आदेश आ जाते तो आज पाकिस्तान का नक्शा कुछ और होता.

ऐसे शुरू हुई तैयारी
मई के पहले हफ्ते में बटालिक में ताशी नाम के चरवाहे ने पाकिस्तानियों को देखा और उसके आठ दिन बाद से जंग शुरू हो गई. इसके साथ ही सेना ने हर वो तैयारी शुरू कर दी जो की किसी भी लड़ाई का एक नियम है. भारतीय सेना कार्रवाई के हिसाब से दो फॉरमेशन में बंटी हुई होती है. एक डिफेंसिव फॉर्मेशन और दूसरा ऑफेंसिव फॉर्मेशन. ऑफेंसिव में भी दो अलग-अलग तरह की फॉरेमेशन होती है, जिसमें तो एक दुश्मन से लड़ाई लड़ती है तो दूसरा फॉरेमेशन दुश्मन के इलाके में घुसकर कब्ज़ा करता है.

पाकिस्तान में घुसकर कब्जे की योजना थी
पाकिस्तान में घुसकर कब्जे की योजना थी


दुश्मन के इलाकों में घुसकर कब्जा करने की योजना थी
बीस साल पहले उस इन्फेंट्री बटालियन के अफसर ने नाम न ज़ाहिर करने के आग्रह पर बताया कि उनकी बटालियन को जम्मू-कश्मीर और पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास तैनात किया गया था. उन्हें ज़िम्मा दिया गया था कि वो दुश्मन के इलाके में घुसकर उनके इलाकों पर कब्ज़ा करेंगे. बटालियन की ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी थी और फिर हो रहा था सरकार की तरफ़ से फाइनल ऑर्डर का इंतजार. ये इंतजार करगिल की लड़ाई खत्म होने के 4 महीने बाद तक चलता रहा. एक तरफ करगिल में पाकिस्तान की सेना को मार भगाया जा रहा था तो दूसरी तरफ पाकिस्तान में घुसकर कब्ज़ा करने की तैयारी हो रही थी. ताकि पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सके और करगिल में पाकिस्तान को कमजोर किया जा सके.

नहीं आई वो आखिरी कॉल
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अधिकारी के मुताबिक ट्रेनिंग के बाद तीन दिन का असला दे दिया गया था. बस वो अपने सीओ की तरफ से कॉल का इंतजार कर रहे थे. अमूमन उस कॉल में पासवर्ड बताया जाना था. साथ ही मिशन का टाईम कब कहां कैसे करना है ये जानकारी दी जानी थी. लेकिन कोई कॉल नहीं आई. वो पूरे 850 से भी ज़्यादा सैनिकों के साथ अगले आदेश तक वहीं डटे रहे और अपनी ट्रेनिंग को लगातार दोहराते रहे. आखिरकार कॉल तो आया, लेकिन वापसी का और 6 महीने के बाद नवंबर में उनकी बटालियन वापस लौट आई जहां से उसे सीमा पर तैनात किया था.

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First published: July 27, 2019, 1:14 PM IST
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