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एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन पर रोक के क्या हैं मायने, दुनिया के कई देशों ने लगाया है प्रतिबंध

फ्रांस, इटली और जर्मनी ने एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर रोक लगा दी है.  (सांकेतिक तस्वीर)

फ्रांस, इटली और जर्मनी ने एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर रोक लगा दी है. (सांकेतिक तस्वीर)

AstraZeneca Vaccine: कंपनी ने कहा, "यह टीका स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित है. सुरक्षा हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और कंपनी अपने टीके की सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी कर रही है."

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 9:21 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले कुछ दिनों में जर्मनी, इटली, स्पेन, आयरलैंड और फ्रांस जैसे कुछ देशों ने कोरोना वायरस रोधी वैक्सीन एस्ट्राजेनेका के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. टीका लेने के बाद रक्त के थक्के बनने की घटनाओं संबंधी खबरें आने के बाद यह कदम उठाया गया है. इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश-स्वीडिश दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने तैयार किया है.


हालांकि, कोरोना के खिलाफ जंग में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को अब भी युनाइटेड किंगडम सहित कई अन्य देशों में उपयोग में लाया जा रहा है. द गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आठ मार्च तक करीब 1.7 करोड़ लोगों को यह टीका लगा है. यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में यह टीका लगवाने वाले लोगों में से 15 में प्लेटलेट्स की कमी और 22 में ब्लड क्लॉट का मामला सामने आया है.


मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञों ने 17 मार्च को दूसरे देशों से एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का इस्तेमाल करने की पैरवी की, लेकिन साथ ही कहा कि वे टीकाकरण की सुरक्षा को भी देख रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि यूरोपीय देशों समेत विभिन्न देशों द्वारा एस्ट्राजेनेका के टीके के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के बावजूद दुनियाभर में उसका कोरोना वायरस टीकाकरण कार्यक्रम निर्बाध रूप से चल रहा है.



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नॉर्वे, डेनमार्क, नीदरलैंड, आयरलैंड, स्पेन, बुल्गारिया ने वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, जबकि इटली, ऑस्ट्रिया, एस्टॉनिया, लातविया, लग्जमबर्ग और लिथुआनिया ने 17 देशों को भेजे गए दस लाख खुराक के एक विशेष बैच से टीकाकरण पर रोक लगा दी है. यूरोप में एस्ट्राजेनेका का कोविड-19 रोधी टीका लगवाने के बाद दिमाग में खून के थक्के जमने के गंभीर मामले सामने आने के बाद इस टीके पर प्रतिबंध लगा दिया गया.


इसी तरह के केस नॉर्वे और जर्मनी में भी सामने आए. जर्मनी से आए नतीजों के आधार पर फ्रांस के अधिकारियों ने वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के अपने फैसले को सही बताया और कहा, 'काफी कम संख्या में दुष्परिणाम आए हैं.' वहीं, इटली ने भी कहा कि वैक्सीन पर रोक लगाने का निर्णय 'सुरक्षा के नजरिए' से लिया गया है जब तक कि यूरोपीय औषधि एजेंसी वैक्सीन को लेकर अपने नए आंकड़े सामने नहीं लाती.




दूसरी ओर, एस्ट्राजेनेका ने 15 मार्च को अपने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वह एक बार फिर से अपने कोविड-19 के टीके के सुरक्षित होने के बारे में भरोसा दिलाती है. कंपनी ने कहा, "यह टीका स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित है. सुरक्षा हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और कंपनी अपने टीके की सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी कर रही है."




कंपनी ने कहा कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में उसका कोविड-19 का टीका 1.7 करोड़ से अधिक लोगों ने लगवाया है, लेकिन किसी भी मामले में ब्लड क्लॉट की वजह से फेफड़ों में रुकावट या प्लेटलेट्स की कमी का मामला सामने नहीं आया है. कंपनी ने कहा कि आबादी के आकार को देखते हुए यह संख्या काफी कम है. अन्य लाइसेंस वाली कोविड-19 की वैक्सीन में भी इस तरह के मामले आए हैं.


गौरतलब है कि एस्ट्राजेनेका/ऑक्सफोर्ड का कोविड-19 टीके का उत्पादन सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने किया है और यह भारत में चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान का हिस्सा है. इस अभियान के तहत भारत में कोविशील्ड (एस्ट्राजेनेका/ऑक्सफोर्ड) और कोवैक्सिन (भारत बायोटेक) टीका लगाया जा रहा है.

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